अभिवृद्धि और विकास का अर्थ, परिभाषा और अंतर – Difference Between Growth and Development

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026

⚡ संक्षिप्त उत्तर
अभिवृद्धि का मतलब है शरीर और उसके अंगों का आकार, लंबाई, भार बढ़ना, जिसे नापा-तौला जा सकता है। विकास इससे बड़ी चीज़ है: इसमें शरीर के साथ सोच, भावना, भाषा और व्यवहार के सभी बदलाव आते हैं। अभिवृद्धि एक उम्र के बाद रुक जाती है, पर विकास गर्भ से मृत्यु तक चलता रहता है।
📏
अभिवृद्धि
आकार, भार (मात्रात्मक)
🌱
विकास
गुण + क्षमता (व्यापक)
♾️
निरंतरता
आजीवन प्रक्रिया
⬇️
दिशा
सिर से पैर की ओर

बच्चा जब स्कूल में आता है तो हम कहते हैं, “इसकी लंबाई कितनी बढ़ गई!” यह अभिवृद्धि की बात है। फिर हम यह भी कहते हैं, “अब यह अपनी बात अच्छे से कहने लगा है, दोस्तों के साथ मिलकर खेलता है।” यह विकास की बात है। CTET, REET, UPTET और UGC NET जैसी परीक्षाओं में इन्हीं दोनों का फ़र्क और विकास के सिद्धांत बार-बार पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें आराम से समझ लेते हैं।

⚖️ अभिवृद्धि और विकास में अंतर

दोनों शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं, इसलिए विद्यार्थी अक्सर उलझ जाते हैं। नीचे की तालिका में फ़र्क साफ़ देख लीजिए।

आधारअभिवृद्धि (Growth)विकास (Development)
अर्थशरीर और अंगों के आकार, लंबाई, भार में बढ़ोतरीशरीर और मन में आने वाले सभी तरह के बदलाव
स्वरूपमात्रात्मक (कितना बढ़ा)गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों (कैसा बना)
नापनानापा और तौला जा सकता हैसीधे नापना कठिन, व्यवहार देखकर आँका जाता है
दायरासीमित (मुख्यतः शारीरिक)व्यापक (शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक)
अवधिपरिपक्वता के बाद प्रायः रुक जाती हैजीवन भर चलता रहता है
आपसी संबंधविकास का एक हिस्सा हैअभिवृद्धि को अपने में समाए रहता है
🧠 ट्रिक: “अभिवृद्धि = आकार, विकास = आकार + गुण”। हेडफील्ड के अनुसार विकास में अभिवृद्धि का भाव हमेशा शामिल रहता है, और अभिवृद्धि रुक जाए तो विकास भी अटकने लगता है।

📖 विकास के बारे में विद्वान क्या कहते हैं

  • हेडफील्ड: अभिवृद्धि आकार का बढ़ना है, जबकि विकास रूप और आकार दोनों में बदलाव है।
  • गैसेल: विकास एक ऐसा परिवर्तन है जिससे बच्चे में नए गुण और नई क्षमताएँ आती हैं।
  • हरलॉक: विकास का नतीजा यह है कि व्यक्ति में नई विशेषताएँ और नई योग्यताएँ पैदा होती हैं।
  • गॉर्डन: विकास वह प्रक्रिया है जो जन्म से शुरू होकर पूर्ण विकास तक चलती है।

कुछ लोग मानते हैं कि बड़े होने के बाद बदलाव रुक जाता है। यह सही नहीं है। प्रौढ़ होने के बाद भी बदलाव चलता है, बस उसकी रफ़्तार धीमी हो जाती है।

🔄 विकास-क्रम में होने वाले चार परिवर्तन

  • आकार में बदलाव: लंबाई, चौड़ाई, भार बढ़ते हैं। हृदय, मस्तिष्क जैसे भीतरी अंग भी बड़े होते हैं। साथ में शब्दकोश और याददाश्त का दायरा भी फैलता है।
  • अनुपात में बदलाव: छोटे बच्चे का सिर हाथ-पैरों की तुलना में बड़ा दिखता है। किशोरावस्था तक यह अनुपात वयस्कों जैसा हो जाता है। सोच में भी यही होता है: बच्चा कल्पना की दुनिया में रहता है, बाद में वास्तविकता को समझने लगता है।
  • पुराने चिह्नों का लोप: दूध के दाँत गिरते हैं, थाइमस ग्रंथि छोटी हो जाती है, बचपन की कई आदतें छूट जाती हैं।
  • नए चिह्नों का उदय: स्थायी दाँत आते हैं, किशोरावस्था में शारीरिक बदलाव होते हैं और नई रुचियाँ बनती हैं।

🧭 अभिवृद्धि और विकास के सिद्धांत

विकास कैसे होता है, इसके कुछ नियम हैं। परीक्षा में अक्सर “कौन-सा सिद्धांत किस उदाहरण से जुड़ा है” पूछा जाता है, इसलिए उदाहरण साथ में याद रखिए।

सिद्धांतमतलबउदाहरण
समान प्रतिमानएक जाति के सभी जीवों में विकास का क्रम एक-सा होता हैदुनिया भर के बच्चों में विकास सिर से पैर की ओर बढ़ता है
सामान्य से विशिष्टपहले सारा शरीर प्रतिक्रिया करता है, फिर खास अंगशिशु वस्तु पकड़ने में हाथ-पैर-मुँह सब चलाता है, बड़ा होकर सिर्फ़ हाथ
सतत विकासविकास एक साथ झटके में नहीं, धीरे-धीरे चलता हैदाँत जन्म से पहले बनने लगते हैं, 6 माह के आसपास दिखते हैं
परस्पर संबंधअलग-अलग पक्ष एक-दूसरे से जुड़े होते हैंतीव्र बुद्धि वाले बच्चे का सामाजिक और शारीरिक विकास भी आम तौर पर अच्छा होता है
अंगों के विकास की गति में भिन्नतासब अंग एक रफ़्तार से नहीं बढ़तेमस्तिष्क 6 वर्ष तक लगभग पूरा हो जाता है, हाथ-पैर किशोरावस्था तक बढ़ते हैं
विकास की दिशाविकास एक तय दिशा में बढ़ता हैपहले सिर उठाना, फिर बैठना, फिर खड़े होना
वैयक्तिक भिन्नताहर बच्चे की गति अलगसब बच्चे एक ही उम्र में चलने नहीं लगते
भिन्नताक्रम समान, पर गति समान नहींशैशव और किशोरावस्था में गति तेज, बाल्यावस्था में धीमी; लड़के-लड़कियों में भी फ़र्क

विकास की दिशा को दो नामों से याद रखें: मस्तकाधोमुखी (सिर से पैर की ओर) और निकट-दूर (केंद्र से परिधि की ओर, यानी शरीर के मध्य से हाथ-पैर की उँगलियों की ओर)।

🏫 शिक्षक के लिए ये सिद्धांत क्यों ज़रूरी हैं

  • पता चलता है कि किस उम्र में बच्चे से क्या उम्मीद रखनी चाहिए। ज़्यादा उम्मीद रखी तो बच्चे में हीनता आती है, कम रखी तो उसे आगे बढ़ने का मौक़ा नहीं मिलता।
  • समझ आता है कि कब प्रोत्साहन देना है। जैसे बच्चा बोलना या चलना शुरू करे तो उसे अभ्यास का मौक़ा मिलना चाहिए।
  • बदलावों की जानकारी पहले से हो तो किशोर तनाव में नहीं आते। शिक्षक और माता-पिता उन्हें पहले से तैयार कर सकते हैं।
  • कक्षा की गतिविधियाँ बच्चों की उम्र और क्षमता के हिसाब से तय करने में मदद मिलती है।

🌍 विकास को प्रभावित करने वाले कारक

  • वंशानुक्रम: माता-पिता से मिले गुण और क्षमताएँ।
  • वातावरण: घर, विद्यालय और समाज का माहौल।
  • बुद्धि: तेज बुद्धि वाले बच्चे आम तौर पर जल्दी बोलना और चलना सीख जाते हैं।
  • लिंग: जन्म के समय लड़कों का आकार थोड़ा बड़ा होता है, पर बाद में लड़कियों का शारीरिक और यौन परिपक्वता का विकास पहले होता है।
  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ: थाइरॉक्सिन जैसे हार्मोन कद और मानसिक विकास पर असर डालते हैं। इसकी कमी से विकास रुक सकता है।
  • जन्म-क्रम: बाद में जन्मे बच्चे बड़े भाई-बहनों को देखकर बहुत-सी बातें जल्दी सीख लेते हैं।
  • रोग और चोट: लंबी बीमारी या सिर की गंभीर चोट विकास में रुकावट बनती है।
  • पोषण: कुपोषण से शारीरिक और मानसिक, दोनों विकास पर बुरा असर पड़ता है।
  • शुद्ध हवा और धूप: इनकी कमी से बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है।
  • प्रजाति और परिवेश: अलग-अलग समूहों में विकास की गति में थोड़ा फ़र्क देखा गया है।

📅 विकास की अवस्थाएँ

विकास की अवस्थाओं को लेकर मनोवैज्ञानिक एकमत नहीं हैं। परीक्षा के लिए नीचे का वर्गीकरण याद रखिए।

विद्वान / वर्गीकरणअवस्थाएँ
रॉसशैशव (जन्म से 3 वर्ष), पूर्व बाल्यकाल (3 से 6), उत्तर बाल्यकाल (6 से 12), किशोरावस्था (12 से 18)
कॉलेसनिकपूर्व जन्मकाल; शैशव (जन्म से 3-4 सप्ताह); आरंभिक शैशव (1 से 15 माह); उत्तर शैशव (15 से 30 माह); पूर्व बाल्य (30 माह से 5 वर्ष); मध्य बाल्य (5 से 9 वर्ष); उत्तर बाल्य (9 से 12 वर्ष); किशोरावस्था (12 से 21 वर्ष)
सामान्य पाँच अवस्थाएँपूर्व जन्मकाल; शैशवावस्था (जन्म से 5-6 वर्ष); बाल्यावस्था (5-6 से 12 वर्ष); किशोरावस्था (12 से 18 वर्ष); प्रौढ़ावस्था (18 के बाद)

🧩 विकास के मुख्य पहलू

🏃
शारीरिक
Physical
🧠
मानसिक
Mental
😊
संवेगात्मक
Emotional
🤝
सामाजिक
Social

इनके साथ चारित्रिक विकास (Character Development) को भी जोड़ा जाता है। यानी कुल पाँच पहलू हुए।

इसे जोड़कर पढ़ें: संवेगात्मक विकास, अधिगम क्या है, पियाजे का सिद्धांत, कोह्लबर्ग का नैतिक विकास और व्यक्तित्व।

📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

प्रश्न 1. इनमें से किसे सीधे नापा-तौला जा सकता है?
(1) विकास
(2) अभिवृद्धि
(3) अधिगम
(4) संवेग
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) अभिवृद्धि
अभिवृद्धि मात्रात्मक होती है, इसलिए लंबाई-भार की तरह उसे नापा जा सकता है। विकास गुणात्मक पक्ष भी रखता है।
प्रश्न 2. अभिवृद्धि और विकास के बारे में कथन:
(A) विकास आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है।
(B) अभिवृद्धि को नापा-तौला जा सकता है।
(C) विकास में गुणात्मक परिवर्तन भी शामिल हैं।
(D) अभिवृद्धि जीवन भर समान गति से चलती रहती है।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) केवल A, B और C
A, B और C सही हैं। D गलत है, क्योंकि अभिवृद्धि परिपक्वता के बाद प्रायः रुक जाती है।
प्रश्न 3. कथन I: सभी सामान्य बच्चों में विकास का क्रम समान होता है।
कथन II: सभी बच्चों में विकास की गति भी समान होती है।
(1) दोनों कथन सही हैं
(2) कथन I सही, कथन II गलत
(3) कथन I गलत, कथन II सही
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) कथन I सही, कथन II गलत
क्रम समान होता है (समान प्रतिमान), पर गति हर बच्चे में अलग होती है (वैयक्तिक भिन्नता)।
प्रश्न 4. सूची I (सिद्धांत) को सूची II (उदाहरण) से सुमेलित कीजिए:

सूची Iसूची II
(A) सामान्य से विशिष्ट(I) शिशु वस्तु पकड़ने में पहले पूरा शरीर चलाता है, बाद में सिर्फ़ हाथ
(B) सतत विकास(II) दाँत जन्म से पहले बनने लगते हैं
(C) विकास की दिशा(III) पहले सिर उठाना, फिर बैठना, फिर खड़े होना
(D) वैयक्तिक भिन्नता(IV) सब बच्चे एक उम्र में चलना शुरू नहीं करते
(1) A-I, B-II, C-III, D-IV
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-III, C-II, D-IV
(4) A-IV, B-II, C-III, D-I
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-I, B-II, C-III, D-IV
सामान्य से विशिष्ट → पहले पूरा शरीर, फिर हाथ; सतत विकास → दाँत पहले से बनना; विकास की दिशा → सिर उठाना, बैठना, खड़ा होना; वैयक्तिक भिन्नता → सब बच्चे एक साथ नहीं चलते।
प्रश्न 5. शिशु के शारीरिक नियंत्रण का सही क्रम चुनिए:
(A) खड़ा होना
(B) सिर उठाना
(C) सहारे से बैठना
(D) चलना
(1) B, C, A, D
(2) C, B, A, D
(3) B, A, C, D
(4) A, B, C, D
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) B, C, A, D
विकास सिर से पैर की ओर बढ़ता है: पहले सिर उठाना, फिर बैठना, फिर खड़ा होना और अंत में चलना।
प्रश्न 6. विकास की सामान्य पाँच अवस्थाओं में बाल्यावस्था की उम्र कितनी मानी जाती है?
(1) जन्म से 5-6 वर्ष
(2) 5-6 से 12 वर्ष
(3) 12 से 18 वर्ष
(4) 18 वर्ष के बाद
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) 5-6 से 12 वर्ष
शैशव जन्म से 5-6 वर्ष, बाल्यावस्था 5-6 से 12 वर्ष, किशोरावस्था 12 से 18 वर्ष।

❓ अभिवृद्धि और विकास पर सवाल-जवाब (FAQ)

1. अभिवृद्धि और विकास में मुख्य अंतर क्या है?
अभिवृद्धि शरीर के आकार, लंबाई और भार का बढ़ना है, जिसे नापा जा सकता है। विकास व्यापक है और इसमें शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक सभी बदलाव आते हैं।
2. विकास को आजीवन प्रक्रिया क्यों कहते हैं?
क्योंकि गर्भ से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति में बदलाव चलता रहता है। प्रौढ़ होने के बाद भी बदलाव होता है, बस उसकी गति धीमी हो जाती है।
3. विकास के प्रमुख सिद्धांत कौन-से हैं?
समान प्रतिमान, सामान्य से विशिष्ट, सतत विकास, परस्पर संबंध, अंगों के विकास की गति में भिन्नता, विकास की दिशा, वैयक्तिक भिन्नता और भिन्नता का सिद्धांत।
4. विकास की दिशा क्या होती है?
मस्तकाधोमुखी यानी सिर से पैर की ओर, और निकट-दूर यानी शरीर के केंद्र से बाहरी अंगों की ओर।
5. शिक्षक को विकास के सिद्धांत क्यों जानने चाहिए?
इससे वह जान पाता है कि किस उम्र के बच्चे से क्या अपेक्षा रखनी है, कब प्रोत्साहन देना है और कक्षा की गतिविधियाँ कैसे तय करनी हैं।

केवल कृष्ण घोड़ेला

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।

लेखक: केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड., नेट (हिंदी) | कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | संस्थापक, GK Hub

इस लेख की जानकारी पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर लिखी गई है। कोई त्रुटि मिले तो हमें बताएँ | संपादकीय नीति | About Us

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