अंतिम संशोधित (Last Updated): October 22, 2026
अभिप्रेरणा वह भीतरी शक्ति है जो व्यवहार को शुरू करती, दिशा देती और बनाए रखती है। इसके प्रमुख सिद्धांत हैं: मैक्डूगल का मूल प्रवृत्ति सिद्धांत, लेविन का क्षेत्र सिद्धांत, फ्रायड का मनोविश्लेषणवादी सिद्धांत, मोर्गन का केंद्रीय अवस्था सिद्धांत, मैस्लो का आवश्यकता-पदानुक्रम, मरे का आवश्यकता सिद्धांत, मैक्लीलैंड का निष्पत्ति प्रेरक सिद्धांत और रोजर्स का आत्म-प्रत्यय सिद्धांत।

दो विद्यार्थी एक ही कक्षा में बैठे हैं। एक सुबह चार बजे उठकर पढ़ता है, दूसरे को किताब देखकर नींद आती है। फ़र्क बुद्धि का हो, यह ज़रूरी नहीं। अक्सर फ़र्क अभिप्रेरणा का होता है, यानी भीतर से कुछ करने की चाह का। इसी वजह से शिक्षक के लिए अभिप्रेरणा के सिद्धांत समझना ज़रूरी है, और CTET, REET, UPTET, UGC NET जैसी परीक्षाओं में इन पर सीधे प्रश्न आते हैं।
🗂️ एक नज़र में: प्रमुख सिद्धांत
| सिद्धांत | प्रतिपादक | मुख्य बात |
|---|---|---|
| मूल प्रवृत्ति सिद्धांत | मैक्डूगल | मनुष्य में 14 मूल प्रवृत्तियाँ हैं (क्रोध, काम, युयुत्सा, वात्सल्य आदि); हर व्यवहार इन्हीं से उपजता है |
| संज्ञानात्मक क्षेत्र सिद्धांत | लेविन | मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में शक्तियाँ काम करती हैं: सदिश (Vector) और बल (Valence) |
| मनोविश्लेषणवादी सिद्धांत | फ्रायड | दो चालक: जीवन-शक्ति (इरोस) और मृत्यु-शक्ति (थानाटोस) |
| केंद्रीय अवस्था सिद्धांत | मोर्गन | हर व्यवहार के पीछे एक केंद्रीय अवस्था होती है; वह जितनी तीव्र, प्रेरणा उतनी तीव्र |
| आवश्यकता-पदानुक्रम सिद्धांत | मैस्लो | आवश्यकताएँ निम्न से उच्च के क्रम में होती हैं |
| आवश्यकता सिद्धांत | मरे | आवश्यकताओं को वर्गों में बाँटा, पर कोई पदक्रम नहीं दिया |
| निष्पत्ति प्रेरक सिद्धांत | मैक्लीलैंड | उपलब्धि पाने की चाह (n-Achievement) पर ज़ोर |
| आत्म-प्रत्यय सिद्धांत | रोजर्स | व्यक्ति अपने बारे में जो सोचता है, वही उसकी प्रेरणा तय करता है |
🔥 मूल प्रवृत्ति सिद्धांत (मैक्डूगल)
मैक्डूगल के अनुसार मनुष्य में चौदह मूल प्रवृत्तियाँ होती हैं, जैसे क्रोध, काम, युयुत्सा (लड़ने की प्रवृत्ति) और वात्सल्य। ये प्रवृत्तियाँ ही इंसान को अलग-अलग काम करने को प्रेरित करती हैं। जितनी तीव्र प्रवृत्ति, उतना तीव्र उससे जुड़ा व्यवहार।
🧭 लेविन, फ्रायड और मोर्गन के विचार
- लेविन का क्षेत्र सिद्धांत: व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में अनेक शक्तियाँ काम करती हैं। इन्हें दो वर्गों में रखा जाता है: सदिश (Vector) और बल (Valence)।
- फ्रायड का मनोविश्लेषणवादी सिद्धांत: हर प्राणी में दो चालक होते हैं: जीवन-शक्ति (Eros) और मृत्यु-शक्ति (Thanatos)। यही चालक व्यवहार को प्रेरित करते हैं।
- मोर्गन का सिद्धांत: व्यवहार के पीछे एक केंद्रीय अवस्था (Central State) होती है। इसकी तीन विशेषताएँ हैं: एक बार पैदा होने पर इसे बार-बार उद्दीपक या पुनर्बलन की ज़रूरत नहीं रहती; यह एक तय दिशा में चुनिंदा प्रतिक्रियाएँ कराती है; और इससे एक खास तरह का व्यवहार जन्म लेता है। केंद्रीय अवस्था जितनी तीव्र होगी, प्रेरणा भी उतनी तीव्र होगी।
🔺 मैस्लो का आवश्यकता-पदानुक्रम सिद्धांत
मैस्लो ने कहा कि हमारी आवश्यकताएँ सीढ़ी की तरह सजी हैं। जो आवश्यकता जितनी बुनियादी होती है, उसकी प्रेरणा उतनी तीव्र होती है। निचली सीढ़ी पूरी होने पर ही आदमी ऊपर वाली की ओर बढ़ता है। इसलिए इसे प्रेरणा का पदानुक्रमी सिद्धांत (Hierarchy Theory) कहते हैं।
| क्रम (नीचे से ऊपर) | आवश्यकता | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | शारीरिक / जैविक | भोजन, पानी, नींद |
| 2 | सुरक्षा | आवास, सुरक्षित माहौल, माता-पिता पर निर्भरता का सहारा |
| 3 | प्रेम और संबद्धता | मित्र-मंडली, प्रेम देना-पाना, समूह का सदस्य बनना |
| 4 | आत्म-सम्मान | दूसरों से सम्मान, स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा |
| 5 | आत्म-वास्तविकता (आत्म-सिद्धि) | कविता, चित्र, संगीत, विज्ञान या समाज-सेवा में अपनी क्षमता का पूरा उपयोग |

- बाद में मैस्लो ने संज्ञानात्मक (जानने-समझने की) और सौंदर्यपरक आवश्यकताओं की भी चर्चा की।
- पहली तीन आवश्यकताएँ जीवन-रक्षक मानी गईं और बाकी मनोवैज्ञानिक।
- D-Motivation (डी-मोटिवेशन): असुरक्षा, हीनता और कमज़ोरी जैसी कमियों से छुटकारा पाने की प्रेरणा।
- इस क्रम के अपवाद भी हैं। कभी-कभी व्यक्ति मूल्यों के कारण निचली आवश्यकता छोड़कर ऊपर वाली को चुन लेता है। “प्राण जाए पर वचन न जाई” में मूल्य सबसे ऊपर हैं, जबकि “भूखे भजन न होहिं गोपाला” में मैस्लो का क्रम साफ़ दिखता है।
📋 मरे का आवश्यकता सिद्धांत
मैस्लो की तरह मरे भी आवश्यकताओं को ही प्रेरणा की जड़ मानते हैं, पर दो बातों में अलग हैं। पहली, मरे कोई पदक्रम नहीं बनाते। उनके अनुसार किसी आवश्यकता का महत्त्व समय, परिस्थिति और स्वभाव के हिसाब से बदलता रहता है। दूसरी, मरे मानते हैं कि इंसान आवश्यकता से पैदा तनाव को घटाने की कोशिश तो करता ही है, पर स्वभाव से वह तनाव खुद भी पैदा करता है, ताकि व्यस्त और सक्रिय रहे।
मरे की आवश्यकताओं की सूची लंबी है (पाठ्यपुस्तकों में प्रायः 20 वर्ग गिनाए जाते हैं)। परीक्षा की दृष्टि से इनके उदाहरण याद रखिए: निष्पत्ति (n-Achievement), सम्बद्धता (n-Affiliation), आक्रामकता (n-Aggression), स्वायत्तता (n-Autonomy), प्रभुत्व (n-Dominance), प्रदर्शन (n-Exhibition), परोपकार (n-Nurturance), व्यवस्था (n-Order), क्रीड़ा (n-Play) और अवबोध (n-Understanding)।
🏆 मैक्लीलैंड का निष्पत्ति प्रेरक सिद्धांत
- इसे निष्पत्ति प्रेरक सिद्धांत कहते हैं। कुछ स्रोतों में इसे प्रभावक सक्रियता (Affective Arousal) का सिद्धांत भी कहा गया है।
- निष्पत्ति का अर्थ है लक्ष्य को पा लेना। इसके लिए सिर्फ़ बौद्धिक रुझान काफ़ी नहीं, उसके साथ प्रेरक भी चाहिए।
- मैक्लीलैंड के अनुसार पुरस्कार और प्रशंसा सफलता के लिए दंड और लांछन से ज़्यादा ताक़तवर प्रेरक हैं, इसलिए सकारात्मक प्रेरकों को अधिक महत्त्व देना चाहिए।
- आम तौर पर मैक्लीलैंड की तीन प्रमुख आवश्यकताएँ गिनाई जाती हैं: उपलब्धि (n-Ach), शक्ति (n-Pow) और संबद्धता (n-Aff)।
🪞 रोजर्स का आत्म-प्रत्यय सिद्धांत
रोजर्स के लिए अभिप्रेरणा की चाबी आत्म-प्रत्यय (Self-concept) है, यानी व्यक्ति अपने शरीर, क्षमताओं, स्थिति, परिवार, मित्रों और आदतों के बारे में क्या सोचता है। जैसा वह अपने बारे में सोचेगा, वैसा ही व्यवहार करेगा। एक भला-चंगा आदमी खुद को बीमार मानने लगे तो वह बीमार जैसा ही बर्ताव करेगा।
- आत्म को प्रत्यय (विचार) के रूप में भी देखा जाता है और प्रक्रिया के रूप में भी।
- छोटे बच्चे में आत्म-प्रत्यय नहीं होता। बौद्धिक विकास के साथ वह खुद को दूसरों से अलग समझने लगता है (विभेदीकरण), फिर “मेरा परिवार, मेरा विद्यालय” के बारे में सोचने लगता है और उनके हित के लिए प्रेरित होता है।
- आत्म-प्रत्यय और अधिगम में धनात्मक संबंध पाया गया है। विद्यार्थी खुद को जैसा मानता है और जो आकांक्षा-स्तर रखता है, उसी के अनुसार उसकी शैक्षिक उपलब्धि रहती है।
🏫 शिक्षक इन सिद्धांतों से क्या सीखे
- छात्र की बुनियादी ज़रूरतें (भूख, सुरक्षा, अपनापन) पूरी हों, तभी वह पढ़ाई पर टिक पाएगा (मैस्लो)।
- सज़ा के बजाय प्रशंसा और पुरस्कार पर ज़्यादा भरोसा करें (मैक्लीलैंड)।
- छात्रों में सकारात्मक आत्म-प्रतिमा बनाएँ। “तुम कर सकते हो” जैसे वाक्य सच में असर करते हैं (रोजर्स)।
- हर बच्चे की ज़रूरतें और रुचियाँ अलग होती हैं। एक जैसी विधि सब पर न थोपें (मरे)।
- लक्ष्य साफ़ दें और बच्चे का आकांक्षा-स्तर उसकी क्षमता के हिसाब से ऊँचा रखने में मदद करें।
इसे जोड़कर पढ़ें: बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत, अधिगम क्या है, संवेगात्मक विकास, समायोजन क्या है और व्यक्तित्व।
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
(2) मैस्लो
(3) मरे
(4) लेविन
👉 उत्तर देखें
मैक्डूगल ने 14 मूल प्रवृत्तियाँ बताईं, जो व्यवहार को प्रेरित करती हैं।
(A) सुरक्षा
(B) शारीरिक
(C) आत्म-सम्मान
(D) प्रेम और संबद्धता
(2) A, B, D, C
(3) B, D, A, C
(4) B, A, C, D
👉 उत्तर देखें
पहले शारीरिक, फिर सुरक्षा, फिर प्रेम-संबद्धता और उसके बाद आत्म-सम्मान आता है। सबसे ऊपर आत्म-वास्तविकता है।
(A) मैस्लो ने आवश्यकताओं को पदानुक्रम में रखा।
(B) मरे ने आवश्यकताओं को कोई पदक्रम नहीं दिया।
(C) मैक्लीलैंड का सिद्धांत निष्पत्ति प्रेरक पर आधारित है।
(D) रोजर्स के अनुसार आत्म-प्रत्यय का अभिप्रेरणा में कोई महत्त्व नहीं है।
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
👉 उत्तर देखें
A, B और C सही हैं। D गलत है, क्योंकि रोजर्स के सिद्धांत की जड़ ही आत्म-प्रत्यय है।
| सूची I | सूची II |
|---|---|
| (A) मैक्डूगल | (I) 14 मूल प्रवृत्तियाँ |
| (B) लेविन | (II) सदिश (Vector) और बल (Valence) |
| (C) मैस्लो | (III) आवश्यकता-पदानुक्रम |
| (D) मैक्लीलैंड | (IV) निष्पत्ति प्रेरक |
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-III, B-II, C-I, D-IV
👉 उत्तर देखें
मैक्डूगल → 14 मूल प्रवृत्तियाँ, लेविन → सदिश और बल, मैस्लो → पदानुक्रम, मैक्लीलैंड → निष्पत्ति प्रेरक।
कारण (R): निचली आवश्यकताएँ अधिक बुनियादी और तीव्र होती हैं।
(2) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(3) A सही, R गलत
(4) A गलत, R सही
👉 उत्तर देखें
बुनियादी आवश्यकताएँ ज़्यादा तीव्र होती हैं, इसलिए पहले वही पूरी की जाती हैं।
कथन II: मोर्गन के अनुसार व्यवहार के पीछे एक केंद्रीय अवस्था होती है।
(2) कथन I सही, कथन II गलत
(3) कथन I गलत, कथन II सही
(4) दोनों कथन गलत हैं
👉 उत्तर देखें
दोनों कथन अपने-अपने सिद्धांतों के अनुसार सही हैं।
❓ अभिप्रेरणा के सिद्धांतों पर सवाल-जवाब (FAQ)

एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
