पवनों के प्रकार Type of wind in hindi

पवनों के प्रकार(Types of winds)

दोस्तो आज की पोस्ट में हम पवने  क्या है और पवनों के प्रकार के बारे मे जानेंगे

पवनें – पवनों को उनके प्रभाव व क्षेत्र व अवधि के आधार पर तीन वर्गों में रखा जाता है –

 

स्थाई/सनातनी पवनें                                            

 मौसमी/सामयिक पवनें      स्थानीय पवनें
  1. व्यापारिक पवनें     1. मानसूनी पवनें     1.गर्म ठण्डी
   2. पछुआ पवनें      2. जल समीर
   3. ध्रुवीय पवनें      3. स्थल समीर
    4. घाटी समीर
    5. पर्वत समीर

 

1. स्थाई पवनें –
।. व्यापारिक पवनें – 5० -30०  उत्तरी दक्षिणी गोलार्द्ध में  व्यापारिक हवाएँ
।।. पछुआ पवनें – 35० -से 60०  उत्तरी दक्षिणी गोलार्द्ध

40०  – गरजता चालीसा

50० – भयंकर पचासा केवल दक्षिणी गोलार्द्ध में चलती है।

60० – चीखता साठा

⇒ गरजता चालीसा, भयंकर पचासा, चीखता  साठा पवनें केवल दक्षिणी गोलार्द्ध में चलती है।

।।।. ध्रुवीय पवनें – 65० -80०  के बीच ध्रुवीय पवनें (शीतल शुष्क)

2. सामयिक पवनें –
।. मानसूनी पवनें
।।. जलसमीर – दिन में चलती है।
।।।. स्थल समीर – रात्रि में चलती है।
।अ. पर्वतसमीर – रात्रि में चलती है।
अ. घाटी समीर – दिन में चलती है।

3. स्थानीय पवनें –

गर्म पवनें ठण्डी पवनें
1. चिनूक, (सं. राज्य अमेरिका) फोहन (यूरोप) 1. बोरा – एड्रियाटिक सागर से इटली

2. खमसिन, (मिश्र मंे) 2. मिस्ट्रल – आल्पस पर्वत से भूमध्य सागर की ओर स्पेन फ्रांस

3. सिमूम (सहारा रेगिस्तान) 3. बिल्जार्ड – उ. द. ध्रुवीय क्षेत्र, साइबेरिया कनाडा संयुक्त

राज्य अमेरिका

4. सिराको (इटली) 4. पम्पैरो – दक्षिणी अमेरिका के अर्जेन्टीना व ऊरुग्वे के
पम्पास घास प्रदेश में चलने वाली ठण्डी पवनें।

5. जापान (यामो)

6. हरमटन (डाक्टर पवनें) – अफ्रीका गिनी तट

7. ब्रिक फील्डर – ऑस्ट्रेलिया

8. सान्ता आना – दक्षिणी कैलीफोर्निया (अमेरिका)

9. नार्वेस्टर (काल बैसाखी) – न्यूजीलैण्ड

10. लू – भारत, पाकिस्तान

⇒ 0०  से 5  -उत्तरी दक्षिणी गोलार्द्ध में शान्त हवाओं की पेटी पाई जाती है जिसे डोलड्रम कहते है।

⇒ 30 से 35० उत्तरी दक्षिणी गोलार्द्ध में उच्च वायुदाब की पेटी पाई जाती है। जिसे अश्व अक्षांश (होर्स लेट्टियूड) कहते हैं।

हवाओं का वर्गीकरण

⇒ जिस दिशा में हवायें प्रायः वर्ष भर चला करती हैं उन्हें ’प्रचलित पवन’ या ’स्थायी पवन’ या ग्रहीय पवन कहते हैं।

⇒ पवनों को दो भागों  में विभाजित किया जाता है –

1. सनातनी या स्थायी या ग्रहीय पवनें
⇒ ये पवने सदैव एक ही क्रम में वर्ष भर एक निश्चित दिशा की ओर चलती रहती है। यद्यपि उनके क्षेत्रों में मौसमी स्थानान्तरण होता रहता है। इस कारण इनको स्थायी या सनातनी हवायें कहते हैं।

व्यापारिक पवनें(Trading wind)

⇒ यह उपोष्ण उच्च दाब की पेटी (अश्व अक्षांश) से विषुवत रेखीय निम्न दाब की पेटी (डोलड्रम) की ओर चलने वाली हवाएं है।
⇒ फेरल के नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्द्ध में  इनकी दिशा उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम होती है।
⇒ प्राचीन समय में यह पालयुक्त नौकाओं के चलने में सहयोगी होती थी इसलिए इसे ’व्यापारिक पवन’ कहते है।
⇒ व्यापारिक पवनों को अश्व अक्षांश के नाम से भी जाना जाता है।

पछुआ पवनें(Pachua Pawanen)

उपोष्ण उच्च वायुदाब (30० -35० ) से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब (60० -65० ) के बीच दोनों गोलाद्र्धो में चलने वाली स्थाई पवन को ’पछुआ पवन’ कहते हैं।

⇒ पछुवा पवनों की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में  उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर होती है।

⇒ पछुवा पवनें बहुत तेज चलती हैं जिनके कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में इन्हें 40० -50० अक्षांशों में गरजती चालीसा, 50०  दक्षिणी अक्षांश के पास भयंकर पचासा तथा 60०  के पास ’चीखती साठा’ आदि उपनामों से पुकारा जाता है।

ध्रुवीय पवनें(Polar wind)

यह ध्रुवीय उच्च वायुदाब केन्द्रों से ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती है।
⇒ दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण पूर्व और उत्तरी गोलार्द्ध में इनका दिशा उत्तर पूर्व होती है।
⇒ धु्रवीय पवनें शीतल शुष्क होती है।
⇒ ध्रुवों पर अत्यधिक शीत के कारण उच्च वायुदाब साल भर बना रहता है।
⇒ ये प्रचण्ड और तीव्र होती हैं इन्हें ’नार्वेस्टर’ के उपनाम से भी जाना जाता है।

2. सामयिक पवनें

1. मानसूनी पवनें – ये पवनें मौसम के अनुसार अपने चलने की दिशा वर्ष में दो बार बदल लेती हैं। मानसूनी पवनों का सर्वप्रथम प्रयोग अरब सागर पर बहने वाली पवनों के लिए किया गया था जिसकी दिशा छः माह उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम और शेष छः माह दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व रहती है।

मानसूनी पवने दो प्रकार की होती हैं:-
1. शीतकालीन मानसून – ये स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं तथा शुष्क और ठण्डी होती हैं।
2. ग्रीष्मकालीन मानसून – ये समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं। ये वाष्पयुक्त होती हैं और भारत को वर्षा प्रदान
करती हैं।
2. स्थल समीर – स्थल से जल की ओर चलने वाली पवनें स्थल समीर कहलाती है तथा ये रात्री के समय चलती है।
3. जल समीर – जल से स्थल की ओर चलने वाली पवनें जल समीर कहलाती है। तथा जल समीर दिन में चलती है।
4. पर्वत समीर – पर्वत से घाटी की ओर चलने वाली पवनें पर्वत समीर कहलाती है। और ये रात्री में चलती है।
5. घाटी समीर – घाटी से पर्वत की ओर चलने वाली पवनें घाटी समीर कहलाती है। और ये दिन में चलती है।
6. स्थानीय पवनें – धरातल पर कुछ ऐसी पवनें चलती हैं जो सदैव एक ही दिशा में नहीं चलती वरन समय और ऋतु के अनुसार इनकी दिशा बदलती रहती है इन्हें सामयिक या स्थानीय पवनें कहते हैं। स्थानीय पवनें गर्म व ठंडी दो प्रकार की होती है।

गर्म पवनें(Hot wind)

1. चिनूक – उत्तरी अमेरिका के राॅकी पर्वतीय प्रदेश में जब कोई आर्द्र वायु या चक्रवात प्रवेश करता है तो वह उस प्रदेश की शुष्क हवा को अपनी ओर आकर्षित कर वर्षा करता है। इसी गर्म एवं शुष्क हवा को संयुक्त राज्य अमेरिका में ’चिनूक’ कहा जाता है।

2. फाॅन – चिनूक हवाओं के समान ही आल्प्स पर्वत की दक्षिणी ढाल के ऊपर चलने वाली हवा उत्तरी ढाल के सहारे नीचे उतरती है, फलस्वरूप यह गर्म एवं शुष्क हो जाती है। यूरोप में इसे ’फाॅन’ कहते हैं। इसका सर्वाधिक प्रभाव स्वीट्जरलैण्ड में होता है।

3. सिमून – ये गरम, शुष्क तथा धूलयुक्त हवाएं सहारा मरूस्थल में बहती है।

4. लू – उत्तरी भारत में ग्रीष्म ऋतु में उत्तर पश्चिम एवं पश्चिम से पूर्व दिशा में चलने वाली प्रचंड उष्ण एवं शुष्क हवाओं को लू कहते हैं।

5. विलि-विलि – आस्टेªलिया के उत्तर-पश्चिमी तट के समीप उत्पन्न होने वाली उष्णकटिबंधीय तीव्र हवाओं को विलि विलि कहते हैं।

6. खमसिन – यह एक अत्यन्त गर्म तथा शुष्क पवन है, जो मिस्र में उत्तर की ओर चला करती है। चूंकि ये हवाएं सहारा मरूस्थल में उत्पन्न होती हैं, अतः इनमें रेत कणों की अधिकता होती है।

7. सिराॅको – सहारा मरूस्थल से उत्तरी अफ्रीका, सिसली, इटली, फ्रांस, स्पैन से गुजरने वाली अत्यधिक आर्द्र या शुष्क एवं उष्ण दक्षिणी या दक्षिणी पूर्वी हवा को सिराॅको कहते हैं।

8. सांता आना – दक्षिणी कैलिफोर्निया में  सांता आना कैनियन से होकर तटवर्ती मैदानों की ओर चलने वाली धूलभरी आंधी को सांता आना कहते हैं। ये पवन पूर्व अथवा उत्तर पूर्व की ओर चलती हैं। इन पवनों में गति एवं शुष्कता की मात्रा अत्यधिक होती है।

9. हरमट्टन – सहारा मरूस्थल में  गर्म, अति शुष्क एवं धूलकणों से युक्त प्रबल वेग से चलने वाली उत्तर पूर्वी हवाओं को हरमट्टन कहते हैं। ये हवाएं कभी-कभी इतनी गर्म एवं शुष्क होती है कि वृक्षों के तनों में दरार पैदा कर देती हैं। गिनी तट पर इनका प्रभाव स्वास्थ्यकारी हो जाता है, अतः इसे यहां डाॅक्टर की संज्ञा प्रदान की जाती है।

10. ब्रिक फील्डर्स – दक्षिण पूर्वी आस्ट्रेलिया के आंतरिक भाग में  ग्रीष्म ऋतु में  चलने वाली ये उष्ण एवं शुष्क उत्तरी पवन है।

11. नाॅर्वेस्टर – ये न्यूजीलैंड के दक्षिणी द्वीप में पर्वतों से चलने वाली शुष्क एवं गर्म फाॅन सदृश्य पवन हैं। भारत के उत्तरी मैदानी भागों में ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून तक चलने वाले पवन जो कभी कभी तीव्र तङित झंझा के रूप में भारी वर्षा करती हैं, काल बैशाखी कहलाती है।

12. सिराको – सिराको हवा के अफ्रीका महा़द्वीप में  कई नाम हैं – इसे मिश्र में ’खमसिन’ लीबिया में ’गिबली’ तथा टयूनिशिया में ’चिली’ के नाम से जाना जाता है।

13. यामो – यह जापान में चलने वाली एक गर्म एवं शुष्क पवन है।

ठण्डी पवनें(Cold wind)

1. ब्लिजार्ड – ब्लिजार्ड का प्रवाह क्षेत्र उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र साईबेरिया, कनाडा, तथा संयुक्त राज्य अमेरिका है। संयुक्त राज्य अमेरिका में इन्हें नाॅदर्न तथा साइबेरिया में बुरान कहते हैं।

2. मिस्ट्रल – ये हवाएं तीव्र ठंडी एवं शुष्क होती हैं, जो स्पेन और फ्रांस में प्रवाहित होती है।

3. बोरा – बोरा भी मिस्ट्रल की भांति ठंडी एवं शुष्क हवाएं हैं। ये आर्द्र पवन एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारे से होते हुए उत्तर पश्चिम में इटली के पूर्वी तथा उत्तरी क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।

4. पापागयो – मैक्सिको के तट पर प्रवाहित होने वाली तीव्र शुष्क एवं शीत पवनों को पापागयो कहते हैं।

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