भारत की प्रमुख झीलें: भौगोलिक स्वरूप, विशेषताएँ और महत्वपूर्ण तथ्य
भारत विविध भौगोलिक विशेषताओं का देश है, जहाँ ऊंचे पर्वत-शिखरों और विशाल मरुस्थलों के साथ-साथ अनगिनत सुंदर और विशाल झीलें पाई जाती हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की ये झीलें न केवल देश की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाती हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र, मत्स्य पालन, पर्यटन, जलविद्युत उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र हैं। परीक्षा की दृष्टि से भी भारत की प्रमुख झीलों से जुड़े प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, State PSC आदि) में अक्सर पूछे जाते हैं। इस लेख में हम भारत की प्रमुख झीलों, उनकी विशेषताओं, प्रकार और भौगोलिक स्थिति का व्यवस्थित अध्ययन करेंगे।
भारत की प्रमुख झीलें
1. अष्टमुडी झील (केरल)
यह झील केरल के कोल्लम जिले में स्थित एक प्रमुख लैगुन या कयाल झील है। इसकी कुल 8 शाखाएँ हैं जो इसे बेहद खास बनाती हैं। पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए रामसर समझौते द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्र भूमि (Wetland) घोषित किया गया है।
2. वूलर झील (जम्मू एवं कश्मीर)
यह भारत की ताजे मीठे जल की वृहत्तम (सबसे बड़ी) झील है। यह प्रसिद्ध झेलम नदी के मार्ग पर निर्मित एक प्राकृतिक गोखुर झील (Oxbow Lake) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
3. ओडिशा की चिल्का झील (ओडिशा)
चिल्का झील भारत की खारे पानी की सबसे बड़ी लैगुन झील है। यह विशेष रूप से झींगा मछली के उत्पादन और विशाल जैव विविधता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। सर्दियों के मौसम में यहाँ लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं।
4. कोलेरू झील (आंध्र प्रदेश)
यह आंध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा के मध्य स्थित एक महत्वपूर्ण ताजे जल की झील है, जो जल पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है।
5. चेंबरमबक्कम झील (तमिलनाडु)
यह तमिलनाडु के चिंगपट्टू जिले में चेन्नई शहर से लगभग 40 किमी दक्षिण में स्थित है। ऐतिहासिक रूप से इस झील से अड्यार नदी का उद्गम होता है जो चेन्नई के जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है।
6. चो-ल्हामू झील (सिक्किम)
सिक्किम के अत्यंत उत्तरी भाग में अधिक ऊँचाई पर स्थित यह झील भारत की सबसे ऊँची झील मानी जाती है। इसी महत्वपूर्ण झील से तीस्ता नदी का उद्गम होता है।
7. डाल झील (जम्मू एवं कश्मीर)
यह कश्मीर घाटी की हिमानी (Glacial) निर्मित ताजे जल की एक बेहद लोकप्रिय झील है। कई स्थानों पर दलदली होने के कारण इसकी गहराई कम है, लेकिन अपनी हाउसबोट और शिकारा संस्कृति के कारण यह पर्यटन का केंद्र है।
8. ढेंबर झील / जयसमंद झील (राजस्थान)
राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित यह झील भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम (Man-made) झील है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में उदयपुर के राजा राणा जयसिंह द्वारा करवाया गया था।
9. लोनार झील (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित यह झील अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि इसका निर्माण ज्वालामुखी या उल्कापात (Meteorite impact) के परिणामस्वरूप हुआ है। इसका पानी खारा और क्षारीय दोनों है।
10. लोकटक झील (मणिपुर)
यह झील विश्वभर में अपनी ‘तैरती द्वीपीय झील’ यानी फुण्डी (Phumdi) के रूप में प्रसिद्ध है। इसी अनूठी झील के भीतर विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय पार्क – केइबुल् लामजाओ राष्ट्रीय पार्क स्थित है।
11. वेम्बनाड झील (केरल)
केरल तट पर स्थित यह खारे पानी की लैगुन झील भारत की सबसे लंबी झील मानी जाती है। इस झील के भीतर वेलिंगटन द्वीप और वल्लारपदम् जैसे प्रसिद्ध द्वीप स्थित हैं जहाँ नौकायन प्रतियोगिताएं होती हैं।
12. सतताल झील (उत्तराखंड)
यह उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र में झीलमताल नगर के निकट आपस में जुड़ी कई झीलों का एक खूबसूरत समूह है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्राकृतिक स्वर्ग माना जाता है।
13. सांभर झील (राजस्थान)
राजस्थान में स्थित यह देश के अंतःप्रवाही क्षेत्र की खारे पानी की झील है, जो भारत में नमक (Sodium Chloride) के कुल उत्पादन का एक बहुत बड़ा और प्रमुख स्रोत है।
14. सोंगमो झील / त्सोंगमो झील (सिक्किम)
सिक्किम की राजधानी गंगटोक से थोड़ी दूर स्थित यह एक अत्यंत पवित्र और सुंदर ताजे पानी की हिमनद झील है, जो सर्दियों में पूरी तरह जम जाती है।
भारत के अन्य राज्यों की प्रमुख झीलें एवं उनके महत्वपूर्ण तथ्य
कर्नाटक: बेलंदूर झील, पंपा सरोवर (रामायण कालीन ऐतिहासिक महत्व), और बेंगलुरु की प्रसिद्ध उल्सूर झील (Ulsoor Lake)।
गुजरात: नल सरोवर (पक्षी अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध), नारायण सरोवर, कांकरिया झील (अहमदाबाद की लोकप्रिय कृत्रिम झील) और वस्त्रपुर झील।
जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग, नागीन, बेरीनाग, डाल, वूलर, शेषनाग झील, और इसके साथ ही यहाँ मानसबल झील भी स्थित है जो अपनी अत्यधिक सुंदरता के लिए जानी जाती है।
लद्दाख: पैंगोंग त्सो (Pangong Tso – अपनी रंग बदलने वाली क्षमता के लिए विश्व प्रसिद्ध), सोमोरिरी झील, और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण त्सकार झील (Tso Kar)।
महाराष्ट्र: लोनार (उल्कापात निर्मित), पवई, गोरेवाड़े, सलीम अली सरोवर, और मुंबई की प्रसिद्ध विहार झील (Vihar Lake)।
पंजाब: कांजली, हरिके (वेटलैंड और पक्षी अभयारण्य), रोपड़, और सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल से जुड़ी सुखना झील (चंडीगढ़ सीमा के निकट)।
राजस्थान: पिछोला (उदयपुर की ऐतिहासिक झील), सांभर, पदपद्रा, राजसमंद, जयसमंद, डीडवाना, पुष्कर (पवित्र झील), फतेह सागर, उदय सागर, और इसके साथ ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र नक्की झील (माउंट आबू)।
तेलंगाना: हुसैन सागर (बुद्ध प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध), उस्मानसागर, हिमायत सागर, और ऐतिहासिक दुर्गम चेरुवु (Durgam Cheruvu)।
निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहा जाए तो भारत की झीलें देश के भौगोलिक संतुलन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि की रीढ़ हैं। उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों की मीठे पानी की हिमनदी झीलें हों या दक्षिण व तटीय राज्यों की विशाल लैगुन व खारे पानी की झीलें, प्रत्येक का अपना विशिष्ट ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व है। सतत विकास और जल संरक्षण की वर्तमान माँग के तहत इन प्राकृतिक संपदाओं को सहेजना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियाँ भी इनकी सुंदरता और उपयोगिता से लाभान्वित हो सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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