अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
गिलफोर्ड का बुद्धि सिद्धांत (Structure of Intellect Model) जे. पी. गिलफोर्ड ने दिया। इसे त्रिआयामी (3-D) सिद्धांत भी कहते हैं, क्योंकि बुद्धि तीन आयामों से बनती है: संक्रिया (Operation), विषयवस्तु (Content) और उत्पाद (Product)। मूल मॉडल में 5 × 4 × 6 = 120 कारक थे; बाद में संशोधन से 150 और 6 × 5 × 6 = 180 कारक माने गए।
बुद्धि को समझाने के लिए स्पीयरमैन (द्विकारक) और थर्स्टन (समूह कारक) के बाद गिलफोर्ड ने बुद्धि को कई स्वतंत्र मानसिक योग्यताओं का संयोजन बताया। यह सिद्धांत कारक विश्लेषण पर आधारित है और UGC NET, REET, CTET, राजस्थान शिक्षक परीक्षाओं में खूब पूछा जाता है।

🧠 गिलफोर्ड का बुद्धि सिद्धांत क्या है?
जोय पॉल गिलफोर्ड (J. P. Guilford, 1897-1987) अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय (USC) में बुद्धि पर बड़े स्तर का कारक-विश्लेषणात्मक अनुसंधान किया। उनका मॉडल 1950 के दशक से विकसित हुआ और 1967 में उनकी पुस्तक The Nature of Human Intelligence में विस्तार से सामने आया। इसमें बुद्धि को एक डिब्बे (घन) के रूप में दिखाया जाता है, जिसके तीन आयाम हैं।
| सिद्धांत के अन्य नाम |
|---|
| बुद्धि संरचना सिद्धांत (Structure of Intellect Model) |
| संक्रिया-विषयवस्तु-उत्पाद सिद्धांत |
| बुद्धि का संरचनावादी / प्रतिमान सिद्धांत |
| त्रिआयामी (3-D) सिद्धांत |
📦 बुद्धि के तीन आयाम
| आयाम | अर्थ | मूल मॉडल के भाग |
|---|---|---|
| संक्रिया (Operation) | समस्या हल करते समय व्यक्ति जो मानसिक प्रक्रिया करता है | 5: संज्ञान, स्मृति, अपसारी चिंतन, अभिसारी चिंतन, मूल्यांकन |
| विषयवस्तु (Content) | जिस सामग्री/सूचना पर सोचा जाता है | 4: आकृत्यात्मक (Figural), प्रतीकात्मक (Symbolic), शाब्दिक (Semantic), व्यावहारिक (Behavioral) |
| उत्पाद (Product) | सोचने के बाद प्राप्त होने वाला परिणाम/रूप | 6: इकाई, वर्ग, संबंध, प्रणाली, रूपांतरण, निहितार्थ (अनुप्रयोग) |
1. संक्रिया के 5 भाग
- संज्ञान (Cognition): किसी वस्तु या सूचना को पहचानना, समझना।
- स्मृति (Memory): पहले की बातों को याद रखना। बाद में इसे दो भागों (स्मृति अभिलेख और स्मृति धारण) में बाँटा गया।
- अपसारी चिंतन (Divergent Production): एक समस्या के कई अलग-अलग हल खोजना। यह सृजनात्मकता से जुड़ा है।
- अभिसारी चिंतन (Convergent Production): सूचनाओं से एक सही हल निकालना।
- मूल्यांकन (Evaluation): किए हुए कार्य या हल की जाँच करना।
2. विषयवस्तु के 4 भाग
- आकृत्यात्मक: इंद्रियों से समझी गई मूर्त सामग्री (आकार, चित्र)।
- प्रतीकात्मक: अक्षर, अंक, संकेत।
- शाब्दिक: शब्दों और उनके अर्थ से संबंधित सामग्री।
- व्यावहारिक: सामाजिक व्यवहार, भाव और दूसरों की मंशा समझना। इसे सामाजिक बुद्धि से जोड़ा जाता है।
3. उत्पाद के 6 भाग
- इकाई (Units): अकेली वस्तु या शब्द का अर्थ समझना।
- वर्ग (Classes): वस्तुओं या विचारों का वर्गीकरण।
- संबंध (Relations): दो चीज़ों के बीच संबंध समझना।
- प्रणाली (Systems): विचारों की व्यवस्थित श्रृंखला।
- रूपांतरण (Transformations): किसी चीज़ में बदलाव या पुनर्गठन।
- निहितार्थ (Implications): जो बात सीधे नहीं कही गई, उसका अनुमान लगाना।
🔢 कारकों की संख्या: 120 से 180 तक
| मॉडल | संक्रिया × विषयवस्तु × उत्पाद | कुल कारक |
|---|---|---|
| मूल मॉडल (1960 के दशक का) | 5 × 4 × 6 | 120 |
| पहला संशोधन | 5 × 5 × 6 (आकृत्यात्मक को दृश्य और श्रव्य में बाँटा) | 150 |
| अंतिम संशोधन (1988) | 6 × 5 × 6 (स्मृति को स्मृति अभिलेख व स्मृति धारण में बाँटा) | 180 |
- 120 कारक एक मधुमक्खी के छत्ते जैसे घन में दिखाए जाते हैं।
- गिलफोर्ड और सहयोगी इनमें से अधिकांश (लगभग 100 से अधिक) कारकों के परीक्षण जाँच पाए; शेष खाली स्थान भविष्य में खोजे जाने के लिए माने गए।
- हर कारक का नाम तीनों आयामों से बनता है, जैसे “शाब्दिक अपसारी इकाई”।
📊 सिद्धांत का शैक्षिक महत्व
- सृजनात्मकता पर बल: अपसारी चिंतन को बुद्धि का अलग हिस्सा मानने से रचनात्मकता को शिक्षा में स्थान मिला।
- बहु-क्षमता दृष्टि: विद्यार्थी की अलग-अलग क्षमताओं की पहचान संभव हुई।
- प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान और व्यक्तिगत शिक्षण योजना में उपयोग।
- सीमाएँ: कारकों की संख्या बहुत अधिक और जटिल है; सभी कारक पूरी तरह स्वतंत्र नहीं पाए गए; व्यवहार में परीक्षण कठिन है।
बुद्धि की अन्य व्याख्याएँ पढ़ने के लिए बुद्धि के सिद्धांत, स्टर्नबर्ग का त्रितंत्र सिद्धांत और बुद्धि की परिभाषा और अर्थ देखें। अपसारी और अभिसारी चिंतन को विस्तार से चिंतन का अर्थ और प्रकार में समझें।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) थर्स्टन
(3) जे. पी. गिलफोर्ड
(4) स्टर्नबर्ग
👉 उत्तर देखें
यह सिद्धांत गिलफोर्ड का है और इसे त्रिआयामी सिद्धांत भी कहते हैं।
(2) 120
(3) 150
(4) 180
👉 उत्तर देखें
मूल मॉडल में 5 संक्रिया × 4 विषयवस्तु × 6 उत्पाद = 120 कारक थे।
(A) इसके तीन आयाम हैं।
(B) अपसारी चिंतन संक्रिया का भाग है।
(C) इकाई, वर्ग और संबंध उत्पाद के भाग हैं।
(D) यह सिद्धांत केवल एक सामान्य कारक पर आधारित है।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है। एक सामान्य कारक (g) की बात स्पीयरमैन के द्विकारक सिद्धांत में है; गिलफोर्ड ने बहुत से स्वतंत्र कारक माने।
कथन II: इसलिए उनका सिद्धांत सृजनात्मकता के अध्ययन से जुड़ा माना जाता है।
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
👉 उत्तर देखें
अपसारी चिंतन में एक समस्या के कई मौलिक हल खोजे जाते हैं, यही सृजनात्मकता का मूल है।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) संक्रिया | (I) शाब्दिक |
| (B) विषयवस्तु | (II) मूल्यांकन |
| (C) उत्पाद | (III) निहितार्थ |
| (D) संशोधित मॉडल | (IV) 180 कारक |
(2) A-I, B-II, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-III, B-IV, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
मूल्यांकन संक्रिया है, शाब्दिक विषयवस्तु है, निहितार्थ उत्पाद है और संशोधित मॉडल में 180 कारक हैं।
(A) 5 × 5 × 6
(B) 6 × 5 × 6
(C) 5 × 4 × 6
(2) A, C, B
(3) C, B, A
(4) B, A, C
👉 उत्तर देखें
5×4×6 = 120, 5×5×6 = 150, 6×5×6 = 180।
❓ गिलफोर्ड के बुद्धि सिद्धांत पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
