अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
44वाँ संविधान संशोधन (1978) जनता पार्टी सरकार ने पारित किया। इसका उद्देश्य 42वें संशोधन (आपातकाल के दौर) के अनचाहे बदलावों को हटाना था। इसके द्वारा राष्ट्रीय आपात का आधार “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” किया गया, संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300क में कानूनी अधिकार बना, और लोकसभा व विधानसभाओं का कार्यकाल फिर 5 वर्ष हुआ।
44वाँ संविधान संशोधन (44th Amendment) हर परीक्षा में आने वाला टॉपिक है। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने वादा किया था कि संविधान को आपातकाल से पहले की स्थिति में लौटाया जाएगा। उसी वादे को पूरा करने के लिए यह संशोधन लाया गया। तत्कालीन कानून मंत्री शांति भूषण और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे।

🕰️ पृष्ठभूमि: 42वें संशोधन से 44वें संशोधन तक
1976 में आपातकाल के दौरान 42वाँ संशोधन हुआ, जिसे “लघु संविधान” भी कहा जाता है। इसमें संसद की शक्तियाँ बहुत बढ़ा दी गई थीं और न्यायपालिका की शक्तियाँ घटाई गई थीं। जनता सरकार ने इन्हीं परिवर्तनों में से कई को 44वें संशोधन से वापस लिया। 42वें संशोधन की विस्तृत जानकारी के लिए 42वाँ संविधान संशोधन पढ़ें।
📌 44वें संशोधन के प्रमुख प्रावधान
| विषय | संशोधन के बाद की स्थिति |
|---|---|
| राष्ट्रीय आपात (अनु. 352) | आधार “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” |
| आपात की उद्घोषणा | राष्ट्रपति तभी करेगा जब मंत्रिमंडल लिखित रूप से सलाह दे |
| संसद की मंजूरी | उद्घोषणा का एक माह के भीतर संसद के विशेष बहुमत से अनुमोदन |
| आपात के दौरान अधिकार | अनुच्छेद 20 और 21 के अधिकार आपातकाल में भी निलंबित नहीं किए जा सकते |
| संपत्ति का अधिकार | अनुच्छेद 31 और 19(1)(च) निरस्त; अब अनुच्छेद 300क के तहत कानूनी अधिकार |
| लोकसभा/विधानसभा का कार्यकाल | फिर से 5 वर्ष (42वें संशोधन ने 6 वर्ष किया था) |
| अनुच्छेद 74 | राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है; पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह मानना बाध्यकारी |
| राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति चुनाव | विवाद निपटाने का अधिकार फिर सर्वोच्च न्यायालय को |
| अनुच्छेद 329क | प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी यह अनुच्छेद निरस्त |
| अनुच्छेद 361क | संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही के सही प्रकाशन को संरक्षण |

🔍 विस्तार से समझें
1. राष्ट्रीय आपात में सुधार
- अनुच्छेद 352 में “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” रखा गया।
- राष्ट्रपति आपात की घोषणा तभी करेगा जब उसे मंत्रिमंडल की लिखित सूचना मिले।
- इससे आपातकाल के मनमाने प्रयोग पर रोक लगी।
2. संपत्ति का अधिकार
संपत्ति का मौलिक अधिकार समाप्त करके इसे अनुच्छेद 300क के अंतर्गत विविध (कानूनी) अधिकार का दर्जा दिया गया। इसके लिए अनुच्छेद 31 और अनुच्छेद 19 के संबंधित भाग निरस्त हुए। अब किसी को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
3. राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल
अनुच्छेद 74 में संशोधन कर राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किंतु दोबारा दी गई सलाह मानने के लिए वह बाध्य होगा।
4. कार्यकाल और चुनाव विवाद
- लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई।
- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद हल करने का अधिकार उच्चतम न्यायालय को पुनः प्रदान किया गया।
संविधान संशोधन की पूरी प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) और अन्य संशोधनों के लिए भारतीय संविधान के संशोधन पढ़ें।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) सशस्त्र विद्रोह और बाह्य आक्रमण
(3) केवल युद्ध
(4) वित्तीय संकट
👉 उत्तर देखें
अनुच्छेद 352 में “आंतरिक अशांति” हटाकर “सशस्त्र विद्रोह” रखा गया। युद्ध और बाह्य आक्रमण पहले की तरह आधार रहे।
(2) अनुच्छेद 31
(3) अनुच्छेद 300क
(4) अनुच्छेद 21
👉 उत्तर देखें
संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा, अब यह अनुच्छेद 300क के तहत कानूनी अधिकार है।
(A) यह जनता पार्टी सरकार के समय पारित हुआ।
(B) इससे लोकसभा का कार्यकाल पुनः 5 वर्ष हुआ।
(C) अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में निलंबित किए जा सकते हैं।
(D) राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।
(2) केवल A, B और D
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में भी निलंबित नहीं किए जा सकते। इसलिए कथन C गलत है।
कथन II: इससे आपातकाल के मनमाने प्रयोग को रोकने का प्रयास किया गया।
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) दोनों गलत
👉 उत्तर देखें
मंत्रिमंडल की लिखित सलाह की शर्त 1975 जैसे आपातकाल की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जोड़ी गई।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) अनुच्छेद 352 | (I) कानूनी अधिकार के रूप में संपत्ति |
| (B) अनुच्छेद 300क | (II) राष्ट्रीय आपात |
| (C) अनुच्छेद 74 | (III) मंत्रिमंडल की सलाह पर पुनर्विचार |
| (D) अनुच्छेद 361क | (IV) कार्यवाही के प्रकाशन का संरक्षण |
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-I, D-II
👉 उत्तर देखें
352 राष्ट्रीय आपात, 300क संपत्ति, 74 मंत्रिपरिषद की सलाह और 361क कार्यवाही के प्रकाशन से जुड़ा है।
(A) 44वाँ संशोधन
(B) 42वाँ संशोधन
(C) 52वाँ संशोधन
(D) 73वाँ संशोधन
(2) A, B, C, D
(3) B, A, D, C
(4) B, C, A, D
👉 उत्तर देखें
42वाँ (1976) → 44वाँ (1978) → 52वाँ (1985, दल-बदल कानून) → 73वाँ (1992, पंचायती राज)।
❓ 44वें संविधान संशोधन से जुड़े सवाल (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
