Atmosphere layers || वायुमण्डल की परतें || Geography

वायुमंडल की परतें

दोस्तों आज की पोस्ट में हम बात करेंगे कि वायुमंडल की परतें(atmosphere layers) कैसे होती है ,क्यों कि इस टॉपिक का जानना हमारे लिए बहुत जरुरी होगा |

वायुमण्डल की संरचना(atmosphere layers)

यद्यपि वायुमण्डल को विस्तार लगभग 10,000 किमी. की ऊँचाई तक मिलता है परन्तु वायुमण्डल का 99 प्रतिशत भार सिर्फ 32 किमी. की ऊँचाई तक सीमित है। वायुमण्डल को 5 विभिन्न संस्तरों में बांटकर देखा जा सकता है।

1. क्षोभमण्डल(Troposphere) वायुमण्डल की सबसे निचला संस्तर जो ’भूमध्य रेखा’ पर 18 किमी. एवं धुव्रों पर लगभग 8 किमी. की ऊंचाई तक पाया जाता है। इस मण्डल में प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान में 1°C   की कमी आती है अतः इसे ’परिवर्तन मण्डल’ कहते है।

इस मंडल को ’संवहन मण्डल/विक्षोभ मण्डल’ भी कहते हैं, क्योंकि संवहन धाराएँ इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती है। इस मंडल को ’अधोमंडल/सजीवों को जन्म देने वाली’ भी कहते है। वायुमण्डल में होने वाली समस्त मौसमी गतिविधियाँ जैसे- जलवायु परिवर्तन, बादल बनना, आँधी, तूफान एवं वर्षा इसी क्षोभमण्डल में ही पाई जाती है।

क्षोभ सीमा परिवर्तन मण्डल और समताप मण्डल के मध्य लगभग 2 किमी. की मोटी परत क्षोभ सीमा (ट्रोपोपाज) कहलाती है।

2. समताप मण्डल(Stratosphere) इस मण्डल की खोज ’टोजरेस डी बोर्ट’ (1898 ई.) ने की। इस मण्डल में प्रारंभ में तापमान स्थिर (तापमान सम्बन्धी वितरण में समानता अतः इसे समताप मण्डल) होता है, परन्तु 20 किमी. की ऊँचाई के बाद तापमान में अचानक वृद्धि होती है जो ओजोन परत द्वारा पराबैंगनी किरणों के अवशोषण के कारण होती है।

यह मण्डल मौसमी गतिविधियों से मुक्त होता है अतः वायुयान इसी मण्डल में उङान भरते हैं। इस मंडल में विशेष प्रकार के मेघों का निर्माण है जिन्हें ’मूलाभ मेघ’ कहते हैं।

3.ओजोन मण्डल(Ozone circle) धरातल से 32 से 50 किमी. के मध्य ओजोन मण्डल है। इस मण्डल में ओजोन गैस की एक परत मानी जाती हे, जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है।

इसलिए इसे ’पृथ्वी का सुरक्षा कवच’ कहते हैं। ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस CFC गैस में उपस्थित सक्रिय क्लोरीन के कारण होती है। इस मण्डल में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है।

प्रति एक किमी. की ऊँचाई पर तापमान में 5°C की वृद्धि होती है। कुछ विद्वान इसे उष्ण परत को ’मध्य मण्डल’ तथा कुछ इसे ’रसायन मण्डल’ भी कहते है।

4. मध्य मण्डल(madhy mandal) यह मण्डल 50 किमी. से 80 किमी. की ऊँचाई पर पाया जाता है। मध्य मण्डल में ऊँचाई के साथ तापमान में कमी आती है इसीलिए यहाँ पर तापमान गिरकर- 100°C तक पहुँच जाता है।

5. आयन मण्डल(Ionosphere) इस मण्डल में विद्युत आवेशित कणों की अधिकता होती है एवं ऊँचाई के साथ तापमान (1000°C ) बढने लगता है इसी मण्डल से रेडियो तरंगे परावर्तित होती है संचार उपग्रह इसी मण्डल में अवस्थित होते हैं। उल्कापिंड जलकर नष्ट हो जाते है।

6. बर्हिमण्डल/चुम्बकीय मण्डल(Berhmanal) बर्हिमण्डल वायुमण्डल का सबसे ऊपरी भाग है। आयन मण्डल के बाद वायुमण्डल बहुत ही विरल हो जाता है और अंतत 1000 किमी. की ऊँचाई के बाद क्रमशः अंतरिक्ष में विलीन हो जाता है।

इस मण्डल में हाइड्रोजन एवं हीलियम गैस की प्रधानता होती है।

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