समायोजन – अर्थ, परिभाषा, कारण, प्रकार एवं मनोरचनायें

अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026

⚡ संक्षिप्त उत्तर
समायोजन (Adjustment) वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने वाली परिस्थितियों/पर्यावरण के बीच संतुलन बनाता है। संतुलन न बन पाए तो भग्नाशा (Frustration) पैदा होती है और व्यक्ति कुसमायोजन की ओर जा सकता है। तनाव से बचने के लिए हम मनोरचनाओं (दमन, प्रक्षेपण, युक्तिकरण, क्षतिपूर्ति आदि) का सहारा लेते हैं।
⚖️
संतुलन
आवश्यकता ↔ पर्यावरण
😤
भग्नाशा
Frustration
🛡️
मनोरचनाएँ
Mental Mechanisms
🏫
शिक्षक की भूमिका
कुसमायोजन की रोकथाम
समायोजन क्या है

परीक्षा में कम अंक आए तो कोई विद्यार्थी और मेहनत करता है, कोई शिक्षक को दोष देता है, और कोई चुपचाप हार मान लेता है। तीनों अपनी तरह से हालात से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। मनोविज्ञान में इसी निपटने को समायोजन कहते हैं। यह टॉपिक CTET, REET, UPTET, UGC NET में नियमित आता है, ख़ासकर मनोरचनाओं के उदाहरण।

📌 समायोजन का अर्थ और परिभाषा

  • शेफर: समायोजन वह प्रक्रिया है जिससे कोई जीवित प्राणी अपनी आवश्यकताओं और उनकी पूर्ति वाली परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखता है।
  • आइजनेक: समायोजन ऐसी अवस्था है जिसमें एक ओर व्यक्ति की आवश्यकताएँ और दूसरी ओर पर्यावरण की माँगें संतुष्ट हों, या वह प्रक्रिया जिससे यह सामंजस्य बने।

सार यह है कि समायोजन = आवश्यकता और परिस्थिति में तालमेल। तालमेल न बैठे तो व्यक्ति कुंठा और नैराश्य में असामान्य व्यवहार करने लगता है। यही असामान्यता गंभीर हो जाए तो उसे मानसिक रोग कहा जाता है।

🔄 समायोजन की प्रक्रिया: आवश्यकता से भग्नाशा तक

समायोजन का मनोविज्ञान
  • मनुष्य हर समय किसी न किसी आवश्यकता से घिरा रहता है। आवश्यकता पूरी न हो तब तक तनाव और बेचैनी रहती है।
  • इसे दूर करने के लिए प्रेरक (Motive) और चालक (Drive) काम करते हैं और व्यक्ति उद्देश्य की ओर बढ़ता है।
  • रास्ते में बाधाएँ आ सकती हैं। वे बाहरी भी हो सकती हैं और भीतरी भी। कई बार एक साथ कई समान महत्त्व की आवश्यकताएँ उठ खड़ी होती हैं और आपस में टकराती हैं (द्वंद्व)।
  • बाधा पार हो जाए तो उद्देश्य मिलता है और तनाव खत्म होता है। न पार हो तो भग्नाशा (Frustration) पैदा होती है।
  • लंबे समय की भग्नाशा से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है, व्यक्ति कुसमायोजन का शिकार हो सकता है और कभी असामाजिक व्यवहार भी करने लगता है।
🧠 ट्रिक: असमायोजन = आवश्यकताओं और उनकी पूर्ति के बीच संतुलन बन ही न पाना। कुसमायोजन = गलत ढंग से संतुलन बनाना। दोनों शब्दों का फ़र्क परीक्षा में पूछा जाता है।

🙂 समायोजित व्यक्तित्व की पहचान

लक्षणमतलब
संतुलित व्यक्तित्वव्यक्तित्व के सभी पक्षों का संतुलित विकास; किसी एक पक्ष में अकेले बढ़ोतरी नहीं
तनाव में कमीतनाव से पूरी तरह बचना संभव नहीं, पर समायोजित व्यक्ति उसे कम रखना जानता है
आवश्यकता व पर्यावरण में सामंजस्यपरिस्थिति के अनुसार अपनी आवश्यकताओं को ढाल लेता है, इसलिए बाधाएँ और तनाव कम रहते हैं

🧩 समायोजन के तीन प्रकार

प्रकारअर्थउदाहरण
रचनात्मक समायोजनरचनात्मक कार्यों से किसी क्षेत्र की कमी की भरपाईकिसी क्षेत्र में तालमेल बिगड़ने पर समाज-सेवा जैसे रचनात्मक काम में लग जाना
स्थानापन्न समायोजनअसफलता का दोष दूसरों पर डालकर संतोष पाना; यह अल्पकालिक और अवांछित माना जाता हैफेल होने पर शिक्षकों या परीक्षक को दोष देना
मानसिक मनोरचनाएँमन को समझाने की विधियाँ, जो सामान्य और असामान्य, सब प्रयोग करते हैंदमन, प्रक्षेपण, युक्तिकरण आदि (आगे तालिका में)

🪜 समायोजन के तीन सोपान

🔍
1. समस्या का अंकन
Appraisal
🧮
2. निर्णय-निर्माण
Decision Making
🚀
3. क्रियान्वयन
Execution
  • समस्या का अंकन: व्यक्ति समस्या को पहचानता है, वर्ग में रखता है और उसकी गंभीरता आँकता है।
  • निर्णय-निर्माण: संभावित समाधानों की सूची बनती है और हर एक का मूल्यांकन होता है।
  • क्रियान्वयन: चुने हुए समाधान पर काम शुरू होता है और कठिनाइयाँ आएँ तो उसमें ज़रूरी संशोधन किए जाते हैं।

📊 समायोजन की मात्रा: चार स्तर

स्तरअर्थउदाहरण / संकेत
समायोजन प्रतिक्रियाएँआवश्यकताओं और पर्यावरण के साथ पूर्ण और सफल समायोजनवांछित उद्देश्य मिल जाता है, कुंठा से बचाव
आंशिक समायोजन प्रतिक्रियाएँवास्तविकता में असफल होकर कल्पना-लोक में समायोजनदिवास्वप्न
असमायोजन प्रतिक्रियाएँलंबे समय तक ऐसा व्यवहार कि आवश्यकता और पर्यावरण में तालमेल न बैठेमुख्य आवश्यकता छोड़कर कम महत्त्व की चीज़ों में लगे रहना
कुसमायोजन प्रतिक्रियाएँगलत या विरोधाभासी ढंग से सामंजस्य; असामान्य व्यवहार को जन्म देता हैसमाज से संबंध बिगड़ना; व्यक्ति और समाज, दोनों को हानि

🔬 समायोजन के प्रारूप (Models)

प्रारूपमूल बात
व्यवहारवादी प्रारूपसमायोजन अधिगम पर टिका है। यह उद्दीपन-अनुक्रिया (S-R) सिद्धांत पर आधारित है। समाज-स्वीकृत ढंग से अनुक्रिया करना समायोजन है। इसके पाँच चरण: अनुक्रिया प्रतिबद्धता, पुनर्बलन, सामान्यीकरण, विभेदीकरण, प्रारूपीकरण और आकृतिकरण
मनोविश्लेषणवादी प्रारूपफ्रायड के अनुसार व्यवहार अचेतन मन और काम-ऊर्जा से तय होता है। मन के तीन भाग: इदम् (सहज इच्छाएँ), अहम् या ईगो (वास्तविकता), पराहम् या सुपर ईगो (नैतिकता)। ईगो इन दोनों के द्वंद्व में समाज-स्वीकृत ढंग से चले तो समायोजन होता है। ईगो कमज़ोर हो तो चिंता और मानसिक बीमारियाँ बढ़ती हैं

🛡️ मानसिक मनोरचनाएँ (Mental Mechanisms)

मनोरचनाएँ वे तरीके हैं जिनसे हम अपने भीतर के संघर्ष, नैराश्य, तनाव और चिंता से बचते हैं। इन्हें आत्म-सुरक्षा अभियांत्रिकियाँ भी कहते हैं। सामान्य व्यक्ति के लिए ये तनाव से बचने का साधन हैं। पर जो व्यक्ति अपनी ज़्यादातर ऊर्जा इन्हीं में खर्च कर दे, उसके व्यक्तित्व का संगठित विकास नहीं हो पाता।

मनोरचनाअर्थउदाहरण
दमन (Repression)कष्टदायक विचार/इच्छा को अनजाने में अचेतन मन में धकेल देनादुखद घटना को भूल जाना
शमन (Suppression)कष्टदायक विचार को जानबूझकर मन से हटानापढ़ाई के समय चिंता को जान-बूझकर परे रखना
प्रतिगमन (Regression)मुश्किल में बचपन जैसे व्यवहार पर लौट जानाअसफल वयस्क का बच्चे की तरह माँ की गोद में छिपना, अंगूठा चूसना
तदात्मीकरण (Identification)खुद को किसी और जैसा मानना या उसके जैसा बनने की कोशिशभारत की जीत पर “हम जीत गए”; अभिनेता जैसा बोलना
युक्तिकरण (Rationalisation)दोषपूर्ण तर्क देकर अपनी असफलता छिपाना“अंगूर खट्टे हैं”; चुनाव हारकर कहना कि राजनीति गंदी है
प्रक्षेपण (Projection)अपने दोष दूसरों पर डालनाफेल होने पर परीक्षा या परीक्षक को दोष देना
क्षतिपूर्ति (Compensation)एक क्षेत्र की कमी को दूसरे क्षेत्र में सफलता से पूरा करनापढ़ाई में कमज़ोर छात्र का खेल में नाम कमाना
मार्गान्तरीकरण (Sublimation)असामाजिक इच्छा को सामाजिक रूप में बदलनापाठ्यपुस्तकों में तुलसीदास का उदाहरण दिया जाता है, जहाँ पत्नी-प्रेम राम-भक्ति में बदला
प्रतिक्रिया-निर्माण (Reaction Formation)मूल इच्छा के विपरीत इच्छा विकसित कर लेनाधन न पाने पर निर्धनता के गुण गाना
रूपांतरण (Conversion)दबी इच्छा/भय का शारीरिक लक्षण बन जानापरीक्षा से ठीक पहले बुखार आ जाना
दिवास्वप्न (Day dreaming)कल्पना में इच्छाओं की तृप्तिखाली बैठे हवाई किले बनाना
विस्थापन (Displacement)गुस्सा जिस पर आना चाहिए, उस पर न निकालकर किसी और पर निकालनादफ़्तर का गुस्सा घर आकर बच्चे पर निकालना
🧠 ट्रिक: “दमन अनजाने, शमन जानबूझकर” और “प्रक्षेपण = दोष दूसरों पर, युक्तिकरण = बहाना / तर्क”। ये दो जोड़ियाँ परीक्षा में सबसे ज़्यादा उलझाती हैं।

🏫 कुसमायोजन रोकने में विद्यालय और शिक्षक की भूमिका

  • बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें; खेल-कूद की सुविधा हो।
  • शिक्षक खुद संवेगात्मक रूप से संतुलित रहें और बच्चों के संवेगों पर ध्यान दें।
  • व्यवहार स्नेहपूर्ण और सहयोगी हो, पक्षपात न हो। कथनी और करनी में अंतर न हो।
  • बच्चे पर आकांक्षा का बोझ उसकी क्षमता, रुचि और अभियोग्यता के हिसाब से रखें।
  • हानिकारक प्रतिस्पर्धा पर रोक लगे।
  • पाठ्यक्रम और शिक्षण-विधि बच्चों के अनुकूल हों; स्वतंत्रता और स्वानुशासन का मौक़ा मिले।
  • नैतिक शिक्षा, और शैक्षिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की व्यवस्था हो।
  • शिक्षकों का अपना मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहे।

इसे जोड़कर पढ़ें: अभिप्रेरणा के सिद्धांत, संवेगात्मक विकास, व्यक्तित्व, अधिगम क्या है और संवेगात्मक बुद्धि।

📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

प्रश्न 1. “अंगूर खट्टे हैं” किस मनोरचना का उदाहरण है?
(1) प्रक्षेपण
(2) युक्तिकरण
(3) दमन
(4) क्षतिपूर्ति
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) युक्तिकरण
अपनी असफलता को ढकने के लिए दोषपूर्ण तर्क देना युक्तिकरण है।
प्रश्न 2. समायोजन के बारे में कथन:
(A) समायोजन आवश्यकताओं और पर्यावरण में संतुलन की प्रक्रिया है।
(B) लंबे समय की भग्नाशा कुसमायोजन का कारण बन सकती है।
(C) दिवास्वप्न आंशिक समायोजन प्रतिक्रिया का उदाहरण है।
(D) दमन में व्यक्ति को पता रहता है कि विचार अचेतन में धकेला जा रहा है।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (2) केवल A, B और C
D गलत है। यह शमन की विशेषता है, दमन में व्यक्ति को इसका पता नहीं चलता।
प्रश्न 3. सूची I (मनोरचना) को सूची II (उदाहरण) से सुमेलित कीजिए:

सूची Iसूची II
(A) प्रक्षेपण(I) फेल होने पर परीक्षा को दोष देना
(B) क्षतिपूर्ति(II) पढ़ाई में कमज़ोर छात्र का खेल में अव्वल होना
(C) विस्थापन(III) दफ़्तर का गुस्सा बच्चे पर निकालना
(D) प्रतिगमन(IV) वयस्क का अंगूठा चूसना
(1) A-I, B-II, C-III, D-IV
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-III, B-II, C-I, D-IV
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-I, B-II, C-III, D-IV
प्रक्षेपण → परीक्षा को दोष; क्षतिपूर्ति → खेल में नाम; विस्थापन → गुस्सा बच्चे पर; प्रतिगमन → बचपन जैसा व्यवहार।
प्रश्न 4. अभिकथन (A): दमन और शमन एक-दूसरे से भिन्न मनोरचनाएँ हैं।
कारण (R): शमन में व्यक्ति जान-बूझकर विचार दबाता है, जबकि दमन अनजाने में होता है।
(1) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है
यही दोनों में मूल अंतर है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
प्रश्न 5. समायोजन के सोपानों का सही क्रम चुनिए:
(A) निर्णय-निर्माण
(B) क्रियान्वयन
(C) समस्या का अंकन
(1) C, A, B
(2) A, C, B
(3) C, B, A
(4) A, B, C
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) C, A, B
पहले समस्या का अंकन, फिर निर्णय-निर्माण और अंत में क्रियान्वयन।
प्रश्न 6. कथन I: फ्रायड के अनुसार मन के तीन भाग हैं: इदम्, अहम् और पराहम्।
कथन II: ईगो (अहम्) वास्तविकता के अनुसार काम करने का प्रयास करता है।
(1) दोनों कथन सही हैं
(2) कथन I सही, कथन II गलत
(3) कथन I गलत, कथन II सही
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) दोनों कथन सही हैं
दोनों कथन फ्रायड के मनोविश्लेषणवादी प्रारूप के अनुसार सही हैं।

❓ समायोजन पर सवाल-जवाब (FAQ)

1. समायोजन क्या है?
समायोजन वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने वाली परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाता है।
2. कुसमायोजन क्या होता है?
जब व्यक्ति आवश्यकताओं और पर्यावरण के बीच गलत या विरोधाभासी ढंग से सामंजस्य बनाता है, तो उसे कुसमायोजन कहते हैं। इससे असामान्य व्यवहार पैदा होते हैं।
3. मानसिक मनोरचनाएँ क्या हैं?
ये आत्म-सुरक्षा के तरीके हैं जिनसे व्यक्ति तनाव, संघर्ष और चिंता से बचता है, जैसे दमन, प्रक्षेपण, युक्तिकरण, क्षतिपूर्ति और विस्थापन।
4. दमन और शमन में क्या अंतर है?
दमन अनजाने में होता है, जबकि शमन में व्यक्ति जान-बूझकर कष्टदायक विचार को मन से हटाता है।
5. शिक्षक कुसमायोजन कैसे रोक सकता है?
स्नेहपूर्ण व्यवहार, पक्षपात न करना, बच्चे की क्षमता के अनुसार अपेक्षा रखना, खेल-कूद और मार्गदर्शन की व्यवस्था करना और हानिकारक प्रतिस्पर्धा रोकना इसके उपाय हैं।

केवल कृष्ण घोड़ेला

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।

लेखक: केवल कृष्ण घोड़ेला

एम.ए., बी.एड., नेट (हिंदी) | कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान) | संस्थापक, GK Hub

इस लेख की जानकारी पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर लिखी गई है। कोई त्रुटि मिले तो हमें बताएँ | संपादकीय नीति | About Us

Leave a Comment