भारत का भौतिक विभाग

भारत का भौतिक विभाग(Physical department of india)



⇒ भारत पूर्णतया उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। जिसकी मुख्य भूमि 8 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश से 37 डिग्री 6 मिनट उत्तरी अक्षांशों के मध्य तथा 68 डिग्री 7 मिनट पूर्वी देशान्तर से 97 डिग्री 25 मिनट पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है।


⇒ उत्तर से दक्षिण तक यह 3214 किमी लम्बा तथा पूर्व से पश्चिम तक 2933 किमी चैङाई में फैला है। भारत की पूर्व-पश्चिम चैङाई, उत्तर-दक्षिण लम्बाई से 281 किमी. कम है।


⇒ भारत का क्षेत्रफल 3287263 वर्ग किमी है। क्षेत्रफल की दृष्टि से रूस, कनाडा, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, आस्ट्रेलिया के बाद सातवां बङा देश है तथा जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा बङा देश है। भारत विश्व का 2.4 प्रतिशत क्षेत्रफल एवं 17.2 प्रतिशत जनसंख्या लिए हुए है।


⇒ भारत की समस्त स्थलीय सीमा 15,200 किमी है तथा लक्षद्वीप व अण्डमान निकोबार द्वीप समूह सहित सागर तट की कुल लम्बाई 7516.6 किमी है। मुख्य स्थल की तटरेखा 6100 किमी तथा टापुओं की 1416.6 किमी है।


⇒ भारत की अन्तर्राष्ट्रीय जलीय सीमा 12 नाॅटिकल मील (21.9 कि. मी.) दूरी तक है।


⇒ इसकी मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिन्दु कन्याकुमारी (केप कोमोरियन) 80 4’ उत्तरी अक्षांश तथा उत्तरतम बिन्दु इंदिरा काॅल (जम्मू-कश्मीर) व दक्षिणवर्ती भाग इंदिरा प्वाइंट है। जो 6 डिग्री 45 मिनट उत्तरी अक्षांश पर अवस्थित है।


⇒ भारत का मानक समय 821/2 डिग्री पूर्वी देशांतर से माना गया है। जो इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर के समीप नैनी नामक स्थान से गुजरती है। जो कि उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उङीसा, आंध्रप्रदेश। पांच राज्यों से गुजरती है।


⇒ भारत उत्तर में हिमालय से घिरा हुआ है तथा दक्षिण की ओर हिंद महासागर से घिरा हुआ है। पूर्व में बंगाल की खाङी तथा पश्चिम में अरब सागर स्थित है।

 

भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा(International border of india)


देश सीमा पर अवस्थित भारतीय राज्य


बांग्लादेश (5) पं. बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
नेपाल (5) उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, पं.बंगाल, सिक्किम
चीन (5) जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश
पाकिस्तान (4) गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू कश्मीर]


भूटान (4) सिक्किम, पं. बंगाल, असम, अरूणाचल प्रदेश
म्यांमार (4) अरूणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम
अफगानिस्तान (1) जम्मू कश्मीर (पाक अधिकृत)


⇒पङौसी देशों के साथ भारतीय सीमा की लम्बाई –
1. बांग्लादेश – 4096 किमी. सबसे ज्यादा सीमा
2. चीन – 3917 किमी.
3. पाकिस्तान – 3310 किमी.
4. नेपाल – 1752 किमी.
5. म्यांमार -’ 1458 किमी.
6. भूटान – 587 किमी.
7. अफगानिस्तान – 80 किमी.


कुल स्थलीय सीमा – 15200 कि.मी.


⇒ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार आदि देशों से भारत घिरा हुआ है।
⇒ भारत एवं चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा को मैकमोहन रेखा कहते है।
⇒ भारत एवं पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा रेडक्लिफ सीमा रेखा है।


⇒ पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के बीच की सीमा रेखा डुरण्ड रेखा है।
⇒ सबसे लम्बी तटरेखा गुजरात की है। इसके पश्चात सीमान्ध्र का स्थान आता है।
⇒ अफगानिस्तान की सीमा एकमात्र जम्मू-कश्मीर राज्य को छूती है।


⇒ कर्क रेखा भारत के 8 राज्यों गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पं.बंगाल, त्रिपुरा व मिजोरम से गुजरती है।
⇒ भारत के 9 राज्यों को समुद्र छूता है। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, सीमान्ध्र, उङीसा, पं. बंगाल।


⇒ पूर्वोतर के सात राज्यों – अरूणाचलप्रदेश, असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा को सेवन सिस्टर्स (सात बहनें) के नाम से पुकारा जाता है।


⇒ असम को सेवन सिस्टर्स या सात बहिनों वाले राज्य के नाम से पुकारा जाता है।

 

भौतिक विभाजन


भारत को पांच भौतिक विभागों में विभक्त किया गया है –


1. उत्तरी पर्वतीय प्रदेश या हिमालय पर्वत समूह।
2. उत्तरी भारत का विशाल मैदान या सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र का मैदान।
3. थार का मरूस्थल।
4. दक्षिण का पठार या प्रायद्वीपीय पठार।
5. तटीय मैदान।
5. द्वीप समूह।

 

1. उत्तरी पर्वतीय प्रदेश


यह भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह विश्व का सबसे नवीनतम ऊँचा एवं वलित पर्वतमाला है। इसका विस्तार सिंधु नदी मोङ (नंगा पर्वत) से पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के मोङ (नामचाबरवा पर्वत) तक है।


⇒ भारत के उत्तर पश्चिम में हिन्दूकुश पर्वत से शुरू होकर उत्तर पूर्व में म्यामांर तक तलवार की आकृति, धनुषाकार, चापाकार आकृति में हिमालय पर्वत फैला हुआ है। इसे उत्तरी पर्वतीय प्रदेश कहते है।


⇒ हिमालय पर्वत भारत में कश्मीर से अरूणाचलप्रदेश तक 2400 किमी. की लम्बाई में , लगभग 250 किमी. चैङाई में फैले हुए है और इसकी औसत ऊँचाई 6000 मी. है।


⇒ हिमालय पर्वत की उत्पत्ति 7 करोङ वर्ष पूर्व मध्यजीवी महाकाल्प में हुई थी। जब इसके स्थान पर टेथीस नामक भूअभिनति थी। टेथीस सागर के उत्तर में अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग में गौण्डवानालैण्ड भाग स्थित थे।


⇒ मध्यजीवी महाकल्प में दोनों भू-खण्ड एक-दूसरे के निकट आए, जिस कारण टेथिस सागर के तलछट में संपीडन हुआ तथा वलन पङने से वलित पर्वत श्रेणी हिमालय का निर्माण हुआ।


⇒ हिमालय के उत्तर में हिन्दूकुश पर्वत के पास संसार का सबसे ऊँचा पठार पामीर का पठार स्थित है। जिसे दुनिया की छत कहते है।


⇒ तिब्बत का पठार संसार का सबसे बङा पठार है।


⇒ चीन में तिब्बत के पठार के पास से ब्रह्मपुत्र नदी निकलती है। जिसे चीन में सांग्पो के नाम से जाना जाता है।


⇒ ब्रह्मपुत्र नदी भारत में अरूणाचलप्रदेश राज्य के सादिया नामक स्थान से प्रवेश करती है तथा पश्चिम बंगाल में इसमें गंगा और यमुना नदियाँ आकर मिलती है तथा ये संसार का सबसे बङा डेल्टा सुन्दर वन डेल्टा (पं. बंगाल) का निर्माण करती है।


⇒ ब्रह्मपुत्र नदी में संसार का सबसे बङा नदी द्वीप माजुली या माजोली पाया जाता है।


⇒ उत्पत्ति व निर्माण काल के आधार पर हिमालय का वर्गीकरण –


⇒इस उत्तरी पर्वतीय प्रदेश को निम्न चार भागों में बांटा गया है –
1. ट्रांस हिमालय
2. महान हिमालय/वृहद् हिमालय/हिमाद्री/सर्वाेच्च हिमालय
3. मध्य/लघु हिमालय
4. उप हिमालय/शिवालिक/बाह्य हिमालय


1. ट्रांस हिमालय


इसके अंतर्गत कराकोरम, कैलाश, जास्कर एवं लद्दाख पर्वत श्रेणियां आती है।
⇒ जिनका निर्माण हिमालय से भी पहले हो चुका था। ये श्रेणियां विशाल हिमालय के उत्तर में स्थित है।


⇒ इसका अधिकांश भाग तिब्बत में है। यह सिंधु व ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्थल है।
⇒ कराकोरम श्रेणी को उच्च एशिया की रीढ़ कहा जाता है।


⇒ भारत की सबसे ऊँची चोटी  k 2 या गाडिविन आस्टिन (पाक अधिकृत कश्मीर) (8,611 मी.) इसी में स्थित है।


⇒ सियाचिन ग्लेशियर (72 किमी. भारत का सबसे बङा ग्लेशियर) है। कराकोरम श्रेणी अपने पश्चिम की ओर पामीर की गांठ में मिल जाती है।


2. वृहद् हिमालय/हिमाद्री/सर्वाेच्च हिमालय


यह पश्चिम में सिंधु नदी से पूर्व में ब्रह्म पुत्र नदी तक 2400 किमी. लम्बाई में फैली हुई है।
⇒ यह सबसे ऊंची, लगातार फैली आंतरिक श्रेणी है।


⇒ यह नंगा पर्वत (जम्मू-कश्मीर) से लेकर नामचाबरवा पर्वत (अरूणाचल प्रदेश) तक एक पर्वतीय दीवार के रूप में फैली है। यह मध्य भाग में सबसे ऊंची है जो प्रमुखतः नेपाल में विस्तृत है। इसकी सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट है। (8,850 मी.)।


⇒ अन्य प्रमुख चोटियाँ कंचनजंगा (8,595 मी.) मकालू (8,481 मी.) नंदा देवी (7,817 मी.), त्रिशूल (7,120 मी.) बद्रीनाथ (7,138 मी.), केदारनाथ (6,945 मी.) है।


⇒ एवरेस्ट चोटी को तिब्बती भाषा में चोमोलुंगमा कहा जाता है।


⇒ वृहद् हिमालय में अनेक दर्रें भी मिलते है।


जैसे – कश्मीर में बुर्जिल तथा जोजिला,


⇒ हिमाचल प्रदेश में रोहतांग, शिपकिला तथा बारा लाचाला उत्तराखण्ड में थागला, नीति और लीपूलेख तथा सिक्किम में नाथुला एवं जीपला दर्रें महत्त्वपूर्ण है।


⇒ हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रें कुल्लु को लाहौल और स्पिति घाटी जोङता है।


3. मध्य लघु हिमालय


पीरपंजाल मध्य हिमालय की सबसे लम्बी श्रेणी है। यह कश्मीर राज्य में फैली हुई है।
⇒ धौलाधर श्रेणी में शिमला स्थित है, जो कि मध्य या लघु हिमालय का भाग है।
⇒ इस श्रेणी में पीरपंजाल तथा बनिहाल दो दर्रे हैै। बनिहाल दर्रे से होकर जम्मू से कश्मीर घाटी के लिए मार्ग जाता है।


4. उप हिमालय/शिवालिक/बाह्य हिमालय


यह हिमालय की सबसे बाहरी, नवीनतम श्रेणी है।
⇒ इसकी औसत ऊँचाई 900 से 1200 मीटर है।


⇒ यह पोतवार बेसिन के दक्षिण से आरंभ होकर पूर्व की ओर कोसी नदी तक फैली है।
⇒ जम्मू में यह जम्मू की पहाङियों तथा अरूणाचल प्रदेश में डाफला, मिरी, अबोर, मिशमी की पहाङियों के रूप में जानी जाती है।


⇒ शिवालिक तथा मध्य हिमालय के बीच अनेक अनुर्देध्र्य घाटियाँ पाई जाती है। जिन्हें पश्चिमी एवं मध्य भाग में दून तथा पूर्व में द्वार कहा जाता है। जैसे – देहरादून, हरिद्वार।


⇒ विशेष ध्यातव्य – उत्तर से दक्षिण में पर्वत श्रेणियों/पहाङियों का क्रम – 1. काराकोरम 2. लद्दाख 3. जास्कर 4. पीरपंजाल 5. धौलाधर 6. शिवालिक।


⇒ पश्चिम से पूर्व दिशा में पर्वत श्रेणियों/पहाङियों का क्रम – 1. गारो 2. खासी 3.जयंती  4. मिकिर हिल।

 

हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण


प्रादेशिक दृष्टि से हिमालय पर्वतमाला को चार भागों में विभक्त किया गया है। सिडनी बुर्राड ने नदी घाटी द्वारा विभाजित क्षेत्रों के आधार पर इनका वर्गीकरण किया है।


1. पंजाब हिमालय


पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में सतलज नदी के बीच का 560 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र जिसमें जम्मू-कश्मीर एवं हिमालय प्रदेश का क्षेत्र आता है।
⇒ इसमें काराकोरस, लद्दाख, जास्कर, पीरपंजाल एवं धौलाधार श्रेणियाँ शामिल है। यहाँ पर पीरपंजाल, जोजिला, बुर्जिल रोहतांग, बनिहाल प्रमुख दर्रे है।


2. कुमाऊँ हिमालय


पश्चिम में सतलज नदी से लेकर पूर्व में काली नदी (यह भारत नेपाल सीमा बनाती है ) के बीच 320 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र जिसमें उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र आते हैं।


⇒ इसमें नंदादेवी (7817 मी.), कामेत (7756 मी.), त्रिशूल (7140 मी.), बद्रीनाथ (7138 मी.) एवं कैलाश पर्वत (7614 मी.-तिब्बत में ) जैसी चोटियाँ है एवं प्रमुख तीर्थ स्थल गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) एवं कैलाश मानसरोवर (तिब्बत) अवस्थित है।


⇒ गंगा एवं यमुना नदियों का उद्गम कुमायूं हिमालय में है।


3. नेपाल हिमालय


पश्चिम में काली नदी से लेकर पूर्व में तिस्ता नदी के बीच का 800 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र (सबसे लम्बा क्षैतिज विभाग) है जिसमें लगभग पूरे नेपाल के विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत क्षेत्र शामिल किये जाते है।


⇒ दुनिया की सबसे ऊँची चोटियाँ जैसे एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालु, धौलगिरी, अन्नपूर्णा आदि इसी भाग में अवस्थित है


4. असम/पूर्वोत्तर हिमालय


पश्चिम में तिस्ता नदी से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच 720 किलो. लम्बा क्षेत्र असोम/पूर्वोतर हिमालय कहलाता है।


⇒ इसमें भूटान एवं भारत के सिक्किम तथा अरूणांचल प्रदेश के क्षेत्र शामिल है।


भारत के प्रमुख दर्रे


जोजिला दर्रा – जम्मू-कश्मीर, रोहतांग दर्रा – हिमाचल प्रदेश, शिपकीला – हिमाचल प्रदेश, नाथुला – सिक्किम (भारत से लहासा जाने का मार्ग, यहां से भारत-चीन व्यापार शुरू किया गया है।)


⇒ बोमडिया दर्रा – अरूणाचलप्रदेश।
⇒ पाकिस्तान के दर्रे – गोमल, खेबर, बोलन, मकरान।

 

2. उत्तर का विशाल मैदान/सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र का मैदान


यह हिमालय एवं प्रायद्वीपीय पठार के बीच सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदियों के अवसादों से निर्मित मैदान है जो 7 लाख वर्ग किमी क्षेत्र पर विस्तृत है। गंगा व सिंधु नदियों के मुहाने के बीच पूर्व-पश्चिम दिशा में इसकी लम्बाई लगभग 3200 किमी है तथा चैङाई 150 से 300 किमी है। यह मैदान पश्चिम से पूर्व की ओर सँकरा होता जाता है।


उत्तर के विशाल मैदान को निम्रलिखित क्षैतिज (प्रादेशिक) विभागों बांटा गया है।
1. पंजाब हरियाणा का मैदान
2. गंगा का मैदान
।. ऊपरी गंगा का मैदान
।।. मध्य गंगा का मैदान
।।।. निम्र गंगा का मैदान
3. ब्रह्मपुत्र का मैदान
4. गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा


1. पंजाब हरियाणा मैदान


 इसका विस्तार पंजाब व हरियाणा के साथ दिल्ली तक है यह मैदान यमुना व रावी नदी के बीच स्थित है तथा मुख्य बांगर से निर्मित है। नदियों के किनारे पाई जाने वाली बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की संकटी पट्टी को बेट कहा जाता है। दो नदियों के मध्यवर्ती भाग को दोआब कहा जाता है उत्तरी मैदान में निम्र दोआब स्थित है।
1. सिंधु – झेलम – सिंधु सरोवर दोआब
2. चिनाब – झेलम – चैज दोआब
3. रावी – चिनाब – रचना दोआब
4. व्यास – रावी – बारी दोआब
5. व्यास – सतलज – बिस्त दोआब


2. गंगा का मैदान


 इन मैदानों का विस्तार पंजाब मैदानों के पूर्व में उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक लगभग 3.75 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में पाया जाता है।
 इन मैदानों का निर्माण गंगा, यमुना, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी आदि नदियों द्वारा हिमालयी क्षेत्र से लाये गये अवसादों के जमाव से हुआ है।


⇒ प्रायद्वीपीय भारत से निकलकर चम्बल, बेतवा, सोन, केन आदि नदियाँ भी गंगा नदी तंत्र में आकर मिलती हैं।


इन नदियों द्वारा लाए गये अवसादों के जमाव की भी इन मैदानों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
⇒ इन मैदानों का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व दिशा में है।


इस विस्तृत मैदानी भाग को तीन उपभागों में बाँटा जाता है।


1. ऊपरी गंगा का मैदान
2. मध्य गंगा का मैदान
3. निचले गंगा का मैदान


(। ) ऊपरी गंगा का मैदान – इस मैदान की पश्चिमी सीमा यमुना नदी द्वारा बनाई जाती है और इस मैदान की पूर्वी सीमा 100 मीटर वाली समोच्च रेखा के द्वारा बनाई जाती है। इसमें गंगा, रामगंगा, यमुना, शारदा, गोमती, घाघरा नदियाँ बहती है।
(।। ) मध्य गंगा का मैदान – इस का विस्तार ऊपरी गंगा मैदान के पूर्व में पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार क्षेत्रों में है। यहां पर घाघरा, गंडक, कोसी, सोन नदियां प्रवाहित होती है।
(।।। ) निचले गंगा का मैदान – इसका विस्तार बिहार में पूर्णिया जिले की किशनगंज तहसील से पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों तक है इसमें सुन्दरवन डेल्टा स्थित है।


3. ब्रह्मपुत्र का मैदान


 इसे ब्रह्मपुत्र घाटी अथवा आसाम घाटी अथवा आसाम मैदान कहते है यह हिमालय पर्वत एवं मेघालय के पठार के बीच स्थित एक लम्बा संकरा मैदान है। और इसमें ब्रह्मपुत्र नदी के बीच माजूली द्वीप विश्व का सबसे बङा नदी द्वीप स्थित है।


4. गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा


 यह अत्यंत समतल क्षेत्र है तथा समुद्रतल से बहुत कम ऊँचा है। इस क्षेत्र में ज्वार का जल फैल जाता है। अतः यह भाग दलदली रहता है।


⇒ ज्वारीय जल की दूब में न आने वाली उच्च भूमि को चर कहते है। जिस पर बस्तियां बस्सी हुई है तथा अपेक्षाकृत निम्न भूमि जो कि जल से ढकी है, को बिल कहते है। जिसमें जूट धोने के लिए पर्याप्त जल मिलता है।


उत्तर के विशाल मैदान का उपवर्गीकरण निम्र है –


1. भाबर
गिरिपदीय क्षेत्रों में बनती है।
⇒ यह शिवालिक के सहारे सिंधु नदी से तिस्ता नदी तक पाया जाता है।
⇒ यह गंगा के मैदान की उत्तरी सीमा बनाता है।
⇒ नदियों बङी मात्रा में पत्थर, कंकङ, बजरी आदि लाकर जमा करती है।
⇒ इस क्षेत्र में पहुंचकर छोटी-छोटी नदियाँ अदृश्य हो जाती है।


2. तराई प्रदेश


भाबर की लुप्त नदियाँ भूतल पर प्रकट हो जाती है।
⇒ अधिकांश भाग दलदली है।
⇒ अधिक दलदल व नमी के कारण सघन वन पाए जाते हैं।
⇒ इसकी रचना बारीक कंकङ पत्थर, रेत और चिकनी मिट्टी से हुई है।


3. बांगर (भांगर)


तराई के दक्षिण में प्राचीन तलछट से निर्मित मेखला बांगर कहलाती है।
⇒ यहां नदियों के बाढ़ का पानी नहीं पहंुच पाता है।
⇒ यह पुरानी जलोढ़ मृदा से बना है।
⇒ सतलज मैदान व गंगा के ऊपरी मैदान में पाया जाता है।
⇒ पंजाब व उत्तर प्रदेश में विस्तार अधिक है।
⇒ चूना युक्त कंकरीली मृदा पायी जाती है, जिसमें आर्द्रता कम पायी जाती है।
⇒ कम उपजाऊ मैदान है।


4. खादर प्रदेश


यह भाग जहाँ प्रतिवर्ष नदियों की बाढ़ का जल पहुँचता है।
⇒ नवीन जलोढ़क क्षेत्र है।
⇒ अधिक उपजाऊ मैदान है।
⇒ पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल में खादर की अधिकता है।
⇒ नवीन काँप मृदा से निर्मित होने से कृषि उपजाऊ है। भूमिगत जल का उत्तम संग्राहक है।


5. रेह


बांगर प्रदेश के जिन भागों में अधिक सिंचाई की जाती है उनमें कहीं-कहीं भूमि पर नमकीन सफेद परत जम जाती है, जिसे रेह या कल्लर कहते है।
⇒ उत्तर प्रदेश व हरियाणा के शुष्क भागों में अधिक मिलती है।


6. भूङ


बांगर प्रदेश में कुछ भागों में अपक्षय के कारण ऊपर की मुलायम मृदा नष्ट हो गई है। वहां अब कंकरीली भूमि मिलती है, इसे भूङ कहते है।
⇒ गंगा व रामगंगा नदियों के प्रवाह क्षेत्र में अधिक मिलते है।


7. डेल्टाई प्रदेश


गंगा व ब्रह्मपुत्र नदियां डेल्टा का निर्माण करती है – सुन्दरवन डेल्टा
⇒ इसका पुराना भाग भारत में तथा नया भाग बांग्लादेश में है।

 

3. थार का मरूस्थल


 उत्तर भारत के महान् मैदानों के सबसे पश्चिमी क्षेत्रों में थार अथवा भारत के महान् मरूस्थलीय मैदान है। इस क्षेत्र में प्राचीन काल में टेथिस नामक सागर था तथा वर्तमान में यहां पर टेथिस के अवशेष के रूप में खारे पानी की झीले सांभर, पंचभद्रा, लूनकरणसर, डीडवाना (नागौर) आदि झीले स्थित है।


⇒ जिनमें भारत में राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में 650 किमी. लम्बे 250-300 किमी. चैङे मैदानी क्षेत्र को शामिल किया जाता है।


⇒ जिसका क्षेत्र भारत में लगभग 1.75 लाख वर्ग किमी. है। इसका 2/3 भाग राजस्थान में विस्तृत है एवं 1/2 भाग इसके आसपास के पङौसी राज्यों गुजरात, हरियाणा एवं पजाब के क्षेत्रों में विस्तृत है।


⇒ इन मैदानों की औसत ऊँचाई लगभग 325 मीटर है।
⇒ इस क्षेत्र में विस्तृत रेत के मैदानों के बीच निस, सिस्ट एवं ग्रेनाइट चट्टानों के धरातल पर विस्तार से यह साबित होता है कि भूगर्भिक दृष्टि से यह क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत का भाग है एवं केवल सतह पर जमाव मैदानों का विस्तार है।


⇒ 25 सेमी. वर्षा रेखा के पश्चिम में शुष्क मरूस्थलीय क्षेत्र में बालूकास्तूपों की प्रधानता पायी जाती है।
⇒ यहाँ चलायमान बालूकास्तूपों को स्थानीय भाषा में धारियन कहा जाता है।
⇒ राजस्थान में अरावली के पश्चिम में 25 सेमी. औसत वर्षा तक वाले अरावली से सटे हुए अर्धमरूस्थलीय क्षेत्र को राजस्थान बांगङ मैदान के रूप में जाना जाता है।


⇒ यह क्षेत्र अनेकों छोटी-छोटी ऋतुवत नदियों द्वारा सिंचित है जिनका उद्गम अरावली पहाङियों से होता है।
⇒ ये कुछ क्षेत्रों में उर्वर मैदान बनाती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में रोही कहते हैं। इन टुकङों में अच्छी कृषि पैदावार प्राप्त की जाती है।


⇒ लूनी नदी बेसिन के उत्तर में इन मैदानों को थली अथवा रेतीले मैदान कहते हैं।
⇒ यह क्षेत्र आंतरिक जल प्रवाह वाला क्षेत्र है तथा यह 50 सेमी. की वर्षा रेखा के द्वारा अरावली पर्वत शृंखला से पश्चिम की ओर अलग होता है।

 

4. दक्षिण का पठार या प्रायद्वीपीय पठार


यह देश का सबसे बङा भौतिक विभाग है। इसका क्षेत्रफल 16 लाख वर्ग किमी. है।
 ये गोंडवाणा लैंड का ही एक भाग है।


 यह त्रिभुजाकार आकृति में फैला है और इसका निर्माण प्राचीन कठोर आग्नेय शैलों द्वारा हुआ है।
 दक्षिण में पठार में अनेक जलप्रपात और तालाबों की अधिकता है। यहां उपजाऊ काली मिट्टी पाई जाती है।


 पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले समतल उच्च भागों पर लेटेराइट मिट्टी का निर्माण हुआ है। जिन पर मसालों, चाय, काॅफी आदि की खेती संभव हो पाती है।


 इस भाग में प्रमुख भू-भाग निम्न है –


1. पठार एवं मैदानी भाग


(1) मालवा का पठार – यह पठार मध्यप्रदेश के उत्तर-पश्चिम भाग में राजस्थान मध्यप्रदेश की सीमा पर फैला है इस पठार का ढाल गंगा घाटी की ओर है। इस पठारी भाग में चम्बल नदी द्वारा निर्मित बीहङ अत्यधिक विस्तृत तथा गहरे है।


(2) मारवाङ उच्च भूमियाँ – इस का विस्तार अरावली के पूर्व में पूर्वी राजस्थान में इस क्षेत्र की ओर ऊँचाई 250 से 500 मीटर है और क्षेत्र बनास नदी तंत्र का क्षेत्र है।


(3) केन्द्रीय/मध्य उच्च भूमियाँ – मध्य भारत के पठार के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र मारवाङ उच्च भूमियों के पूर्व में है और इसमें चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ पार्वती इस क्षेत्र में अपवाह बेसिन बनाती है इस प्रदेश में उत्तरी भाग में चम्बल के बीहङ अवस्थित है।


(4) बुंदेलखण्ड का पठार – यह पठार मुख्यतः ग्वालियर (मध्यप्रदेश), झांसी, ललितपुर (उत्तर प्रदेश) आदि जिलों में फैला है। इसमें ग्रेनाइट व नीस की चट्टानें मुख्य रूप से है। बुदंेलखंड का पठार बलुआ पत्थर, चूना पत्थर एवं ग्रेनाइट से निर्मित है।


(5) बघेलखण्ड पठार – यह मैकाल की पहाङियों के पूर्व में ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर तथा चूना पत्थर से निर्मित उच्च भूमियाँ है। यह सोन एवं महानदी के बीच में जल विभाजक के कार्य करता है।


(6) छोटा नागपुर का पठार – इस पठार को भारत का रूहर कहा जाता है जो मुख्यतः झारखण्ड राज्य में अवस्थित है। यह ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों से निर्मित है।


(7) मेघालय का पठार – इस पठार की चट्टानें छोटा नागपुर के पठार की चट्टानों से समानता रखती है। प्रारम्भ में यह पठार मुख्य पठार से सम्बद्ध था।


(8) दक्कन का पठार – यह पठार लगभग 5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है। यह बेसाल्ट निर्मित पठार है जिसमें लावा की अधिकतम गहराई 2000 मीटर तक पाई गयी है। यह ताप्ती नदी के दक्षिण में त्रिभुजाकार रूप में फैला हुआ है।


(9) तेलंगाना का पठार – यह पठार गोदावरी नदी द्वारा दो भागों में विभाजित है। उत्तरी भाग पहाङी तथा वनाच्छादित है जबकि दक्षिणी भाग पर उर्मिल मैदान पाए जाते हैं।


(10) कर्नाटक का पठार – 600 मीटर ऊँचाई की समोच्च रेखा द्वारा यह पठार दो भागों में विभक्त है। उत्तरी भाग पर कृष्णा व तुंगभद्रा नदियाँ प्रवाहित होती है। दक्षिणी भाग को मैसूर का पठार कहते हैं। लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध बाबाबदून की पहाङी इसी पठार पर स्थित है।


 गारो – खासी जयन्तिया पहाङियाँ दक्कन पठार का भाग है।

2. पहाङी/पर्वतीय क्षेत्र


प्रायद्वीपीय भारत में पहाङी क्षेत्र मूलतः अवशिष्ट पहाङियों वाले क्षेत्र है एवं कहीं-कहीं ब्लाॅक पर्वतों का विस्तार भी पाया जाता है।


(1) अरावली पर्वत – यह श्रेणी दिल्ली से पालनपुर (गुजरात) तक उत्तर पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 800 किमी. तक विस्तृत है। यह एक अवशिष्ट पर्वत है। गुरुशिखर इसकी सर्वोच्च चोटी है, जिसकी ऊँचाई 1722 मीटर हैं अरावली पर्वत को उदयपुर के निकट जरगा पहाङी, अलवर के निकट हर्षनाथ तथा दिल्ली के निकट दिल्ली की पहाङियों के नाम से जाना जाता है। इसके पश्चिम की ओर माही नदी तथा पूर्व की ओर से बनास नदी निकलती है।


(2) विंध्याचल पर्वत – यह पर्वत श्रेणी गुजरात से प्रारम्भ होकर मध्यप्रदेश, बुंदेलखण्ड, उत्तरप्रदेश होती हुई बिहार के सहसाराम तक फैली हुई है। यह पर्वत गंगा के प्रवाह प्रदेश को पृथक करता है। यह पर्वतमाला उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है।


(3) सतपुङा पर्वत श्रेणी – यह पर्वत श्रेणी पश्चिम में राजपिपला की पहाङियों से प्रारम्भ होकर महादेव एवं मैकाल पहाङियों के रूप में छोटा नागपुर पठार तक विस्तृत है। इस पर्वत श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ है जो महादेव पर्वत पर स्थित है। मैकाल पहाङी का सर्वोच्च शिखर अमरकंटक है जहां से सोन नर्मदा नदियाँ निकलती है।


(4) पश्चिमी घाट/सह्याद्रि पहाङियाँ – यह वास्तविक पर्वत श्रेणी नहीं, बल्कि प्रायद्वीपीय पठार का अपरदित खडा कगार है। यह तापी नदी के मुहाने से लेकर कुमारी अन्तरीप तक लगभग 1600 किमी की लम्बाई में विस्तृत है। सह्नयाद्रि प्रायद्वीप जल विभाजक का निर्माण करता है। शरावती नदी पर स्थित गरसोप्पा (जोग जलप्रपात) भारत का सबसे ऊँचा जलप्रात है।

कुद्रेमुख (1892 मीटर) पुण्यगिरि (1714 मीटर) कलसुबई (1646 मीटर) सल्हर (1567 मीटर) महाबलेश्वर (1438 मीटर) तथा हरिश्चन्द्र (1424 मीटर) पश्चिमी घाट की महत्त्वपूर्ण चोटियाँ है। पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट के मिलन स्थल पर नीलगिरी की पहाङी स्थित है, जिसकी सर्वोच्च चोटी दोदाबेटा (2637 मीटर) है।

नीलगिरी के दक्षिण में अन्नामलाई की पहाङी है जो सागवान के वनों के लिए प्रसिद्ध है। ऊटी नामक पर्यटन स्थल नीलगिरी पहाङी पर स्थित है। दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाइमुडी (2695 मीटर) अन्नामलाई की पहाङी पर स्थित है।

अन्नामलाई के दक्षिण में काॅर्डमम (इलामल्लाई) की पहाङियों है जो इलायची की दृष्टि के लिए विख्यात है। दक्षिण भारत की पहाङियाँ रबङ, चाय एवं कहवा की कृषि के लिए प्रसिद्ध है।

पश्चिमी घाट पर्वत में चार महत्त्वपूर्ण दर्रे है।


(। ) थालघाट – ऊँचाई 580 मीटर नासिक एवं मुम्बई के बीच का सम्पर्क मार्ग।
(।। ) भोर घाट – ऊँचाई 520 मीटर मुम्बई एवं पुणे के बीच का सम्पर्क मार्ग।
(।।। ) पाल घाट – ऊँचाई 530 मीटर कोयम्बटूर एवं कोचीन के बीच का सम्पर्क मार्ग।
(।अ) सिनकोटा – ऊँचाई 280 मीटर त्रिवेन्द्रम एवं मदुरई के बीच का सम्पर्क मार्ग।


(5) पूर्वी घाट – ये पर्वत पूर्वी तटीय मैदान के समानान्तर महानदी की घाटी से दक्षिण में नीलगिरि तक दक्षिण-पश्चिम दिशा में 1300 किमी की लम्बाई में फैले है। इसकी सबसे ऊँची चोटी महेन्द्रगिरी (1501 मीटर) है जो उङीसा में है। नीलगिरी एवं मालगिरी की पहाङियाँ चंदन एवं सागवान की लकङी के लिए प्रसिद्ध है।


5. तटीय मैदान


 भारत के दो तट है –
1. पूर्वी तटीय मैदान 2. पश्चिमी तटीय मैदान।
 प्रायद्वीपीय पठारी भाग के पूर्व और पश्चिम में दो संकरे तटीय मैदान मिलते है। जिन्हें क्रमशः पूर्वी तटीय व पश्चिमी तटीय मैदान कहा जाता है।


1. पूर्वी तटीय मैदान – यह गंगा नदी के डेल्टा से कुमारी अंतरीप तक फैला है।
इसके पुनः दो भाग है –


 उत्तरी सरकार तट – गंगा नदी के डेल्टा से कृष्णा नदी के डेल्टा तक वाला भाग उत्तरी सरकार तट के नाम से जाना जाता है।
 कोरों मण्डल तट – कृष्णा नदी के डेल्टा से कुमारी अंतरीप तक वाला भाग कोरों मण्डल तट कहलाता है।


 इस मैदान को तीन भागों में बाँटा गया है।


1. उत्कल मैदान – उङीसा में इसमें चिल्का झील स्थित है यहां पर महानदी अपना डेल्टा बनाती है।
2. सीमान्ध्र मैदान – इसमें पुलिकट झील स्थित है।


3. तमिलनाङ का मैदान – यहां कावेरी नदी अपना डेल्टा बनाती है।


2. पश्चिमी तटीय मैदान – इसके तीन भाग है –


 सोराष्ट्र तट – कच्छ के रन से सूरत तक वाला भाग सौराष्ट्र तट के नाम से जाना जाता है। गुजरात में कच्छ के उत्तर में दो लवण मैदान है जिन्हें बङा और छोटा रन कहते है।
 कोंकण तट – सूरत से गोवा तक के तट को कोंकण तट कहते है।
 मालाबार तट – गोवा से कुमारी अंतरिप तक वाला भाग मालाबार तट कहलाता है।


 इसको निम्र भागों में बांटा गया है।
1. कच्छ प्रायद्वीपीय क्षेत्र
2. काठियावाङ प्रायद्वीपीय क्षेत्र – यहां पर माउण्ट गिरनार (1117 मीटर) इसकी सबसे ऊँची चोटी है।
3. गुजरात का मैदान
4. कोंकण मैदान
5. कर्नाटक मैदान
6. केरल मैदान

6. द्वीप समूह


 हिन्द महासागर में भारत के दो द्वीपीय क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है जो अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाङी तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह अरब सागर में है।


1. अण्डमान निकोबार द्वीप समूह


 इन द्वीप समूहों का विस्तार 60 45’ उत्तर एवं 920 10’ पूर्व से 940 15’ पूर्व के मध्य (लगभग 8249 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल) है।


 यह 590 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र है। जिसमें 265 छोटे-बङे द्वीप है।


 अण्डमान के उत्तर से दक्षिण प्रमुख द्वीप क्रमशः है – 1. लैण्डफाल, 2. उत्तरी अण्डमान 3. मध्य अण्डमान 4. दक्षिणी अण्डमान और 5. लिटिल अण्डमान


1. लैण्डफाल – लैण्डफाल (भारत) व कोको (म्यांमार) द्वीप के मध्य कोकोचैनल है।


2. उत्तरी अण्डमान – उत्तरी अण्डमान की सबसे ऊँची चोटी सैडल चोटी (737 मी) है तथा इसके पूर्व में नरकोंडम सुसुप्त ज्वालामुखी स्थित है।


 सैडल चोटी (737 मी.) जो कि उत्तरी अण्डमान द्वीप में है यहां की सबसे ऊँची चोटी है।


3. मध्य अण्डमान – उत्तरी अण्डमान के दक्षिण की ओर मध्य अण्डमान स्थित है, जिसके पूर्व में बैरन सक्रिय ज्वालामुखी स्थित है।


4. दक्षिणी अण्डमान – मध्य अण्डमान के दक्षिण में दक्षिणी अण्डमान स्थित है। दक्षिण अण्डमान द्वीप में अण्डमान निकोबार की राजधानी पोर्ट-ब्लेयर स्थित है। बैरन एवं नारकोंडम द्वीप ज्वालामुखी द्वीप है जो कि पोर्ट ब्लेयर के उत्तर में अवस्थित है।


 यहां 50 किमी चैङे दक्कन पास के दक्षिण में लिटिल अण्डमान द्वीप एवं उत्तर में दक्षिण अण्डमान स्थित है।


5. लिटिल अण्डमान – यह 10 डिग्री चैनल लिटिल अण्डमान और कार निकोबार को पृथक करती है। अण्डमान द्वीप समूह 203 द्वीपों का समूह है।


 निकोबार द्वीप समूह उत्तर से दक्षिण द्वीप क्रमश:-
1. कार निकोबार 2. लिटिल निकोबार 3. ग्रेट निकोबार


 निकोबार समूह के द्वीपों में सात बङे द्वीप है। जिसको क्रमशः कार निकोबार, लिटिल निकोबार और ग्रेट निकोबार में विभाजित किया गया है। ग्रेट निकोबार द्वीप इस समूह का दक्षिणतम द्वीप है एवं इसके दक्षिणी छोर को इंदिरा पाॅइन्ट कहते है। इंदिरा पाॅइन्ट भारत का सबसे दक्षिणी स्थान है।


 अण्डमान निकोबार द्वीपों का निर्माण टर्शियरी काल के बलुवा पत्थर थरों, चूना पत्थरों एवं शैल से हुआ है, जिनके आधार में ज्वालामुखी चट्टानें है।


2. लक्षद्वीप समूह


लक्षद्वीप छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है। पहले इनको लंकाद्वीप, मिनिकाय व एमीनीदीव कहते थे। सन् 1973 में इसका नाम लक्षद्वीप रखा। इसकी राजधानी कावरती है।
 यह 25 द्वीपों का समूह जो 80 उत्तर से 120 20’ उत्तर तथा 710 45’ पूर्व से 740 पूर्व में विस्तारित (लगभग 109 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल) है।


 यहाँ 110 उत्तरी अक्षांश के उत्तर वाले द्वीपों को अमनदीवी द्वीप एवं इसके दक्षिण के द्वीपों को कैन्नानोर द्वीप कहते है। इस समूह के सबसे दक्षिण में मिनिकाॅय द्वीप (सबसे बङा) है। 80 उत्तरी अक्षांश मिनिकाॅय द्वीप एवं मालद्वीव देश के बीच स्थित है।


 इन द्वीपों की उत्पत्ति प्रवालों से हुई है एवं इन द्वीपों के चारों ओर प्रवाल भित्तियाँ पायी जाती है।

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