अंतिम संशोधित (Last Updated): October 21, 2026
⚡ संक्षिप्त उत्तर
कोह्लबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोह्लबर्ग ने दिया। इसमें नैतिक चिंतन के 3 स्तर और 6 चरण हैं: पूर्व-परंपरागत (दंड व स्वार्थ), परंपरागत (अच्छा बनना व सामाजिक नियम) और पश्च-परंपरागत (सामाजिक समझौता व सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत)। यह अवस्था सिद्धांत है और पियाजे के नैतिक विकास सिद्धांत का विस्तार माना जाता है।
कोह्लबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोह्लबर्ग ने दिया। इसमें नैतिक चिंतन के 3 स्तर और 6 चरण हैं: पूर्व-परंपरागत (दंड व स्वार्थ), परंपरागत (अच्छा बनना व सामाजिक नियम) और पश्च-परंपरागत (सामाजिक समझौता व सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत)। यह अवस्था सिद्धांत है और पियाजे के नैतिक विकास सिद्धांत का विस्तार माना जाता है।
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लॉरेंस कोह्लबर्ग
1927-1987
🪜
3 स्तर
6 चरण
📘
1958
शोध-प्रबंध का आरंभ
⚖️
नैतिक दुविधा
हाइंज़ की कहानी
इस सिद्धांत से सवाल UPTET, REET, CTET, KVS, DSSB, HTET और UGC NET में पूछे जाते हैं। नीचे हर चरण उदाहरण, आयु और ट्रिक के साथ दिया गया है।

🧭 कोह्लबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत क्या है?
- लॉरेंस कोह्लबर्ग (1927-1987) ने 1958 के अपने शोध में लड़कों को नैतिक दुविधाओं की कहानियाँ सुनाकर उनके उत्तरों का अध्ययन किया। सिद्धांत को 1969 में विस्तार से रखा गया और बाद में संशोधित किया गया (1981, 1984)।
- यह अवस्था सिद्धांत (Stage Theory) है; चरण एक निश्चित क्रम में आते हैं और सार्वभौमिक माने गए हैं।
- नैतिकता जन्मजात नहीं, सामाजिक परिवेश से सीखी जाती है।
- नैतिक तर्कणा (Moral Reasoning) = सही-गलत का निर्णय लेने की चिंतन प्रक्रिया। निर्णय न ले पाने की स्थिति = नैतिक दुविधा (Moral Dilemma)।
- कोह्लबर्ग के अनुसार चरण “क्या सही है” से अधिक यह देखते हैं कि व्यक्ति किस कारण से उसे सही मानता है।
- बच्चे का नैतिक विकास विशिष्ट से सामान्य की ओर होता है।
🪜 नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण
| स्तर | आयु (लगभग) | चरण | नैतिकता का आधार |
|---|---|---|---|
| 1. पूर्व-परंपरागत (Pre-conventional) | 4 से 10 वर्ष | चरण 1: आज्ञाकारिता व दंड चरण 2: स्वार्थ/विनिमय (अहंकार की अवस्था) | बाह्य नियंत्रण: दंड और पुरस्कार |
| 2. परंपरागत (Conventional) | 10 से 13 वर्ष | चरण 3: अच्छा लड़का-अच्छी लड़की (प्रशंसा) चरण 4: सामाजिक व्यवस्था व कानून | सामाजिक नियंत्रण: नियम, माता-पिता, समाज |
| 3. पश्च-परंपरागत (Post-conventional) | 13 वर्ष से प्रौढ़ावस्था | चरण 5: सामाजिक समझौता व व्यक्तिगत अधिकार चरण 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत | आंतरिक नियंत्रण: स्वयं चुने सिद्धांत |
स्तर 1: पूर्व-परंपरागत स्तर
- चरण 1 (आज्ञा व दंड): बच्चा दंड से बचने के लिए बड़ों की बात मानता है। कहावत: “जिसकी लाठी उसकी भैंस”।
- चरण 2 (स्वार्थ/विनिमय): “मेरे लिए इसमें क्या है?” वही सही, जिसमें अपना लाभ हो और बराबर का लेन-देन हो। कहावत: “तुम मेरी पीठ खुजलाओ, मैं तुम्हारी।” इसे यांत्रिक/साधन सापेक्षता भी कहते हैं।
- इसे पियाजे के बंटनात्मक यथार्थवाद जैसा स्तर कहा जाता है।
स्तर 2: परंपरागत स्तर
- चरण 3 (अच्छे संबंध/प्रशंसा): बच्चा “अच्छा लड़का/अच्छी लड़की” बनकर माता-पिता और दूसरों की स्वीकृति चाहता है।
- चरण 4 (सामाजिक आदेश): कानून, न्याय और कर्तव्य का पालन; “समाज चले, इसलिए नियम मानने चाहिए”।
- इस स्तर पर नैतिकता नियमों पर आधारित होती है (नैतिक यथार्थवाद)।
स्तर 3: पश्च-परंपरागत स्तर
- चरण 5 (सामाजिक समझौता): नियम समाज के हित के लिए बने समझौते हैं और ज़रूरत पड़े तो बदले जा सकते हैं। व्यक्ति के अधिकारों का महत्व।
- चरण 6 (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत): न्याय, समानता और मानव गरिमा जैसे सार्वभौमिक सिद्धांत, चाहे कानून उनके विरुद्ध हो। कोह्लबर्ग के अनुसार बहुत कम लोग इस चरण तक पहुँचते हैं।
- इस स्तर पर नैतिकता आंतरिक नियंत्रण से चलती है।
🧠 परीक्षा ट्रिक: पूर्व = सज़ा-स्वार्थ (1-2), परंपरागत = समाज-कानून (3-4), पश्च = समझौता-सिद्धांत (5-6)। आयु: 4-10, 10-13, 13+।
📖 हाइंज़ की दुविधा (Heinz Dilemma)
कोह्लबर्ग की सबसे प्रसिद्ध कहानी: हाइंज़ की पत्नी गंभीर बीमार है और जीवन-रक्षक दवा बहुत महँगी है। दवा बेचने वाला कम कीमत पर देने से मना कर देता है। क्या हाइंज़ को दवा चुरानी चाहिए? कोह्लबर्ग के लिए महत्वपूर्ण यह नहीं था कि बच्चा “हाँ” कहे या “नहीं”, बल्कि यह कि उसके तर्क किस चरण के हैं।
⚖️ पियाजे और कोह्लबर्ग की तुलना
| आधार | पियाजे | कोह्लबर्ग |
|---|---|---|
| सिद्धांत | नैतिक विकास की 2 अवस्थाएँ | नैतिक विकास के 3 स्तर, 6 चरण |
| आयु | लगभग 10-11 वर्ष तक की प्रमुख अवस्थाएँ | 4 वर्ष से प्रौढ़ावस्था तक |
| विधि | बच्चों के खेल और कहानियाँ | नैतिक दुविधा की कहानियाँ |
| प्रकृति | नैतिक यथार्थवाद → नैतिक सापेक्षवाद | दंड-स्वार्थ → समाज-कानून → सार्वभौमिक सिद्धांत |
🔎 सिद्धांत की सीमाएँ और आलोचना
- अध्ययन मुख्यतः लड़कों पर हुआ। कैरोल गिलिगन ने कहा कि महिलाओं में नैतिकता “न्याय” से अधिक “देखभाल और संबंध” पर आधारित हो सकती है।
- सिद्धांत पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित माना जाता है।
- नैतिक तर्क और वास्तविक व्यवहार में हमेशा समानता नहीं होती।
- चरण 6 के प्रमाण कम मिले।
कोह्लबर्ग की तुलना के लिए जीन पियाजे का संज्ञानात्मक सिद्धांत, वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास सिद्धांत और बाण्डुरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत पढ़ें। कोह्लबर्ग के बारे में और जानकारी हिंदी विकिपीडिया पर है।
📚 यह भी पढ़ें
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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प्रश्न 1. नैतिक विकास के छह चरणों का सिद्धांत किसने दिया?
(1) जीन पियाजे
(2) लॉरेंस कोह्लबर्ग
(3) वाइगोत्सकी
(4) बाण्डुरा
(2) लॉरेंस कोह्लबर्ग
(3) वाइगोत्सकी
(4) बाण्डुरा
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उत्तर: (2) लॉरेंस कोह्लबर्ग
कोह्लबर्ग ने नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण बताए।
कोह्लबर्ग ने नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण बताए।
प्रश्न 2. “अच्छा लड़का-अच्छी लड़की” की प्रवृत्ति कोह्लबर्ग के किस चरण में होती है?
(1) चरण 1
(2) चरण 2
(3) चरण 3
(4) चरण 5
(2) चरण 2
(3) चरण 3
(4) चरण 5
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (3) चरण 3
यह परंपरागत स्तर का पहला चरण है, जिसमें बच्चा दूसरों की स्वीकृति और प्रशंसा चाहता है।
यह परंपरागत स्तर का पहला चरण है, जिसमें बच्चा दूसरों की स्वीकृति और प्रशंसा चाहता है।
प्रश्न 3. कोह्लबर्ग के सिद्धांत के बारे में कथन:
(A) इसमें 3 स्तर और 6 चरण हैं।
(B) पूर्व-परंपरागत स्तर में दंड और पुरस्कार का प्रभाव होता है।
(C) पश्च-परंपरागत स्तर में नैतिकता पर आंतरिक नियंत्रण रहता है।
(D) यह सिद्धांत जन्मजात नैतिकता मानता है।
(A) इसमें 3 स्तर और 6 चरण हैं।
(B) पूर्व-परंपरागत स्तर में दंड और पुरस्कार का प्रभाव होता है।
(C) पश्च-परंपरागत स्तर में नैतिकता पर आंतरिक नियंत्रण रहता है।
(D) यह सिद्धांत जन्मजात नैतिकता मानता है।
(1) केवल A और B
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
(2) केवल A, B और C
(3) केवल B, C और D
(4) A, B, C और D सभी
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उत्तर: (2) केवल A, B और C
D गलत है; कोह्लबर्ग के अनुसार नैतिकता सामाजिक परिवेश से सीखी जाती है।
D गलत है; कोह्लबर्ग के अनुसार नैतिकता सामाजिक परिवेश से सीखी जाती है।
प्रश्न 4. कथन I: कोह्लबर्ग के अनुसार पूर्व-परंपरागत स्तर में नैतिकता पर बाह्य नियंत्रण रहता है।
कथन II: इस स्तर पर बच्चा सही-गलत का निर्णय दंड और पुरस्कार के आधार पर करता है।
कथन II: इस स्तर पर बच्चा सही-गलत का निर्णय दंड और पुरस्कार के आधार पर करता है।
(1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
(2) दोनों सही, पर II, I की सही व्याख्या नहीं है
(3) I सही, II गलत
(4) I गलत, II सही
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) दोनों सही और II, I की सही व्याख्या है
निर्णय का आधार बाहरी दंड/पुरस्कार होने से ही नियंत्रण बाह्य कहलाता है।
निर्णय का आधार बाहरी दंड/पुरस्कार होने से ही नियंत्रण बाह्य कहलाता है।
प्रश्न 5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
| सूची I (चरण) | सूची II (आधार) |
|---|---|
| (A) चरण 1 | (I) दंड से बचना |
| (B) चरण 2 | (II) आपसी लेन-देन |
| (C) चरण 4 | (III) कानून व सामाजिक व्यवस्था |
| (D) चरण 6 | (IV) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत |
(1) A-I, B-II, C-III, D-IV
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
(2) A-II, B-I, C-III, D-IV
(3) A-I, B-II, C-IV, D-III
(4) A-IV, B-III, C-II, D-I
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) A-I, B-II, C-III, D-IV
चरण 1 दंड-केंद्रित, चरण 2 विनिमय, चरण 4 कानून-व्यवस्था और चरण 6 सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित है।
चरण 1 दंड-केंद्रित, चरण 2 विनिमय, चरण 4 कानून-व्यवस्था और चरण 6 सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित है।
प्रश्न 6. कोह्लबर्ग के तीन स्तरों को सही क्रम में लगाइए:
(A) पश्च-परंपरागत
(B) पूर्व-परंपरागत
(C) परंपरागत
(A) पश्च-परंपरागत
(B) पूर्व-परंपरागत
(C) परंपरागत
(1) B, C, A
(2) B, A, C
(3) C, B, A
(4) A, C, B
(2) B, A, C
(3) C, B, A
(4) A, C, B
👉 उत्तर देखें
उत्तर: (1) B, C, A
पहले पूर्व-परंपरागत (4-10 वर्ष), फिर परंपरागत (10-13 वर्ष), फिर पश्च-परंपरागत (13+ वर्ष)।
पहले पूर्व-परंपरागत (4-10 वर्ष), फिर परंपरागत (10-13 वर्ष), फिर पश्च-परंपरागत (13+ वर्ष)।
❓ कोह्लबर्ग के सिद्धांत पर सवाल-जवाब (FAQ)
1. कोह्लबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत क्या है?
यह सिद्धांत बताता है कि नैतिक चिंतन तीन स्तरों (पूर्व-परंपरागत, परंपरागत, पश्च-परंपरागत) और छह चरणों में विकसित होता है।
2. कोह्लबर्ग ने नैतिकता का अध्ययन कैसे किया?
उन्होंने बच्चों और किशोरों को हाइंज़ की दुविधा जैसी कहानियाँ सुनाकर उनके तर्कों का विश्लेषण किया।
3. पूर्व-परंपरागत स्तर में नैतिकता का आधार क्या है?
दंड, पुरस्कार और अपना हित, यानी बाह्य नियंत्रण।
4. कोह्लबर्ग और पियाजे के नैतिक सिद्धांत में क्या संबंध है?
कोह्लबर्ग का सिद्धांत पियाजे के नैतिक विकास सिद्धांत का विस्तार माना जाता है, पर उसमें चरण अधिक और आयु-सीमा बड़ी है।
5. कोह्लबर्ग के सिद्धांत की मुख्य आलोचना क्या है?
अध्ययन मुख्यतः लड़कों पर हुआ, सिद्धांत पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है और गिलिगन ने इसमें देखभाल-आधारित नैतिकता की उपेक्षा बताई।

केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)। हिंदी साहित्य चैनल के संचालक।
