अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
गगनयान मिशन इसरो (ISRO) का भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसमें 3 अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी की निचली कक्षा में कुछ दिनों के लिए भेजकर सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य है। इसे दिसंबर 2018 में मंज़ूरी मिली थी। मानवरहित पहली उड़ान गगनयान-1 (G1) में रोबोट व्योममित्र जाएगा। (जानकारी अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार)
इस पोस्ट में गगनयान मिशन से जुड़ी हर परीक्षा-उपयोगी बात है: उद्देश्य, बनावट, अंतरिक्ष यात्री, अब तक हुए परीक्षण, ताज़ा स्थिति, MCQ और FAQ। पुराने अनुमानित वर्षों (2022-2023) की जगह अब वास्तविक घटनाएँ दी गई हैं।
🚀 गगनयान मिशन क्या है?

गगनयान भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Indian Human Spaceflight Programme) है। इसमें 3 सदस्यीय दल को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाकर सुरक्षित समुद्र में उतारने की क्षमता दिखाई जानी है। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र) से होगा। यान का नाम संस्कृत के “गगन” (आकाश) और “यान” (वाहन) से बना है।
🎯 गगनयान के उद्देश्य
- निचली कक्षा (LEO) में मानव उड़ान की स्वदेशी क्षमता प्रदर्शित करना।
- क्रू एस्केप सिस्टम, मानव-योग्य (human-rated) रॉकेट और जीवन-रक्षक प्रणाली जैसी नई तकनीकें विकसित करना।
- भविष्य के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों, जैसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की नींव रखना।
- देश में विज्ञान-प्रौद्योगिकी और उद्योग को बढ़ावा देना।
📋 गगनयान मिशन: एक नज़र में (तथ्य-तालिका)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संचालक | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) |
| मंज़ूरी | 28 दिसंबर 2018 (केंद्रीय मंत्रिमंडल); प्रारंभ में लगभग ₹10,000 करोड़ |
| कुल बजट | लगभग ₹20,193 करोड़ (सितंबर 2024 में अतिरिक्त राशि के बाद, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल सहित) |
| घोषणा | 15 अगस्त 2018, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (लाल किले से) |
| क्रू | 3 अंतरिक्ष यात्री |
| ऑर्बिट | लगभग 400 किमी (निचली पृथ्वी कक्षा) |
| अवधि | लगभग 3 से 7 दिन के मिशन की योजना (आरंभिक योजना में 7 दिन) |
| प्रक्षेपण यान | HLVM3 (LVM3 का मानव-योग्य संस्करण) |
| प्रक्षेपण स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| वापसी | पैराशूट की मदद से समुद्र में स्प्लैशडाउन (प्राथमिक क्षेत्र: अरब सागर) |
| मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र | HSFC, बेंगलुरु |
नोट: मिशन की अवधि और बजट के आँकड़े अलग-अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न मिलते हैं; परीक्षा में आरंभिक घोषणा के आँकड़े (7 दिन, ₹10,000 करोड़) भी पूछे जाते रहे हैं।
🛠️ गगनयान की बनावट (ऑर्बिटल मॉड्यूल)

| भाग | मुख्य बातें |
|---|---|
| क्रू मॉड्यूल (CM) | अंतरिक्ष यात्रियों के बैठने का दबावयुक्त कक्ष; भार लगभग 5.3 टन (भरे हुए); व्यास लगभग 3.5 मी. |
| सर्विस मॉड्यूल (SM) | ईंधन, प्रणोदन और ऊर्जा; भार लगभग 2.9 टन |
| ऑर्बिटल मॉड्यूल | CM + SM का संयोजन; कुल भार लगभग 8.2 टन |
| क्रू एस्केप सिस्टम (CES) | आपातकाल में क्रू मॉड्यूल को रॉकेट से दूर सुरक्षित खींच ले जाता है |
- उड़ान के अंत में सर्विस मॉड्यूल अलग हो जाता है और क्रू मॉड्यूल पैराशूट की सहायता से धीमा होकर बंगाल की खाड़ी/अरब सागर के निर्धारित क्षेत्र में उतरता है।
- मॉड्यूल में पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन-रक्षक प्रणाली (ECLSS) लगी है, जिसके कुछ घटक DRDO ने बनाए हैं; क्रू मॉड्यूल निर्माण में HAL की भूमिका है।
- रॉकेट के L110 चरण में विकास इंजन और S200 बूस्टर इस्तेमाल होते हैं।
👨🚀 गगनयान के अंतरिक्ष यात्री
27 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री ने तिरुवनंतपुरम (VSSC) में चार चयनित वायुसेना अधिकारियों (ग्रुप कैप्टन) का परिचय कराया:
| क्र. | अंतरिक्ष यात्री (ग्रुप कैप्टन) |
|---|---|
| 1 | प्रशांत बालाकृष्णन नायर |
| 2 | अजीत कृष्णन |
| 3 | अंगद प्रताप |
| 4 | शुभांशु शुक्ला |
- चारों का प्रारंभिक प्रशिक्षण रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में हुआ (समझौता जुलाई 2019 में), फिर बेंगलुरु में प्रशिक्षण जारी रहा।
- शुभांशु शुक्ला जून-जुलाई 2025 में Axiom-4 मिशन से अंतरिक्ष और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) गए। वे ISS जाने वाले पहले भारतीय बने।
- राकेश शर्मा 3 अप्रैल 1984 को सोवियत यान से अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय थे।
- कल्पना चावला (1997, 2003) और सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की हैं, पर वे नासा के मिशनों से गईं।
🤖 व्योममित्र क्या है?

व्योममित्र इसरो द्वारा बनाई गई महिला रूप की अर्ध-मानव (हाफ़-ह्यूमनॉइड) रोबोट है। इसे 22 जनवरी 2020 को बेंगलुरु में सम्मेलन में पेश किया गया था। इसके पैर नहीं हैं। यह क्रू मॉड्यूल के मापदंडों पर नज़र रख सकती है, चेतावनी दे सकती है, स्विच पैनल चला सकती है और हिंदी-अंग्रेज़ी में संवाद कर सकती है। मानव को भेजने से पहले उसकी जगह व्योममित्र को मानवरहित उड़ान में भेजा जाएगा।
🗓️ अब तक के प्रमुख परीक्षण और घटनाक्रम

📍 ताज़ा स्थिति (अक्टूबर 2026): गगनयान-1 कब?
- गगनयान-1 (G1) पहली मानवरहित कक्षीय उड़ान है, जिसमें व्योममित्र जाएगी। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने जून 2026 में इसे 2026 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में बताया था। अक्टूबर 2026 तक कोई सटीक तारीख घोषित नहीं हुई है।
- इससे पहले TV-D2 (एबॉर्ट मिशन) की भी योजना है।
- G2 और G3 (मानवरहित) तथा पहली मानव-युक्त उड़ान (H1) अभी आगे की योजना हैं; पहली मानव उड़ान के लिए 2027 को लक्ष्य के रूप में कहा जाता रहा है।
- प्रक्षेपण की समय-सीमाएँ पहले भी कई बार आगे खिसकी हैं (पहले 2020, फिर 2021-22, फिर 2024-25); इसलिए नई तारीख के लिए इसरो की घोषणा देखें।
इसरो के अन्य मिशनों के लिए चंद्रयान 3 और सौरमंडल को समझने के लिए सौरमंडल के 8 ग्रह पढ़ें।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) नरेंद्र मोदी, 15 अगस्त 2018
(3) एस. सोमनाथ, 2022
(4) वी. नारायणन, 2025
👉 उत्तर देखें
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में यह घोषणा की थी।
(2) GSLV Mk II
(3) HLVM3
(4) SSLV
👉 उत्तर देखें
HLVM3, LVM3 का मानव-योग्य संस्करण है।
(A) इसमें 3 अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना है।
(B) कक्षा लगभग 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा है।
(C) व्योममित्र एक अर्ध-मानव रोबोट है।
(D) प्रक्षेपण केरल के थुंबा से होगा।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है; प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र) से होगा।
कथन II: अब तक केवल रूस/सोवियत संघ, अमेरिका और चीन ने अपने बल पर मानव को अंतरिक्ष भेजा है।
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
👉 उत्तर देखें
चूँकि अब तक तीन ही देशों ने यह क्षमता दिखाई है, इसलिए भारत चौथा देश होगा।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) TV-D1 | (I) 21 अक्टूबर 2023 |
| (B) पैड एबॉर्ट टेस्ट | (II) 5 जुलाई 2018 |
| (C) व्योममित्र का परिचय | (III) 22 जनवरी 2020 |
| (D) अंतरिक्ष यात्रियों के नाम घोषित | (IV) 27 फरवरी 2024 |
(2) A-II, B-I, C-IV, D-III
(3) A-I, B-III, C-II, D-IV
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
TV-D1 अक्टूबर 2023, पैड एबॉर्ट जुलाई 2018, व्योममित्र जनवरी 2020 और चार अंतरिक्ष यात्रियों की घोषणा फरवरी 2024 में हुई।
(A) TV-D1 परीक्षण
(B) गगनयान की औपचारिक घोषणा
(C) शुभांशु शुक्ला की ISS यात्रा (Axiom-4)
(D) अंतरिक्ष यात्रियों के नाम की घोषणा
(2) B, D, A, C
(3) A, B, D, C
(4) B, A, C, D
👉 उत्तर देखें
घोषणा (2018) → TV-D1 (अक्टूबर 2023) → नाम घोषित (फरवरी 2024) → Axiom-4 (2025)।
❓ गगनयान मिशन: सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
