अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
⚡ संक्षिप्त उत्तर
सरकारिया आयोग का गठन केंद्र सरकार ने 9 जून 1983 को केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया था। इसके अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत सिंह सरकारिया थे और सदस्य बी. शिवरमन व एस. आर. सेन थे। आयोग ने लगभग 1,600 पृष्ठों की रिपोर्ट में 247 सिफारिशें कीं। इसी की एक सिफारिश पर 1990 में अंतर्राज्यीय परिषद (अनुच्छेद 263) का गठन हुआ।
सरकारिया आयोग का गठन केंद्र सरकार ने 9 जून 1983 को केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया था। इसके अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत सिंह सरकारिया थे और सदस्य बी. शिवरमन व एस. आर. सेन थे। आयोग ने लगभग 1,600 पृष्ठों की रिपोर्ट में 247 सिफारिशें कीं। इसी की एक सिफारिश पर 1990 में अंतर्राज्यीय परिषद (अनुच्छेद 263) का गठन हुआ।
📅
9 जून 1983
आयोग का गठन
⚖️
आर. एस. सरकारिया
अध्यक्ष
📘
1987-88
रिपोर्ट सौंपी/प्रकाशित
📝
247
कुल सिफारिशें
सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत का संविधान संघीय ढाँचे की बात करता है, पर शक्तियों का झुकाव केंद्र की ओर माना जाता है। इसी कारण राज्यपाल की नियुक्ति, अनुच्छेद 356 का प्रयोग और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध जैसे सवाल बार-बार उठते रहे। आयोग को इन सबकी जाँच कर संविधान के दायरे में सुझाव देने थे।
📌 सरकारिया आयोग की पूरी जानकारी
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| आयोग का नाम | सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) |
| गठन की तिथि | 9 जून 1983 |
| गठन किसने किया | केंद्र सरकार |
| अध्यक्ष | न्यायमूर्ति रंजीत सिंह सरकारिया (सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) |
| सदस्य | बी. शिवरमन, एस. आर. सेन |
| उद्देश्य | केंद्र-राज्य संबंधों और शक्ति-संतुलन की समीक्षा तथा संविधान के ढाँचे में सुधार सुझाना |
| रिपोर्ट | 1987 में सौंपी गई, जनवरी 1988 में प्रकाशित (लगभग 1,600 पृष्ठ) |
| सिफारिशें | कुल 247 |
| मुख्य निष्कर्ष | संविधान के संघीय ढाँचे में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं, पर कार्यप्रणाली में सुधार जरूरी |
| प्रमुख परिणाम | 1990 में अंतर्राज्यीय परिषद का गठन |
📝 सरकारिया आयोग की प्रमुख सिफारिशें
- अंतर्राज्यीय परिषद: एक स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद बनाई जाए। इसी सिफारिश पर 1990 में परिषद बनी। इसका उल्लेख अनुच्छेद 263 में है, गठन राष्ट्रपति करता है, अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं।
- राज्यपाल की नियुक्ति: नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श किया जाए।
- राज्यपाल की योग्यता: राज्यपाल उस राज्य से बाहर का व्यक्ति हो और राज्य की स्थानीय राजनीति से अलग रहने वाला हो।
- कार्यकाल की सुरक्षा: राज्यपाल को सामान्यतः 5 वर्ष से पहले राजनीतिक कारणों से न हटाया जाए।
- अनुच्छेद 356: राष्ट्रपति शासन का प्रयोग अंतिम उपाय के रूप में हो, जब अन्य सभी विकल्प विफल हो जाएँ।
- अखिल भारतीय सेवाएँ: इन्हें मजबूत किया जाए और जरूरत हो तो नई सेवाएँ बनाई जाएँ।
- समवर्ती सूची: समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने से पहले केंद्र राज्यों से परामर्श करे।
- अवशिष्ट शक्तियाँ: कराधान से जुड़ी अवशिष्ट शक्तियाँ संघ के पास रहें, अन्य विषयों पर विचार समवर्ती सूची में डालने की दिशा में हो।
सिफारिशों के उल्लंघन के उदाहरण
- 1981 में जगमोहन को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाते समय मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला से परामर्श नहीं किया गया।
- पंजाब के निवासी सरदार उज्ज्वल सिंह को पंजाब का राज्यपाल बनाया गया।
- एच. सी. मुखर्जी को पश्चिम बंगाल का और मैसूर महाराजा को मैसूर का राज्यपाल बनाया गया।
🧭 केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रमुख आयोग और समितियाँ
| वर्ष | आयोग / समिति | अध्यक्ष / टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1966-70 | प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) | केंद्र-राज्य संबंधों पर अध्ययन दल बनाया |
| 1969 | राजमन्नार समिति | तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित; राज्यों को अधिक स्वायत्तता का सुझाव |
| 1983 | सरकारिया आयोग | आर. एस. सरकारिया; 247 सिफारिशें |
| 2000 | संविधान समीक्षा आयोग (NCRWC) | एम. एन. वेंकटचलैया |
| 2007 | पुंछी आयोग | एम. एम. पुंछी; रिपोर्ट 2010 में |
⭐ महत्व और आलोचना
- आयोग ने माना कि भारत की संघीय व्यवस्था मूल रूप से ठीक है, इसलिए संविधान में बड़े संशोधन की सिफारिश नहीं की।
- अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा तय हुई। बाद में एस. आर. बोम्मई मामले (1994) में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसके प्रयोग पर कड़ी सीमाएँ तय कीं।
- आलोचना यह रही कि कई महत्वपूर्ण सिफारिशें लागू नहीं हुईं और राज्यों को अधिक वित्तीय शक्तियाँ नहीं मिलीं।
📚 यह भी पढ़ें
🔗 आधिकारिक स्रोत: अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय (भारत सरकार)
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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प्रश्न 1. सरकारिया आयोग का गठन कब किया गया?
(1) 1966
(2) 1969
(3) 1983
(4) 2007
(2) 1969
(3) 1983
(4) 2007
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उत्तर: (3) 1983
सरकारिया आयोग का गठन 9 जून 1983 को केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया गया था।
सरकारिया आयोग का गठन 9 जून 1983 को केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया गया था।
प्रश्न 2. सरकारिया आयोग की सिफारिश पर किस परिषद का गठन 1990 में हुआ?
(1) राष्ट्रीय विकास परिषद
(2) अंतर्राज्यीय परिषद
(3) वित्त आयोग
(4) नीति आयोग
(2) अंतर्राज्यीय परिषद
(3) वित्त आयोग
(4) नीति आयोग
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उत्तर: (2) अंतर्राज्यीय परिषद
अंतर्राज्यीय परिषद का उल्लेख अनुच्छेद 263 में है। इसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
अंतर्राज्यीय परिषद का उल्लेख अनुच्छेद 263 में है। इसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
प्रश्न 3. सरकारिया आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(A) इसके अध्यक्ष रंजीत सिंह सरकारिया थे।
(B) इसने राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री से परामर्श की सिफारिश की।
(C) इसने अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की सिफारिश की।
(D) इसने कुल 247 सिफारिशें कीं।
(A) इसके अध्यक्ष रंजीत सिंह सरकारिया थे।
(B) इसने राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री से परामर्श की सिफारिश की।
(C) इसने अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की सिफारिश की।
(D) इसने कुल 247 सिफारिशें कीं।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और D
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
(2) केवल A, B और D
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
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उत्तर: (2) केवल A, B और D
आयोग ने अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे केवल अंतिम उपाय के रूप में प्रयोग करने की सिफारिश की। इसलिए कथन C गलत है।
आयोग ने अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे केवल अंतिम उपाय के रूप में प्रयोग करने की सिफारिश की। इसलिए कथन C गलत है।
प्रश्न 4. कथन I: सरकारिया आयोग ने राज्यपाल को राज्य से बाहर का व्यक्ति होने की सिफारिश की।
कथन II: ऐसा इसलिए कहा गया ताकि राज्यपाल स्थानीय राजनीति से अलग रह सके।
कथन II: ऐसा इसलिए कहा गया ताकि राज्यपाल स्थानीय राजनीति से अलग रह सके।
(1) दोनों कथन सही हैं और II, I की सही व्याख्या है
(2) दोनों कथन सही हैं, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) कथन I सही है, कथन II गलत है
(4) दोनों कथन गलत हैं
(2) दोनों कथन सही हैं, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) कथन I सही है, कथन II गलत है
(4) दोनों कथन गलत हैं
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उत्तर: (1) दोनों कथन सही हैं और II, I की सही व्याख्या है
बाहरी व्यक्ति को राज्यपाल बनाने का उद्देश्य निष्पक्षता और स्थानीय राजनीति से दूरी बनाए रखना था।
बाहरी व्यक्ति को राज्यपाल बनाने का उद्देश्य निष्पक्षता और स्थानीय राजनीति से दूरी बनाए रखना था।
प्रश्न 5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
| सूची I (आयोग) | सूची II (अध्यक्ष / वर्ष) |
|---|---|
| (A) सरकारिया आयोग | (I) एम. एम. पुंछी |
| (B) पुंछी आयोग | (II) 1983 |
| (C) राजमन्नार समिति | (III) 1969 |
| (D) संविधान समीक्षा आयोग | (IV) एम. एन. वेंकटचलैया |
(1) A-II, B-I, C-III, D-IV
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-I, D-II
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-I, D-II
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-II, B-I, C-III, D-IV
सरकारिया आयोग 1983, पुंछी आयोग के अध्यक्ष एम. एम. पुंछी, राजमन्नार समिति 1969 और संविधान समीक्षा आयोग के अध्यक्ष एम. एन. वेंकटचलैया थे।
सरकारिया आयोग 1983, पुंछी आयोग के अध्यक्ष एम. एम. पुंछी, राजमन्नार समिति 1969 और संविधान समीक्षा आयोग के अध्यक्ष एम. एन. वेंकटचलैया थे।
प्रश्न 6. केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा करने वाले निम्न आयोगों को कालक्रम में लगाइए:
(A) पुंछी आयोग
(B) सरकारिया आयोग
(C) राजमन्नार समिति
(D) संविधान समीक्षा आयोग
(A) पुंछी आयोग
(B) सरकारिया आयोग
(C) राजमन्नार समिति
(D) संविधान समीक्षा आयोग
(1) C, B, D, A
(2) B, C, D, A
(3) C, B, A, D
(4) B, C, A, D
(2) B, C, D, A
(3) C, B, A, D
(4) B, C, A, D
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) C, B, D, A
राजमन्नार समिति (1969) → सरकारिया आयोग (1983) → संविधान समीक्षा आयोग (2000) → पुंछी आयोग (2007)।
राजमन्नार समिति (1969) → सरकारिया आयोग (1983) → संविधान समीक्षा आयोग (2000) → पुंछी आयोग (2007)।
❓ सरकारिया आयोग से जुड़े सवाल (FAQ)
1. सरकारिया आयोग क्या है?
सरकारिया आयोग भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए 1983 में बना आयोग है, जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत सिंह सरकारिया थे।
2. सरकारिया आयोग का गठन कब हुआ?
सरकारिया आयोग का गठन 9 जून 1983 को केंद्र सरकार ने किया था।
3. सरकारिया आयोग के सदस्य कौन थे?
अध्यक्ष रंजीत सिंह सरकारिया के अलावा बी. शिवरमन और एस. आर. सेन इसके सदस्य थे।
4. सरकारिया आयोग ने कितनी सिफारिशें कीं?
आयोग ने कुल 247 सिफारिशें कीं। इसकी रिपोर्ट 1987 में सौंपी गई और जनवरी 1988 में प्रकाशित हुई।
5. सरकारिया आयोग की प्रमुख सिफारिशें क्या थीं?
स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद का गठन, राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री से परामर्श, अनुच्छेद 356 का अंतिम उपाय के रूप में प्रयोग, अखिल भारतीय सेवाओं को मजबूत करना और समवर्ती सूची पर राज्यों से परामर्श।
6. सरकारिया आयोग का संबंध किससे है?
इसका संबंध केंद्र-राज्य संबंधों से है।
7. अंतर्राज्यीय परिषद का गठन कब हुआ?
सरकारिया आयोग की सिफारिश पर अंतर्राज्यीय परिषद का गठन 1990 में किया गया। इसका उल्लेख अनुच्छेद 263 में है।
8. सरकारिया आयोग के बाद कौन-सा आयोग बना?
केंद्र-राज्य संबंधों पर बाद में पुंछी आयोग 2007 में बना, जिसकी रिपोर्ट 2010 में आई।

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
