44वाँ संविधान संशोधन 1978: प्रमुख प्रावधान, आपातकाल व संपत्ति का अधिकार | 44th Amendment in Hindi

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026

⚡ संक्षिप्त उत्तर
44वाँ संविधान संशोधन (1978) जनता पार्टी सरकार ने पारित किया। इसका उद्देश्य 42वें संशोधन (आपातकाल के दौर) के अनचाहे बदलावों को हटाना था। इसके द्वारा राष्ट्रीय आपात का आधार “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” किया गया, संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300क में कानूनी अधिकार बना, और लोकसभा व विधानसभाओं का कार्यकाल फिर 5 वर्ष हुआ।
📅
1978
संशोधन पारित (लोकसभा 23 अगस्त 1978)
✍️
30 अप्रैल 1979
राष्ट्रपति की स्वीकृति
🏛️
जनता पार्टी
सत्तारूढ़ सरकार
⚖️
अनुच्छेद 352
सशस्त्र विद्रोह

44वाँ संविधान संशोधन (44th Amendment) हर परीक्षा में आने वाला टॉपिक है। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने वादा किया था कि संविधान को आपातकाल से पहले की स्थिति में लौटाया जाएगा। उसी वादे को पूरा करने के लिए यह संशोधन लाया गया। तत्कालीन कानून मंत्री शांति भूषण और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे।

44th amendment

🕰️ पृष्ठभूमि: 42वें संशोधन से 44वें संशोधन तक

1976 में आपातकाल के दौरान 42वाँ संशोधन हुआ, जिसे “लघु संविधान” भी कहा जाता है। इसमें संसद की शक्तियाँ बहुत बढ़ा दी गई थीं और न्यायपालिका की शक्तियाँ घटाई गई थीं। जनता सरकार ने इन्हीं परिवर्तनों में से कई को 44वें संशोधन से वापस लिया। 42वें संशोधन की विस्तृत जानकारी के लिए 42वाँ संविधान संशोधन पढ़ें।

📌 44वें संशोधन के प्रमुख प्रावधान

विषयसंशोधन के बाद की स्थिति
राष्ट्रीय आपात (अनु. 352)आधार “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह”
आपात की उद्घोषणाराष्ट्रपति तभी करेगा जब मंत्रिमंडल लिखित रूप से सलाह दे
संसद की मंजूरीउद्घोषणा का एक माह के भीतर संसद के विशेष बहुमत से अनुमोदन
आपात के दौरान अधिकारअनुच्छेद 20 और 21 के अधिकार आपातकाल में भी निलंबित नहीं किए जा सकते
संपत्ति का अधिकारअनुच्छेद 31 और 19(1)(च) निरस्त; अब अनुच्छेद 300क के तहत कानूनी अधिकार
लोकसभा/विधानसभा का कार्यकालफिर से 5 वर्ष (42वें संशोधन ने 6 वर्ष किया था)
अनुच्छेद 74राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है; पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह मानना बाध्यकारी
राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति चुनावविवाद निपटाने का अधिकार फिर सर्वोच्च न्यायालय को
अनुच्छेद 329कप्रधानमंत्री और अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी यह अनुच्छेद निरस्त
अनुच्छेद 361कसंसद और विधानमंडलों की कार्यवाही के सही प्रकाशन को संरक्षण
ध्यान दें: पुरानी पोस्ट में एक वाक्य गलत था। राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा अब “सशस्त्र विद्रोह” के आधार पर होती है, “आंतरिक अशांति” के आधार पर नहीं। परीक्षा में इसी बिंदु पर प्रश्न आते हैं।

44 Amendment

🔍 विस्तार से समझें

1. राष्ट्रीय आपात में सुधार

  • अनुच्छेद 352 में “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” रखा गया।
  • राष्ट्रपति आपात की घोषणा तभी करेगा जब उसे मंत्रिमंडल की लिखित सूचना मिले।
  • इससे आपातकाल के मनमाने प्रयोग पर रोक लगी।

2. संपत्ति का अधिकार

संपत्ति का मौलिक अधिकार समाप्त करके इसे अनुच्छेद 300क के अंतर्गत विविध (कानूनी) अधिकार का दर्जा दिया गया। इसके लिए अनुच्छेद 31 और अनुच्छेद 19 के संबंधित भाग निरस्त हुए। अब किसी को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

3. राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल

अनुच्छेद 74 में संशोधन कर राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किंतु दोबारा दी गई सलाह मानने के लिए वह बाध्य होगा।

4. कार्यकाल और चुनाव विवाद

  • लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई।
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद हल करने का अधिकार उच्चतम न्यायालय को पुनः प्रदान किया गया।

संविधान संशोधन की पूरी प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) और अन्य संशोधनों के लिए भारतीय संविधान के संशोधन पढ़ें।

📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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प्रश्न 1. 44वें संविधान संशोधन के द्वारा राष्ट्रीय आपात का आधार क्या किया गया?
(1) बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति
(2) सशस्त्र विद्रोह और बाह्य आक्रमण
(3) केवल युद्ध
(4) वित्तीय संकट
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उत्तर: (2) सशस्त्र विद्रोह और बाह्य आक्रमण
अनुच्छेद 352 में “आंतरिक अशांति” हटाकर “सशस्त्र विद्रोह” रखा गया। युद्ध और बाह्य आक्रमण पहले की तरह आधार रहे।
प्रश्न 2. 44वें संशोधन के बाद संपत्ति का अधिकार किस अनुच्छेद के अंतर्गत है?
(1) अनुच्छेद 19
(2) अनुच्छेद 31
(3) अनुच्छेद 300क
(4) अनुच्छेद 21
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (3) अनुच्छेद 300क
संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा, अब यह अनुच्छेद 300क के तहत कानूनी अधिकार है।
प्रश्न 3. 44वें संविधान संशोधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(A) यह जनता पार्टी सरकार के समय पारित हुआ।
(B) इससे लोकसभा का कार्यकाल पुनः 5 वर्ष हुआ।
(C) अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में निलंबित किए जा सकते हैं।
(D) राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और D
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
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उत्तर: (2) केवल A, B और D
अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में भी निलंबित नहीं किए जा सकते। इसलिए कथन C गलत है।
प्रश्न 4. कथन I: 44वें संशोधन से राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर ही आपात की उद्घोषणा करता है।
कथन II: इससे आपातकाल के मनमाने प्रयोग को रोकने का प्रयास किया गया।
(1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) दोनों गलत
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
मंत्रिमंडल की लिखित सलाह की शर्त 1975 जैसे आपातकाल की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जोड़ी गई।
प्रश्न 5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:

सूची Iसूची II
(A) अनुच्छेद 352(I) कानूनी अधिकार के रूप में संपत्ति
(B) अनुच्छेद 300क(II) राष्ट्रीय आपात
(C) अनुच्छेद 74(III) मंत्रिमंडल की सलाह पर पुनर्विचार
(D) अनुच्छेद 361क(IV) कार्यवाही के प्रकाशन का संरक्षण
(1) A-II, B-I, C-III, D-IV
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-I, D-II
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-II, B-I, C-III, D-IV
352 राष्ट्रीय आपात, 300क संपत्ति, 74 मंत्रिपरिषद की सलाह और 361क कार्यवाही के प्रकाशन से जुड़ा है।
प्रश्न 6. निम्नलिखित संशोधनों को कालक्रम में लगाइए:
(A) 44वाँ संशोधन
(B) 42वाँ संशोधन
(C) 52वाँ संशोधन
(D) 73वाँ संशोधन
(1) B, A, C, D
(2) A, B, C, D
(3) B, A, D, C
(4) B, C, A, D
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) B, A, C, D
42वाँ (1976) → 44वाँ (1978) → 52वाँ (1985, दल-बदल कानून) → 73वाँ (1992, पंचायती राज)।

❓ 44वें संविधान संशोधन से जुड़े सवाल (FAQ)

1. 44वाँ संविधान संशोधन कब पारित हुआ?
44वाँ संविधान संशोधन 1978 में पारित हुआ। राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी की स्वीकृति 30 अप्रैल 1979 को मिली।
2. 44वें संविधान संशोधन में क्या प्रावधान हैं?
इसके द्वारा राष्ट्रीय आपात का आधार “सशस्त्र विद्रोह” किया गया, संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 300क में गया, लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष हुआ और अनुच्छेद 20-21 आपातकाल में भी बने रहे।
3. 44वाँ संशोधन किस सरकार के समय हुआ?
यह जनता पार्टी की सरकार के समय हुआ।
4. संपत्ति का अधिकार कब मौलिक अधिकार नहीं रहा?
44वें संविधान संशोधन से संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा और अनुच्छेद 300क के तहत कानूनी अधिकार बना।
5. 44वें संशोधन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
42वें संशोधन द्वारा किए गए अवांछित परिवर्तनों को समाप्त कर संविधान को आपातकाल से पहले की स्थिति के करीब लाना।
6. आंतरिक अशांति की जगह क्या रखा गया?
अनुच्छेद 352 में आंतरिक अशांति की जगह “सशस्त्र विद्रोह” रखा गया।

केवल कृष्ण घोड़ेला

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।

लेखक: केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड., नेट (हिंदी) | कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | संस्थापक, GK Hub

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