सत्यशोधक समाज (1873): स्थापना, उद्देश्य, कार्य और ज्योतिबा फुले | Satyashodhak Samaj in Hindi

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026

⚡ संक्षिप्त उत्तर
सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फुले ने 24 सितंबर 1873 को पुणे में की। उद्देश्य: शूद्र-अतिशूद्र और स्त्रियों को ब्राह्मण पुरोहित-वर्चस्व, जातिगत शोषण और अशिक्षा से मुक्त कराना। फुले ने इसी दौर में “गुलामगिरी” (1873) लिखी। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले समाज के महिला विभाग की प्रमुख थीं।
📅
24 सित. 1873
स्थापना
📍
पुणे
स्थापना स्थल
📖
गुलामगिरी
1873 की पुस्तक
🏅
महात्मा
उपाधि 1888

सत्यशोधक समाज UPSC, RAS, REET, SSC और राज्य परीक्षाओं का नियमित टॉपिक है। नीचे स्थापना, उद्देश्य, कार्य, फुले का जीवन परिचय, तुलना तालिका, MCQ और FAQ हैं।

🌱 सत्यशोधक समाज क्या है?

“सत्यशोधक” का अर्थ है सत्य की खोज करने वाला। 19वीं सदी के महाराष्ट्र में जातिभेद, ब्राह्मणवादी वर्चस्व, अशिक्षा और स्त्री-पुरुष असमानता व्याप्त थी। ज्योतिबा फुले ने इसी के विरोध में 24 सितंबर 1873 को सत्यशोधक समाज बनाया। वे स्वयं अध्यक्ष और सावित्रीबाई महिला विभाग की प्रमुख थीं। इसे ब्राह्मणवादी वर्चस्व का विरोध करने वाला संगठन माना जाता है। इसकी मान्यता थी कि भक्त और ईश्वर के बीच किसी बिचौलिये की आवश्यकता नहीं है।

प्रेरणा: फुले पर थॉमस पेन की “राइट्स ऑफ मैन”, शिवाजी और अमेरिकी दास-विरोधी आंदोलन का प्रभाव माना जाता है। 1848 में एक ब्राह्मण मित्र के विवाह में हुए अपमान ने भी जाति-व्यवस्था के विरुद्ध उनके संकल्प को मज़बूत किया।

🎯 उद्देश्य

  • धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यों में पुरोहित की अनिवार्यता समाप्त करना।
  • निम्न व पिछड़ी जातियों और स्त्रियों में शिक्षा का प्रसार।
  • जाति-आधारित उत्पीड़न और सूदखोरों-पुरोहितों के शोषण से मुक्ति।
  • मूर्तिपूजा, कर्मकांड, पुनर्जन्म जैसे विचारों की आलोचना और तर्कसंगत सोच का प्रसार।
  • किसानों और श्रमिकों के हितों की रक्षा, सभी जातियों में एकता।

🛠️ प्रमुख कार्य और प्रसार

  • बिना पुरोहित के विवाह-संस्कार की परंपरा शुरू की गई।
  • विधवा पुनर्विवाह का समर्थन; फुले दंपति ने बाल-हत्या प्रतिबंधक गृह चलाया।
  • शाखाएँ पुणे, मुंबई और महाराष्ट्र के अनेक भागों में फैलीं।
  • कोल्हापुर के शाहू महाराज ने समाज को आर्थिक और नैतिक सहयोग दिया; फुले की मृत्यु के बाद आंदोलन आगे बढ़ाया।
  • समाचार-पत्र “दीनबंधु” (जनवरी 1877) ने आंदोलन में भूमिका निभाई; इसे कृष्णराव भालेकर ने निकाला।
  • 1882 में हंटर आयोग को शिक्षा पर ज्ञापन देकर गरीब किसान वर्ग के लिए शिक्षा की माँग की।

👤 ज्योतिबा फुले का जीवन परिचय

बिंदुजानकारी
पूरा नामज्योतिराव गोविंदराव फुले
जन्म11 अप्रैल 1827, पुणे (परिवार का मूल गाँव कटगुण, सतारा), माली परिवार
पिता / मातागोविंदराव / चिमणाबाई
पत्नीसावित्रीबाई फुले (विवाह 1840)
पहला बालिका विद्यालय1848, पुणे (भिडे वाड़ा); सावित्रीबाई प्रथम महिला शिक्षिका
संस्थासत्यशोधक समाज, 24 सितंबर 1873
उपाधि“महात्मा” (1888, मुंबई की सभा में)
निधन28 नवंबर 1890

📚 प्रमुख पुस्तकें

पुस्तकवर्ष / विशेष
तृतीय रत्न1855 का नाटक
छत्रपति शिवाजी (पोवाडा)1869
गुलामगिरी1873; अमेरिकी दास-प्रथा विरोधियों को समर्पित
किसान का कोड़ा1881
सार्वजनिक सत्यधर्ममृत्यु के बाद प्रकाशित (1891)
🧠 ट्रिक: “1873 – गुलामगिरी – सत्यशोधक – पुणे”। फुले = शिक्षा + जाति-विरोध + किसान; सावित्रीबाई = पहली महिला शिक्षिका।

🔁 सत्यशोधक समाज और अन्य सुधार संस्थाएँ

संस्थासंस्थापकवर्ष
ब्रह्म समाजराजा राममोहन राय1828
प्रार्थना समाजआत्माराम पांडुरंग1867
आर्य समाजदयानंद सरस्वती1875
सत्यशोधक समाजज्योतिबा फुले1873

आगे पढ़ें: भीमराव अंबेडकर (फुले को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे), सरदार वल्लभभाई पटेल, जैन धर्म, चार्टर एक्ट 1833 और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रश्न। अधिक जानकारी: सत्यशोधक समाज (विकिपीडिया)।

📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

प्रश्न 1. सत्यशोधक समाज की स्थापना किसने की?
(1) दयानंद सरस्वती
(2) ज्योतिबा फुले
(3) आत्माराम पांडुरंग
(4) गोपाल कृष्ण गोखले
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) ज्योतिबा फुले
24 सितंबर 1873 को पुणे में।
प्रश्न 2. ज्योतिबा फुले की पुस्तक “गुलामगिरी” किस वर्ष प्रकाशित हुई?
(1) 1855
(2) 1869
(3) 1873
(4) 1881
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (3) 1873
गुलामगिरी 1873 में लिखी गई; किसान का कोड़ा 1881 में।
प्रश्न 3. सत्यशोधक समाज के बारे में कथन:
(A) स्थापना पुणे में हुई।
(B) सावित्रीबाई महिला विभाग की प्रमुख थीं।
(C) शाहू महाराज ने सहयोग दिया।
(D) इसकी स्थापना 1885 में हुई।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) केवल A, B और C
D गलत है; स्थापना 24 सितंबर 1873 को हुई थी, 1885 में नहीं।
प्रश्न 4. अभिकथन (A): सत्यशोधक समाज ने पुरोहित के बिना विवाह की परंपरा शुरू की।
कारण (R): समाज मानता था कि भक्त और ईश्वर के बीच बिचौलिये की आवश्यकता नहीं।
(1) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है
बिचौलिये को नकारने के कारण पुरोहित-रहित विवाह शुरू हुए।
प्रश्न 5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:

सूची Iसूची II
(A) सत्यशोधक समाज(I) 1873
(B) आर्य समाज(II) 1875
(C) प्रार्थना समाज(III) 1867
(D) ब्रह्म समाज(IV) 1828
(1) A-I, B-II, C-III, D-IV
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-I, B-II, C-III, D-IV
चारों मिलान सही हैं।
प्रश्न 6. सही कालक्रम चुनिए:
(A) आर्य समाज
(B) ब्रह्म समाज
(C) सत्यशोधक समाज
(D) प्रार्थना समाज
(1) B, D, C, A
(2) B, C, D, A
(3) D, B, C, A
(4) B, D, A, C
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) B, D, C, A
ब्रह्म 1828 → प्रार्थना 1867 → सत्यशोधक 1873 → आर्य 1875।

❓ सत्यशोधक समाज पर सवाल-जवाब (FAQ)

1. सत्यशोधक समाज की स्थापना कब हुई?
24 सितंबर 1873 को पुणे में, ज्योतिबा फुले द्वारा।
2. सत्यशोधक समाज का उद्देश्य क्या था?
पिछड़ी जातियों और स्त्रियों को जातिगत शोषण, पुरोहित-वर्चस्व और अशिक्षा से मुक्त कराना।
3. “गुलामगिरी” किसने लिखी?
ज्योतिबा फुले ने, 1873 में।
4. ज्योतिबा फुले को “महात्मा” की उपाधि कब मिली?
1888 में।
5. सावित्रीबाई फुले की क्या भूमिका थी?
वे भारत की प्रथम महिला शिक्षिका थीं और सत्यशोधक समाज के महिला विभाग की प्रमुख रहीं।

केवल कृष्ण घोड़ेला

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।

लेखक: केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड., नेट (हिंदी) | कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | संस्थापक, GK Hub

इस लेख की जानकारी पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर लिखी गई है। कोई त्रुटि मिले तो हमें बताएँ | संपादकीय नीति | About Us

Leave a Comment