बूंदी किसान आंदोलन 1922: कारण, नेता, डाबी हत्याकांड व परिणाम | Bundi Kisan Andolan in Hindi

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026

⚡ संक्षिप्त उत्तर
बूंदी किसान आंदोलन 1922 ई. में बूंदी रियासत के बरड़ क्षेत्र में शुरू हुआ। नेतृत्व पंडित नयनू राम शर्मा ने किया। यह आंदोलन जागीरदारों के नहीं, बल्कि राज्य प्रशासन की ऊँची लगान, लागबाग और बेगार के विरुद्ध था। 2 अप्रैल 1923 को डाबी हत्याकांड में नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर शहीद हुए। आंदोलन 1927 में समाप्त हुआ।
📅
1922
आंदोलन की शुरुआत (बरड़)
👤
नयनू राम शर्मा
मुख्य नेतृत्वकर्ता
🩸
2 अप्रैल 1923
डाबी हत्याकांड
🏁
1927
आंदोलन का अंत

राजस्थान के किसान आंदोलनों में बिजोलिया के बाद बूंदी का आंदोलन परीक्षा की दृष्टि से अहम है। इस पोस्ट में कारण, नेता, पंचायतें, डाबी हत्याकांड और परिणाम क्रम से दिए गए हैं।

📍 बूंदी किसान आंदोलन: पृष्ठभूमि और स्थान

  • स्थान: बूंदी रियासत का बरड़ क्षेत्र, यानी बूंदी जिले के दक्षिण में बिजोलिया के पास का पथरीला भू-भाग।
  • शुरुआत: 1922 ई.
  • प्रमुख नेतृत्व: पंडित नयनू राम शर्मा; स्थानीय नेतृत्व स्वामी नित्यानंद ने किया।
  • स्वरूप: आंदोलन जागीरदारों/सामंतों के विरुद्ध नहीं, राज्य प्रशासन के विरुद्ध था।
  • किसान: गुर्जर जाति के किसान अधिक संख्या में थे।
  • बूंदी जिले की भौगोलिक जानकारी के लिए बूंदी जिला मैप देखें।

😠 आंदोलन के कारण

क्र.कारण
1लगभग 25 प्रकार के कर/लागबाग
2अधिक भू-राजस्व
3बेगार (बिना मज़दूरी का श्रम)
4युद्ध कर
5भ्रष्टाचार; अंग्रेज़ अधिकारियों की गलत रिपोर्टिंग

🗓️ घटनाक्रम (कालक्रम)

1920
साधु सीताराम दास ने डाबी किसान पंचायत का गठन किया; अध्यक्ष हरलाल भड़क थे।
1922
बरड़ क्षेत्र में पंडित नयनू राम शर्मा के नेतृत्व में किसान आंदोलन की शुरुआत।
2 अप्रैल 1923
डाबी में किसान पंचायत की सभा पर पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन ने गोलियाँ चलवाईं। नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर झंडा गीत गाते हुए शहीद हुए।
1923
राज्य ने जाँच आयोग बैठाया, पर किसानों ने उसका बहिष्कार किया। 19 मई 1923 को नयनू राम शर्मा को जेल में डाल दिया गया।
1927
नेतृत्व कमज़ोर पड़ने से आंदोलन धीमा होकर समाप्त हो गया।

🔥 डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923)

  • स्थान: डाबी (बूंदी)। किसान पंचायत की सभा चल रही थी।
  • आदेश: पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन ने गोली चलवाई।
  • शहीद: नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर।
  • स्मृति: माणिक्यलाल वर्मा ने नानक भील की याद में “अर्जी” गीत गाया। भँवरलाल स्वर्णकार “प्रज्ञाचक्षु” ने भी “अर्जी” नाम से लोकगीत रचा।
  • इसकी तुलना बिजोलिया किसान आंदोलन से करके पढ़ें; दोनों में लागबाग मुख्य कारण थे।

👥 प्रमुख नेता और पंचायतें

वर्गनाम
प्रमुख नेतापंडित नयनू राम शर्मा, नारायण सिंह, रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर
सहयोगीअंजना देवी चौधरी (किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर योगदान)
स्थानीय नेतृत्वस्वामी नित्यानंद
प्रमुख पंचायतेंडाबी, बरुंधन, निमाणा, गरदड़ा और बरड़
प्रचाररामनारायण चौधरी ने “बूंदी राज्य में स्त्रियों पर अत्याचार” नामक पर्चा प्रकाशित किया
🧠 याद रखें: बिजोलिया = जागीरदार के विरुद्ध; बूंदी = राज्य प्रशासन के विरुद्ध। बूंदी में गोलीकांड = डाबी।

वीडियो से समझना चाहें तो यह आंदोलन यहाँ देखें: बूंदी किसान आंदोलन (YouTube)

📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

प्रश्न 1. बूंदी किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(1) विजय सिंह पथिक
(2) नयनू राम शर्मा
(3) मोतीलाल तेजावत
(4) सीताराम दास
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) नयनू राम शर्मा
बरड़ क्षेत्र का आंदोलन पंडित नयनू राम शर्मा के नेतृत्व में 1922 में शुरू हुआ।
प्रश्न 2. डाबी हत्याकांड कब हुआ?
(1) 2 अप्रैल 1923
(2) 13 अप्रैल 1919
(3) 17 नवंबर 1913
(4) 19 मई 1923
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) 2 अप्रैल 1923
इस दिन डाबी में किसान पंचायत की सभा पर गोलियाँ चलाई गईं।
प्रश्न 3. बूंदी किसान आंदोलन के बारे में कथन:
(A) यह जागीरदारों के विरुद्ध था।
(B) यह बरड़ क्षेत्र में शुरू हुआ।
(C) नानक भील डाबी में शहीद हुए।
(D) इसमें गुर्जर किसान अधिक थे।
(1) केवल A और B
(2) केवल B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (3) केवल B, C और D
A गलत है; यह आंदोलन जागीरदारों के नहीं, राज्य प्रशासन के विरुद्ध था।
प्रश्न 4. कथन I: बूंदी का किसान आंदोलन राज्य प्रशासन के विरुद्ध था।
कथन II: इसके प्रमुख कारणों में लागबाग, बेगार और ऊँचा भू-राजस्व शामिल थे।
(1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
करों और बेगार की माँगें राज्य के प्रशासन की ओर से थीं, इसलिए आंदोलन उसी के विरुद्ध था।
प्रश्न 5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:

सूची Iसूची II
(A) नयनू राम शर्मा(I) डाबी किसान पंचायत का अध्यक्ष
(B) हरलाल भड़क(II) आंदोलन के मुख्य नेता
(C) माणिक्यलाल वर्मा(III) “अर्जी” गीत गाया
(D) इकराम हुसैन(IV) पुलिस अधीक्षक
(1) A-II, B-I, C-III, D-IV
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-II, B-I, C-III, D-IV
नयनू राम मुख्य नेता, हरलाल भड़क पंचायत के अध्यक्ष, माणिक्यलाल वर्मा ने “अर्जी” गाया, इकराम हुसैन पुलिस अधीक्षक थे।
प्रश्न 6. घटनाओं को कालक्रम में लगाइए:
(A) डाबी हत्याकांड
(B) आंदोलन की शुरुआत
(C) नयनू राम शर्मा की गिरफ़्तारी
(D) आंदोलन का अंत
(1) B, A, C, D
(2) A, B, C, D
(3) B, C, A, D
(4) C, B, A, D
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) B, A, C, D
1922 शुरुआत → 2 अप्रैल 1923 डाबी हत्याकांड → 19 मई 1923 गिरफ़्तारी → 1927 अंत।

❓ बूंदी किसान आंदोलन: सवाल-जवाब (FAQ)

1. बूंदी किसान आंदोलन कब शुरू हुआ?
बूंदी किसान आंदोलन 1922 ई. में बरड़ क्षेत्र में शुरू हुआ।
2. बूंदी किसान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
पंडित नयनू राम शर्मा ने इसका नेतृत्व किया। स्थानीय नेतृत्व स्वामी नित्यानंद ने किया।
3. डाबी हत्याकांड क्या था?
2 अप्रैल 1923 को डाबी में किसान पंचायत की सभा पर पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन के आदेश से गोलियाँ चलीं, जिसमें नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर शहीद हुए।
4. बूंदी आंदोलन किसके विरुद्ध था?
यह जागीरदारों के नहीं, बल्कि बूंदी राज्य के प्रशासन के विरुद्ध था।
5. आंदोलन कब समाप्त हुआ?
नेतृत्व की गिरफ़्तारी के बाद आंदोलन धीमा पड़ा और 1927 में समाप्त हो गया।

केवल कृष्ण घोड़ेला

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।

लेखक: केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड., नेट (हिंदी) | कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | संस्थापक, GK Hub

इस लेख की जानकारी पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर लिखी गई है। कोई त्रुटि मिले तो हमें बताएँ | संपादकीय नीति | About Us

Leave a Comment