अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026
माउंटबेटन योजना (जिसे 3 जून योजना भी कहते हैं) ब्रिटिश भारत के विभाजन की वह योजना थी जो 3 जून 1947 को घोषित हुई। इसके तहत ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान दो देशों में बाँटा जाना था। पंजाब और बंगाल के बँटवारे का फ़ैसला वहाँ की विधानसभाओं के मतदान से होना था और रियासतों को भारत या पाकिस्तान में मिलने का विकल्प मिला। योजना को कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मान लिया और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के रूप में कानून बना।
स्वतंत्रता आंदोलन के आख़िरी साल की सबसे अहम घटना यही योजना है। परीक्षा में इसकी तारीख़, प्रावधान, उससे जुड़े अधिनियम और व्यक्तियों पर बार-बार प्रश्न आते हैं। पहले पृष्ठभूमि समझते हैं, फिर प्रावधान, फिर अभ्यास प्रश्न।
📌 माउंटबेटन योजना एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| घोषणा की तिथि | 3 जून 1947 |
| अन्य नाम | 3 जून योजना |
| प्रस्तावक | लॉर्ड माउंटबेटन, भारत के अंतिम वायसराय (मार्च 1947 में पदभार) |
| मुख्य सुझाव | ब्रिटिश भारत का दो स्वतंत्र डोमिनियनों, भारत और पाकिस्तान में विभाजन |
| कानूनी रूप | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (शाही स्वीकृति 18 जुलाई 1947) |
| सीमा निर्धारण | रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोग |
| सत्ता हस्तांतरण | 14-15 अगस्त 1947 |
🧭 योजना की पृष्ठभूमि
- कैबिनेट मिशन (1946) की योजना पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग में सहमति नहीं बनी। मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को “प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस” मनाया और उसके बाद देश के कई हिस्सों में भीषण सांप्रदायिक दंगे हुए।
- सितंबर 1946 में अंतरिम सरकार बनी। मुस्लिम लीग बाद में उसमें शामिल तो हुई, पर सरकार में लगातार गतिरोध बना रहा और लीग संविधान सभा की बैठकों में भी नहीं आई।
- 20 फ़रवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 से पहले भारतीयों को सत्ता सौंप देगा।
- इसी काम के लिए वेवेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय बनाकर भेजा गया। वे मार्च 1947 में भारत पहुँचे।
माउंटबेटन ने शुरू में एक और योजना (“प्लान बाल्कन” के नाम से प्रसिद्ध) तैयार की थी, पर जवाहरलाल नेहरू के कड़े विरोध के बाद उसे छोड़ दिया गया। उसके बाद वी. पी. मेनन की सहायता से संशोधित योजना बनी, जो 3 जून 1947 को घोषित हुई।
📜 योजना के मुख्य प्रावधान
- विभाजन: ब्रिटिश भारत दो स्वतंत्र डोमिनियनों, भारत और पाकिस्तान में बँटेगा।
- पंजाब और बंगाल: इन दोनों प्रांतों की विधान सभाएँ दो हिस्सों में बैठेंगी (मुस्लिम बहुल जिलों के सदस्य और शेष जिलों के सदस्य)। किसी भी हिस्से के बहुमत से विभाजन माँगने पर प्रांत का बँटवारा होगा।
- जनमत संग्रह: उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह द्वारा तय होना था कि वे किस देश में रहें। यह जुलाई 1947 में हुआ।
- रियासतें: देशी रियासतें अपनी इच्छा से भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती थीं।
- सीमा आयोग: सीमाएँ तय करने के लिए सीमा आयोग बना, जिसके अध्यक्ष सिरिल रेडक्लिफ थे।
- डोमिनियन दर्जा: दोनों नए देशों को डोमिनियन का दर्जा मिला और उन्हें राष्ट्रमंडल में रहने या उससे अलग होने का अधिकार था।
“पंजाब-बंगाल = विधानसभा का मत; NWFP-सिलहट = जनमत संग्रह”। कई पुस्तकों में योजना को सीधे “जनमत संग्रह” कहा जाता है, पर पंजाब-बंगाल में फ़ैसला विधानसभा सदस्यों के मतदान से हुआ था।
🤝 कांग्रेस और मुस्लिम लीग की प्रतिक्रिया
योजना की पुष्टि के लिए आचार्य जे. बी. कृपलानी की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की बैठक 14 जून 1947 को नई दिल्ली में हुई। गोविंद वल्लभ पंत ने विभाजन का प्रस्ताव रखा और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू ने उसका समर्थन किया। खान अब्दुल गफ्फार खाँ ने इस प्रस्ताव के विरोध में मत दिया। मुस्लिम लीग ने भी योजना स्वीकार कर ली। विभाजन के प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलने को डॉ. सैफुद्दीन किचलू ने “राष्ट्रवाद का सांप्रदायवाद के सामने समर्पण” कहा था।
🗓️ विभाजन तक की प्रमुख तिथियाँ
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 16 अगस्त 1946 | मुस्लिम लीग का प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस |
| 20 फ़रवरी 1947 | एटली की घोषणा: जून 1948 से पहले सत्ता हस्तांतरण |
| मार्च 1947 | माउंटबेटन का भारत आगमन |
| 3 जून 1947 | माउंटबेटन योजना की घोषणा |
| जुलाई 1947 | NWFP और सिलहट में जनमत संग्रह |
| 18 जुलाई 1947 | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को शाही स्वीकृति |
| 14-15 अगस्त 1947 | पाकिस्तान और भारत की स्वतंत्रता |
| 17 अगस्त 1947 | रेडक्लिफ पंचाट (सीमा निर्णय) का प्रकाशन |
माउंटबेटन भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने, जबकि मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल बने।
इन विषयों को भी साथ पढ़ें: साइमन कमीशन, असहयोग आंदोलन, सरदार वल्लभ भाई पटेल और भारत में संवैधानिक विकास।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) 3 जून 1947
(3) 18 जुलाई 1947
(4) 15 अगस्त 1947
👉 उत्तर देखें
योजना की घोषणा 3 जून 1947 को हुई।
(A) एटली ने 20 फ़रवरी 1947 को जून 1948 से पहले सत्ता हस्तांतरण की घोषणा की।
(B) मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस मनाया।
(C) पंजाब और बंगाल के विभाजन का निर्णय वहाँ की विधान सभाओं के मतदान से होना था।
(D) रियासतों का विलय रेडक्लिफ आयोग ने तय किया।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है। रेडक्लिफ आयोग का काम पंजाब और बंगाल की सीमा तय करना था, रियासतों का विलय तय करना नहीं।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) एटली की घोषणा | (I) 16 अगस्त 1946 |
| (B) प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस | (II) 20 फ़रवरी 1947 |
| (C) स्वतंत्रता अधिनियम को शाही स्वीकृति | (III) 18 जुलाई 1947 |
| (D) रेडक्लिफ पंचाट का प्रकाशन | (IV) 17 अगस्त 1947 |
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-II, B-I, C-IV, D-III
(4) A-I, B-II, C-IV, D-III
👉 उत्तर देखें
एटली की घोषणा: 20 फ़रवरी 1947 (II); प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: 16 अगस्त 1946 (I); स्वतंत्रता अधिनियम की शाही स्वीकृति: 18 जुलाई 1947 (III); रेडक्लिफ पंचाट का प्रकाशन: 17 अगस्त 1947 (IV)।
कारण (R): बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक गतिरोध के कारण जल्दी समाधान की ज़रूरत महसूस की गई।
(2) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही है, R गलत है
(4) A गलत है, R सही है
👉 उत्तर देखें
20 फ़रवरी 1947 की घोषणा जून 1948 के लिए थी, पर हालात देखकर सत्ता हस्तांतरण 15 अगस्त 1947 को हुआ।
(A) प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (B) एटली की घोषणा (C) 3 जून योजना (D) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को शाही स्वीकृति
(2) A, B, C, D
(3) A, C, B, D
(4) A, B, D, C
👉 उत्तर देखें
अगस्त 1946, फ़रवरी 1947, जून 1947, फिर जुलाई 1947।
कथन II: माउंटबेटन योजना में देशी रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने की स्वतंत्रता दी गई थी।
(2) कथन I सही है, कथन II गलत है
(3) कथन I गलत है, कथन II सही है
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
दोनों कथन सही हैं।
❓ माउंटबेटन योजना पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
