अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
असहयोग आंदोलन (1920–22) महात्मा गांधी के नेतृत्व में चला भारत का पहला देशव्यापी जन-आंदोलन था। इसकी शुरुआत 1 अगस्त 1920 को हुई। कारण: रौलट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत का मुद्दा। 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को इसे वापस ले लिया।
असहयोग आंदोलन UPSC, RAS, SSC, REET और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। नीचे कारण, कार्यक्रम, अधिवेशन, परिणाम, ट्रिक, MCQ और FAQ हैं।

📌 असहयोग आंदोलन एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| आरंभ | 1 अगस्त 1920 (लोकमान्य तिलक के निधन का दिन) |
| नेतृत्व | महात्मा गांधी |
| लक्ष्य | स्वराज (ब्रिटिश सरकार से अहिंसक असहयोग) |
| कारण | रौलट एक्ट, जलियाँवाला बाग, हंटर समिति रिपोर्ट, खिलाफत का प्रश्न |
| वायसराय | लॉर्ड चेम्सफोर्ड, अप्रैल 1921 से लॉर्ड रीडिंग |
| अंत | चौरी-चौरा (5 फरवरी 1922); वापसी 12 फरवरी 1922 (बारदोली प्रस्ताव) |
प्रथम विश्व युद्ध में भारतीयों ने ब्रिटेन का साथ दिया था और स्वशासन की आशा की थी। पर युद्ध के बाद मिले 1919 के सुधार असंतोषजनक रहे। गांधीजी ने कहा था कि आंदोलन सफल रहा तो एक वर्ष में स्वराज मिल सकता है।
❓ असहयोग आंदोलन के कारण

- प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: आत्मनिर्णय के सिद्धांत से स्वतंत्रता की आशा जगी, पर निराशा मिली।
- आर्थिक संकट: युद्ध-व्यय की वसूली, महँगाई, सैनिकों की छँटनी से बेरोज़गारी।
- मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919): जनता की स्वराज की अपेक्षा पूरी नहीं हुई।
- रौलट एक्ट (18 मार्च 1919): बिना मुकदमे गिरफ्तारी का अधिकार; मोतीलाल नेहरू के शब्दों में “न अपील, न वकील, न दलील”।
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): जनरल डायर की गोलीबारी; सरकारी आँकड़ों में 379 मौतें, अन्य अनुमान 1000 से अधिक।
- हंटर समिति की रिपोर्ट: डायर के प्रति नरम रुख से असंतोष।
- खिलाफत आंदोलन: सेवर्स की संधि से तुर्की के खलीफा की स्थिति कमज़ोर होने पर मुसलमान नाराज़; गांधीजी ने समर्थन दिया।
🏛️ कांग्रेस के अधिवेशन और प्रस्ताव
| अधिवेशन | निर्णय |
|---|---|
| कलकत्ता विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920), अध्यक्ष: लाला लाजपत राय | गांधीजी का असहयोग प्रस्ताव पारित; सी.आर. दास, बिपिनचंद्र पाल, एनी बेसेंट, जिन्ना, मालवीय आदि ने विरोध किया |
| नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) | सी.आर. दास ने प्रस्ताव रखा; पुष्टि हुई; कांग्रेस का लक्ष्य “वैध और शांतिपूर्ण तरीकों से स्वराज” बना; नया संविधान |
| विजयवाड़ा (मार्च 1921) | तिलक स्वराज फंड में 1 करोड़ रुपये, 1 करोड़ सदस्य और 20 लाख चरखे का लक्ष्य |
| अहमदाबाद (दिसंबर 1921) | अध्यक्ष हकीम अजमल खाँ (कार्यवाहक); सविनय अवज्ञा की तैयारी |
नागपुर में कांग्रेस ने 15 सदस्यीय कार्यसमिति बनाई, प्रांतीय कमेटियाँ भाषा के आधार पर संगठित कीं और सदस्यता शुल्क घटाकर 4 आना कर दिया, ताकि गरीब भी सदस्य बन सकें।
🛠️ आंदोलन के कार्यक्रम
| नकारात्मक (बहिष्कार) | रचनात्मक |
|---|---|
| सरकारी उपाधियाँ और मानद पद वापस करना | राष्ट्रीय स्कूल-कॉलेजों की स्थापना |
| सरकारी स्कूल-कॉलेज का बहिष्कार | चरखा और खादी का प्रचार |
| अदालतों और विधान परिषदों का बहिष्कार | पंचायतों से विवाद-निपटारा |
| विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार | हिंदू-मुस्लिम एकता, छुआछूत उन्मूलन, शराबबंदी |
| सरकारी समारोहों में भाग न लेना; कर न देने की तैयारी | गाँवों में कांग्रेस कमेटियाँ |
- गांधीजी ने कैसर-ए-हिंद की उपाधि लौटाई; जमनालाल बजाज ने राय बहादुर उपाधि लौटाई।
- वकालत छोड़ने वालों में सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, राजगोपालाचारी आदि थे।
- काशी विद्यापीठ, बिहार विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ, जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसी संस्थाएँ खुलीं; सुभाषचंद्र बोस कलकत्ता नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल बने।
- विदेशी वस्त्रों का आयात 1920–21 में 102 करोड़ रुपये से घटकर 1921–22 में 57 करोड़ रह गया।
- नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन का देशव्यापी बहिष्कार हुआ।

🔚 चौरी-चौरा कांड और आंदोलन की वापसी
5 फरवरी 1922 को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के चौरी-चौरा में भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए। हिंसा से आहत गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कार्यसमिति की बैठक के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया। मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास, सुभाष बोस आदि नेताओं ने इस निर्णय की आलोचना की। गांधीजी को मार्च 1922 में गिरफ्तार कर 6 वर्ष की सज़ा हुई। आगे चलकर सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी बनाई।
📈 परिणाम और महत्व
- राष्ट्रीय आंदोलन पहली बार जनव्यापी बना; किसान, मज़दूर, छात्र, महिलाएँ जुड़ीं।
- कांग्रेस का सामाजिक आधार गाँवों तक फैला।
- हिंदू-मुस्लिम एकता का अस्थायी प्रदर्शन।
- स्वदेशी, खादी और राष्ट्रीय शिक्षा का प्रसार।
- आंदोलन की वापसी से निराशा आई और स्वराज पार्टी का जन्म हुआ।
आगे पढ़ें: जलियाँवाला बाग हत्याकांड, चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह, साइमन कमीशन, सरदार पटेल और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रश्न।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) 12 फरवरी 1922
(3) 1 अगस्त 1920
(4) 13 अप्रैल 1919
👉 उत्तर देखें
चौरी-चौरा (5 फरवरी) के बाद बारदोली प्रस्ताव से वापसी हुई।
(2) नागपुर 1920
(3) अहमदाबाद 1921
(4) लखनऊ 1916
👉 उत्तर देखें
सितंबर 1920 में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में; नागपुर में पुष्टि हुई।
(A) यह गांधीजी का पहला देशव्यापी जन-आंदोलन था।
(B) इसके कारणों में रौलट एक्ट और जलियाँवाला बाग थे।
(C) गांधीजी ने कैसर-ए-हिंद उपाधि लौटाई।
(D) आंदोलन चौरी-चौरा के बाद सविनय अवज्ञा में बदल दिया गया।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है; चौरी-चौरा के बाद आंदोलन वापस लिया गया, सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में शुरू हुआ।
कारण (R): चौरी-चौरा में हिंसा हुई और गांधीजी अहिंसा से समझौता नहीं चाहते थे।
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
हिंसा के कारण आंदोलन स्थगित हुआ।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) रौलट एक्ट | (I) 18 मार्च 1919 |
| (B) जलियाँवाला बाग | (II) 13 अप्रैल 1919 |
| (C) असहयोग आंदोलन आरंभ | (III) 1 अगस्त 1920 |
| (D) चौरी-चौरा | (IV) 5 फरवरी 1922 |
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
चारों मिलान सही हैं।
(A) चौरी-चौरा कांड
(B) रौलट एक्ट
(C) नागपुर अधिवेशन
(D) जलियाँवाला बाग
(2) D, B, C, A
(3) B, C, D, A
(4) B, D, A, C
👉 उत्तर देखें
मार्च 1919 → अप्रैल 1919 → दिसंबर 1920 → फरवरी 1922।
❓ असहयोग आंदोलन पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
