अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026
⚡ संक्षिप्त उत्तर
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की पहली नगरीय सभ्यता थी और मिस्र व मेसोपोटामिया की सभ्यताओं की समकालीन। इसकी खोज 1921 में हड़प्पा (दयाराम साहनी) और 1922 में मोहनजोदड़ो (राखालदास बनर्जी) से हुई। पाठ्यपुस्तकों में रेडियोकार्बन-आधारित तिथि 2350–1750 ई.पू. दी जाती है, जबकि आधुनिक शोध परिपक्व चरण को लगभग 2600–1900 ई.पू. मानता है। मुख्य विशेषताएँ: ग्रिड-योजना के नगर, पक्की ईंटें, जल-निकासी, मुहरें और अपठित लिपि।
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की पहली नगरीय सभ्यता थी और मिस्र व मेसोपोटामिया की सभ्यताओं की समकालीन। इसकी खोज 1921 में हड़प्पा (दयाराम साहनी) और 1922 में मोहनजोदड़ो (राखालदास बनर्जी) से हुई। पाठ्यपुस्तकों में रेडियोकार्बन-आधारित तिथि 2350–1750 ई.पू. दी जाती है, जबकि आधुनिक शोध परिपक्व चरण को लगभग 2600–1900 ई.पू. मानता है। मुख्य विशेषताएँ: ग्रिड-योजना के नगर, पक्की ईंटें, जल-निकासी, मुहरें और अपठित लिपि।
📅
1921
हड़प्पा की खोज
🏙️
ग्रिड नगर
योजनाबद्ध शहर
🛁
वृहत् स्नानागार
मोहनजोदड़ो
🔤
लिपि
अब तक अपठित
सिंधु सभ्यता का प्रश्न हर प्रतियोगी परीक्षा में आता है: खोजकर्ता, स्थल, नदी, विशेषताएँ और पतन के कारण। नीचे सारी जानकारी विषय के अनुसार रखी है, ताकि दोहराने में आसानी रहे।

📌 सिंधु सभ्यता एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| अन्य नाम | हड़प्पा सभ्यता, सैंधव सभ्यता |
| प्रकार | कांस्य युगीन नगरीय सभ्यता |
| समय | परिपक्व चरण लगभग 2600–1900 ई.पू. (पाठ्यपुस्तकों में 2350–1750 ई.पू.) |
| पहला स्थल | हड़प्पा (1921, दयाराम साहनी) |
| दूसरा बड़ा स्थल | मोहनजोदड़ो (1922, राखालदास बनर्जी) |
| पुरातत्व सर्वेक्षण प्रमुख | जॉन मार्शल (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक); उन्होंने 1924 में इस सभ्यता की घोषणा की |
| लिपि | चित्राक्षर, अब तक नहीं पढ़ी जा सकी |
| पशु | कूबड़ वाला साँड़ विशेष पूजनीय; मुहरों पर सबसे अधिक एक-सींग वाला पशु |
🧭 विस्तार: चारों दिशाओं के स्थल
- पश्चिम: सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)
- पूर्व: आलमगीरपुर (मेरठ, उत्तर प्रदेश)
- उत्तर: मांडा (अखनूर, जम्मू-कश्मीर)
- दक्षिण: दाइमाबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र)
- परिपक्व अवस्था के बड़े नगर माने जाने वाले छह स्थल: मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, गणवेरीवाला, धौलावीरा, राखीगढ़ी और कालीबंगा।
- स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक हड़प्पा-स्थल गुजरात में खोजे गए। भारत में सबसे बड़ा स्थल राखीगढ़ी (हरियाणा) है।
🏗️ नगर-योजना और वास्तुकला
- नगर और घर ग्रिड पद्धति पर बने थे। सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
- घरों के दरवाज़े प्रायः मुख्य सड़क की बजाय गलियों की ओर खुलते थे। लोथल इसका अपवाद है।
- पक्की ईंटों और ढकी हुई नालियों की व्यवस्था थी।
- वृहत् स्नानागार (मोहनजोदड़ो): स्नानकुंड लगभग 11.88 मीटर लंबा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है।
- मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में अन्न-भंडार (धान्यागार) के अवशेष मिले।
- कालीबंगा में जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले और वहाँ का निचला नगर भी किले से घिरा था। लोथल और कालीबंगा से अग्निकुंड मिले।
- धौलावीरा तकनीकी रूप से सबसे विकसित स्थल माना जाता है। इसे यूनेस्को ने 2021 में विश्व धरोहर घोषित किया।
- लोथल से गोदीवाड़ा (बंदरगाह) के अवशेष मिले।

🌾 अर्थव्यवस्था: कृषि और व्यापार
- मुख्य फसलें गेहूँ और जौ थीं। रंगपुर और लोथल से चावल के साक्ष्य मिले हैं; चावल का सबसे पहला प्रमाण लोथल से माना जाता है।
- वे सूती और ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे। शहद का उपयोग मिठास के लिए होता था।
- मनके बनाने के कारखाने लोथल और चन्हूदड़ो में मिले हैं।
- तौल की इकाइयाँ संभवतः 16 के अनुपात पर आधारित थीं।
- आवागमन के लिए बैलगाड़ी या भैंसागाड़ी का उपयोग होता था।
- मेसोपोटामिया के लेखों में आने वाला शब्द “मेलुहा” सिंधु क्षेत्र के लिए माना जाता है।
| आयातित वस्तु | प्रदेश |
|---|---|
| ताँबा | खेतड़ी (राजस्थान), बलूचिस्तान, ओमान |
| चाँदी | अफ़गानिस्तान, ईरान |
| सोना | कर्नाटक, अफ़गानिस्तान, ईरान |
| टिन | अफ़गानिस्तान, ईरान |
| गोमेद (कार्नेलियन) | सौराष्ट्र |
| लाजवर्द | बदख्शाँ (अफ़गानिस्तान) |
| सीसा | ईरान |
🙏 धर्म, समाज और कला
- मातृदेवी की उपासना सबसे प्रचलित थी। स्त्री मृण्मूर्तियाँ बहुत मिलती हैं, इसलिए कुछ विद्वान समाज को मातृसत्तात्मक होने का अनुमान लगाते हैं। यह अनुमान ही है, पक्का प्रमाण नहीं।
- मोहनजोदड़ो की एक मुहर पर तीन मुख वाले देवता की आकृति मिली है, जिसे पशुपति (आद्य-शिव) कहा गया। उसके चारों ओर हाथी, गैंडा, बाघ और भैंसा हैं।
- वृक्ष-पूजा के संकेत भी मिलते हैं। स्वस्तिक चिह्न संभवतः इसी सभ्यता की देन माना जाता है। नगरों में किसी मंदिर के स्पष्ट अवशेष नहीं मिले।
- मोहनजोदड़ो से कांस्य की नर्तकी की मूर्ति मिली है।
- काले रंग से डिज़ाइन किए लाल बर्तन बनाए जाते थे। मनोरंजन में शिकार, मछली पकड़ना, चौपड़ और पासा शामिल थे।
- सिंधु सभ्यता के लोग तलवार से परिचित नहीं थे।

🔤 लिपि
सिंधु लिपि भावचित्रात्मक है और अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है। इसे प्रायः दाईं से बाईं ओर लिखा गया माना जाता है। जब लेख एक से अधिक पंक्तियों में होता, तो पहली पंक्ति दाईं से बाईं और दूसरी बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी (बूस्ट्रोफेडन)।
🗺️ प्रमुख स्थल, नदी और उत्खननकर्ता
| स्थल | नदी | उत्खननकर्ता (वर्ष) | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा | रावी | दयाराम साहनी (1921), माधोस्वरूप वत्स | पाकिस्तान (पंजाब) |
| मोहनजोदड़ो | सिंधु | राखालदास बनर्जी (1922) | पाकिस्तान (सिंध, लरकाना) |
| चन्हूदड़ो | सिंधु | एन. जी. मजूमदार (1931) | पाकिस्तान (सिंध) |
| कालीबंगा | घग्घर | बी. बी. लाल, बी. के. थापर (1953) | राजस्थान (हनुमानगढ़) |
| कोटदीजी | सिंधु | फज़ल अहमद (1953) | पाकिस्तान (सिंध) |
| रंगपुर | मादर | रंगनाथ राव (1953-54) | गुजरात (काठियावाड़) |
| रोपड़ | सतलज | यज्ञदत्त शर्मा (1953-56) | पंजाब (भारत) |
| लोथल | भोगवा | रंगनाथ राव (1955-62) | गुजरात |
| आलमगीरपुर | हिंडन | यज्ञदत्त शर्मा (1958) | उत्तर प्रदेश (मेरठ) |
| सुत्कागेंडोर | दाश्क | ऑरेल स्टाइन (1927), जॉर्ज डेल्स (1962) | पाकिस्तान (मकरान तट) |
| बनावली | रंगोई | रवीन्द्र सिंह बिष्ट (1974) | हरियाणा (फतेहाबाद) |
| धौलावीरा | — | रवीन्द्र सिंह बिष्ट (1990-91) | गुजरात (कच्छ) |
💡 याद रखने की ट्रिक
“हड़प्पा-रावी-दयाराम; मोहनजोदड़ो-सिंधु-राखाल” तीन-तीन शब्दों में स्थल, नदी और खोजकर्ता जुड़ जाते हैं। और लोथल = भोगवा = रंगनाथ राव।
“हड़प्पा-रावी-दयाराम; मोहनजोदड़ो-सिंधु-राखाल” तीन-तीन शब्दों में स्थल, नदी और खोजकर्ता जुड़ जाते हैं। और लोथल = भोगवा = रंगनाथ राव।
📉 पतन के संभावित कारण
- बाढ़: कुछ विद्वान मोहनजोदड़ो में बार-बार आई बाढ़ को बड़ा कारण मानते हैं। पुरानी पाठ्यपुस्तकों में बाढ़ को सबसे प्रभावी कारण बताया जाता है।
- जलवायु परिवर्तन और नदियों का सूखना: घग्घर-हाकरा क्षेत्र में पानी की कमी।
- व्यापार में गिरावट और नगरों का धीरे-धीरे छोड़ा जाना।
- आर्यों का आक्रमण: मॉर्टिमर व्हीलर का पुराना मत है, जिसे अब अधिकतर विद्वान नहीं मानते।

इतिहास के दूसरे विषय भी देखें: वैदिक संस्कृति, मौर्य वंश और जैन धर्म।
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📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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प्रश्न 1. हड़प्पा की खोज (1921) किसने की?
(1) राखालदास बनर्जी
(2) दयाराम साहनी
(3) जॉन मार्शल
(4) मॉर्टिमर व्हीलर
(2) दयाराम साहनी
(3) जॉन मार्शल
(4) मॉर्टिमर व्हीलर
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) दयाराम साहनी
1921 में हड़प्पा की खुदाई दयाराम साहनी ने कराई।
1921 में हड़प्पा की खुदाई दयाराम साहनी ने कराई।
प्रश्न 2. कथन:
(A) मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने की।
(B) लोथल से गोदीवाड़े के अवशेष मिले।
(C) कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले।
(D) धौलावीरा सिंधु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल है।
(A) मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने की।
(B) लोथल से गोदीवाड़े के अवशेष मिले।
(C) कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले।
(D) धौलावीरा सिंधु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल है।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) केवल A, B और C
D गलत है। सबसे पश्चिमी स्थल सुत्कागेंडोर है; धौलावीरा गुजरात के कच्छ में है।
D गलत है। सबसे पश्चिमी स्थल सुत्कागेंडोर है; धौलावीरा गुजरात के कच्छ में है।
प्रश्न 3. सूची I (स्थल) को सूची II (नदी) से सुमेलित कीजिए:
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) हड़प्पा | (I) रावी |
| (B) कालीबंगा | (II) घग्घर |
| (C) लोथल | (III) भोगवा |
| (D) रोपड़ | (IV) सतलज |
(1) A-II, B-I, C-III, D-IV
(2) A-I, B-II, C-IV, D-III
(3) A-I, B-II, C-III, D-IV
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
(2) A-I, B-II, C-IV, D-III
(3) A-I, B-II, C-III, D-IV
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (3) A-I, B-II, C-III, D-IV
हड़प्पा: रावी; कालीबंगा: घग्घर; लोथल: भोगवा; रोपड़: सतलज।
हड़प्पा: रावी; कालीबंगा: घग्घर; लोथल: भोगवा; रोपड़: सतलज।
प्रश्न 4. अभिकथन (A): लोथल को सिंधु सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह माना जाता है।
कारण (R): वहाँ से गोदीवाड़े के अवशेष मिले हैं।
कारण (R): वहाँ से गोदीवाड़े के अवशेष मिले हैं।
(1) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
(2) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही है, R गलत है
(4) A गलत है, R सही है
(2) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही है, R गलत है
(4) A गलत है, R सही है
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
गोदीवाड़े के प्रमाण के कारण ही लोथल को बंदरगाह-नगर माना जाता है।
गोदीवाड़े के प्रमाण के कारण ही लोथल को बंदरगाह-नगर माना जाता है।
प्रश्न 5. खुदाई के कालक्रम के अनुसार सही क्रम चुनिए:
(A) हड़प्पा (B) मोहनजोदड़ो (C) चन्हूदड़ो (D) कालीबंगा
(A) हड़प्पा (B) मोहनजोदड़ो (C) चन्हूदड़ो (D) कालीबंगा
(1) B, A, C, D
(2) A, B, D, C
(3) A, C, B, D
(4) A, B, C, D
(2) A, B, D, C
(3) A, C, B, D
(4) A, B, C, D
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (4) A, B, C, D
हड़प्पा 1921, मोहनजोदड़ो 1922, चन्हूदड़ो 1931 और कालीबंगा 1953।
हड़प्पा 1921, मोहनजोदड़ो 1922, चन्हूदड़ो 1931 और कालीबंगा 1953।
प्रश्न 6. कथन I: सिंधु सभ्यता की लिपि अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
कथन II: मेसोपोटामिया के लेखों में “मेलुहा” शब्द का संबंध सिंधु क्षेत्र से माना जाता है।
कथन II: मेसोपोटामिया के लेखों में “मेलुहा” शब्द का संबंध सिंधु क्षेत्र से माना जाता है।
(1) दोनों कथन सही हैं
(2) कथन I सही है, कथन II गलत है
(3) कथन I गलत है, कथन II सही है
(4) दोनों कथन गलत हैं
(2) कथन I सही है, कथन II गलत है
(3) कथन I गलत है, कथन II सही है
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) दोनों कथन सही हैं
दोनों कथन सही हैं।
दोनों कथन सही हैं।
❓ सिंधु घाटी सभ्यता पर सवाल-जवाब (FAQ)
1. सिंधु घाटी सभ्यता की खोज कब हुई?
1921 में हड़प्पा की खोज हुई (दयाराम साहनी) और 1922 में मोहनजोदड़ो की (राखालदास बनर्जी)।
2. सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल भारत में कौन-सा है?
राखीगढ़ी (हरियाणा)।
3. सिंधु सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह कौन-सा था?
लोथल (गुजरात)।
4. सिंधु सभ्यता की लिपि कैसी थी?
भावचित्रात्मक लिपि, जो अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
5. धौलावीरा क्यों प्रसिद्ध है?
यह गुजरात के कच्छ में है, तकनीकी रूप से सबसे विकसित स्थल माना जाता है और 2021 में यूनेस्को की विश्व धरोहर बना।

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
