अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
चिंतन (Thinking) वह मानसिक क्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी समस्या का समाधान करता है। यह प्रतीकों, संप्रत्ययों, बिंबों और भाषा पर आधारित होता है। चिंतन के प्रकार: प्रत्यक्षात्मक, कल्पनात्मक, प्रत्ययात्मक (तार्किक), अमूर्त, सृजनात्मक और स्वली (स्वप्निल) चिंतन।
चिंतन का टॉपिक UGC NET, REET, CTET, KVS और सभी शिक्षक परीक्षाओं में पूछा जाता है। नीचे अर्थ, परिभाषाएँ, साधन, प्रकार, अपसारी-अभिसारी चिंतन, समस्या-समाधान के चरण, शिक्षक की भूमिका, MCQ और FAQ हैं।

🧠 चिंतन का अर्थ
मानव जीवन के हर पक्ष से जुड़ी समस्याएँ रोज़ आती हैं। समस्या आते ही व्यक्ति सोचना शुरू करता है और समाधान मिलते ही चिंतन रोक देता है। इसलिए चिंतन वह मानसिक क्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी समस्या का समाधान करता है।
- चिंतन प्रतीकों और चिह्नों के आधार पर चलता है; भाषा के बिना उच्च स्तर का चिंतन संभव नहीं।
- यह मानव मस्तिष्क की प्रमुख क्रिया है, जो मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग करती है।
- चिंतन से ही मनुष्य वातावरण से समायोजन कर पाता है और सांस्कृतिक व वैज्ञानिक विकास करता है।
📖 चिंतन की परिभाषाएँ
| विद्वान | परिभाषा |
|---|---|
| रॉस | चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पक्ष है। |
| गैरेट | चिंतन एक प्रकार का अदृश्य (अव्यक्त) व्यवहार है। |
| गिलफोर्ड | चिंतन प्रतीकात्मक व्यवहार है, क्योंकि सभी प्रकार का चिंतन विचारों के प्रतिस्थापन से जुड़ा है। |
| कोलेसनिक | चिंतन प्रत्ययों (संप्रत्ययों) का पुनर्गठन है। |
| वारेन | चिंतन समस्या के समाधान के लिए उत्पन्न होने वाली प्रतीकात्मक और प्रत्ययात्मक प्रक्रिया है। |
सभी परिभाषाओं का सार: चिंतन का आधार विचार है, और समस्या-समाधान के लिए विचारों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना ही चिंतन है।
🛠️ चिंतन के साधन
| साधन | अर्थ |
|---|---|
| बिंब (Image) | मन में बनी वस्तु की तस्वीर |
| संप्रत्यय (Concept) | वस्तुओं या घटनाओं के सामान्य गुणों पर आधारित मानसिक वर्ग (जैसे “पक्षी”) |
| प्रतीक (Symbol) | किसी वस्तु या विचार का प्रतिनिधित्व करने वाले चिह्न |
| भाषा (Language) | चिंतन का सबसे सशक्त साधन |
🌈 चिंतन के प्रकार
जिम्बार्डो और रुक (1977) ने चिंतन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा: स्वली (स्वप्निल) चिंतन और यथार्थवादी चिंतन। यथार्थवादी चिंतन में निम्न प्रकार आते हैं।
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रत्यक्षात्मक चिंतन | ठोस वस्तु को देखकर चिंतन; पूर्व अनुभव पर आधारित; छोटे बच्चों में अधिक | त्रिशूल देखकर शिवजी की याद आना |
| कल्पनात्मक चिंतन | वस्तु की अनुपस्थिति में उसके बारे में सोचना; स्मृति के आधार पर भविष्य की कल्पना | घर की याद, भविष्य की योजना |
| प्रत्ययात्मक (तार्किक) चिंतन | संप्रत्ययों का सहारा लेकर, अतीत और वर्तमान के अनुभव के आधार पर निर्णय | सभी पक्षी उड़ते हैं, पर पेंगुइन नहीं: तर्क से निष्कर्ष |
| अमूर्त चिंतन | प्रतीकों, शब्दों और चिह्नों पर आधारित; मूर्त चिंतन से उच्च स्तर का | लाल क्रॉस देखकर रेड क्रॉस या प्राथमिक चिकित्सा का विचार |
| सृजनात्मक चिंतन | नवीनता का सृजन; इसमें अपसारी चिंतन पाया जाता है | नई कविता, नया आविष्कार |
| स्वली चिंतन | काल्पनिक विचारों और इच्छाओं की अभिव्यक्ति | स्वप्न, दिवास्वप्न |
⚖️ अभिसारी और अपसारी चिंतन (गिलफोर्ड)
| आधार | अभिसारी चिंतन | अपसारी चिंतन |
|---|---|---|
| हल | एक सही हल | अनेक संभावित हल |
| प्रकृति | तार्किक, क्रमबद्ध | मौलिक, लचीला, खुला |
| संबंध | बुद्धि परीक्षणों से | सृजनात्मकता से |
| उदाहरण | गणित का प्रश्न | ईंट के अनेक उपयोग बताना |
गिलफोर्ड के मॉडल में इन दोनों का स्थान समझने के लिए गिलफोर्ड का बुद्धि सिद्धांत पढ़ें।
🧩 समस्या-समाधान के चरण (डीवी)
- 1. समस्या का अनुभव (कठिनाई की पहचान)
- 2. समस्या का स्पष्टीकरण और परिभाषा
- 3. संभावित हलों (परिकल्पनाओं) का निर्माण
- 4. परिकल्पनाओं का तर्कपूर्ण परीक्षण
- 5. परीक्षण और निष्कर्ष की जाँच
सृजनात्मक चिंतन के चरण (वॉलास): तैयारी → उद्भवन (Incubation) → स्फुरण (Illumination) → सत्यापन।
🏫 शिक्षक चिंतन का विकास कैसे करें?
- अपने विषय का स्पष्ट ज्ञान रखना और पढ़ाते समय चिंतन-शक्ति के विकास पर ध्यान देना।
- ऐसी परिस्थितियाँ बनाना जो छात्रों को सोचने के लिए प्रेरित करें।
- समस्या विधि और वाद-विवाद विधि का प्रयोग।
- उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य सौंपना।
- भाषा-विकास पर ध्यान देना, क्योंकि भाषा चिंतन का सशक्त साधन है।
- खुले प्रश्न (open-ended questions) पूछना।
चिंतन का बुद्धि, अधिगम और व्यक्तित्व से गहरा संबंध है। इन्हें बुद्धि क्या है, बुद्धि के सिद्धांत, अधिगम क्या है और व्यक्तित्व क्या है में पढ़ें। संवेगों के प्रभाव के लिए संवेगात्मक बुद्धि भी देखें। उच्च कोटि के चिंतन पर और जानकारी चिंतन पर है।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) संप्रत्यय
(3) भाषा
(4) स्मृति
👉 उत्तर देखें
भाषा के माध्यम से ही उच्च स्तर का चिंतन संभव होता है।
(2) गैरेट
(3) कोलेसनिक
(4) वारेन
👉 उत्तर देखें
पाठ्यपुस्तकों में यह कथन कोलेसनिक के नाम से मिलता है।
(A) चिंतन समस्या-समाधान की मानसिक क्रिया है।
(B) सृजनात्मक चिंतन में अपसारी चिंतन पाया जाता है।
(C) प्रत्यक्षात्मक चिंतन में वस्तु को देखकर चिंतन होता है।
(D) स्वली चिंतन तर्क पर आधारित होता है।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
D गलत है; स्वली चिंतन में कल्पना और इच्छाओं की अभिव्यक्ति होती है, जैसे दिवास्वप्न।
कथन II: इसमें एक समस्या के अनेक संभावित हल खोजे जाते हैं।
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
👉 उत्तर देखें
अनेक नए हल खोजने की क्षमता ही सृजनात्मकता का आधार है।
| सूची I (प्रकार) | सूची II (उदाहरण) |
|---|---|
| (A) प्रत्यक्षात्मक | (I) त्रिशूल देखकर शिवजी की याद |
| (B) कल्पनात्मक | (II) अनुपस्थित वस्तु के बारे में सोचना |
| (C) अमूर्त | (III) लाल क्रॉस देखकर रेड क्रॉस का विचार |
| (D) स्वली | (IV) दिवास्वप्न |
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
चारों मिलान सही हैं।
(A) परिकल्पना का निर्माण
(B) समस्या का अनुभव
(C) निष्कर्ष की जाँच
(D) समस्या का स्पष्टीकरण
(2) B, A, D, C
(3) D, B, A, C
(4) B, D, C, A
👉 उत्तर देखें
समस्या का अनुभव → स्पष्टीकरण → परिकल्पना → परीक्षण/जाँच।
❓ चिंतन पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
